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आला हज़रत ने दाढ़ी के विरोधियों को दिया “दांत तोड़ जवाब”





 

आला हज़रत ने दाढ़ी के विरोधियों को दिया “दांत तोड़ जवाब”

जालना में दरगाह सैयद अहमद शेर सवार में 107वां उर्स-ए-आला हज़रत संपन्न

जालना : शहर की प्रसिद्ध दरगाह सैयद अहमद शेर सवार में बुधवार को 107वां उर्स-ए-आला हज़रत पूरे अकीदे, जोश और ख़रोश के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का आग़ाज़ दोपहर 2 बजे कुरानख़ानी से हुआ, जिसके बाद 2:38 बजे कुल शरीफ़ की तिलावत की गई।

इस मौके पर फ़ारूक़ मेमन और हाफ़िज़ रेहान राजा ने नात शरीफ़ पेश कर माहौल को रूहानी रंगत बख़्शी।

दरगाह के मुतवल्ली सैयद जमील मौलाना ने अपने संबोधन में आला हज़रत अहमद रज़ा खान बरेलवी की इल्मी व दीनी सेवाओं का ज़िक्र करते हुए बताया कि उन्होंने एक हज़ार से अधिक किताबें लिखीं, जिनमें से कई किताबें आज भी पूरी दुनिया में मुसलमान तवज्जो से पढ़ते हैं। वे 50 से अधिक उलूम व फुनून के माहिर थे और “आशिक़-ए-रसूल” तथा “बेमिसाल मुफ़्ती” के नाम से मशहूर हैं।

उन्होंने आला हज़रत की हाज़िरजवाबी का एक वाक़या सुनाते हुए कहा कि जब किसी ने दाढ़ी को फ़ितरत के ख़िलाफ़ बताया तो आला हज़रत ने जवाब दिया –

“अगर बच्चा दाढ़ी के बिना पैदा होता है तो दांतों से भी ख़ाली होता है। जो लोग दाढ़ी का विरोध करते हैं, उन्हें चाहिए कि अपने दांत भी तोड़ दें।”

कार्यक्रम के दौरान रज़ा अकादमी और दारुल उलूम गुलशन कादरी की ओर से हाफ़िज़ रेहान रजा और हाजी असलम नाथानी को विशेष सम्मान प्रदान किया गया। यह सम्मान उन्हें 1500वीं सालाना विलादत-ए-रसूल (स.अ.) के अवसर पर मदीना मुनव्वरा में हाज़िरी का शरफ़ प्राप्त होने पर दिया गया।

उर्स में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। इस अवसर पर उपस्थित लोग थे:

  • हाफ़िज़ सैयद उमर
  • मौलाना नौशाद
  • अमजद रजा
  • मौलाना मसीहुद्दीन
  • मौलाना अरमान अलीमी
  • मौलाना तौफ़ीक़ मिस्बाही
  • हाफ़िज़ सरताज
  • हाफ़िज़ अबरार
  • हाफ़िज़ असरार
  • हाजी शमीम मेमन
  • हाजी अब्दुल अज़ीज़ ममदानी
  • अय्यूब ख़ान
  • अन्य अनेक उपस्थित लोग

 

"जालना में दरगाह सैयद अहमद शेर सवार में 107वां उर्स-ए-आला हज़रत संपन्न, आला हज़रत ने दाढ़ी विरोधियों को दिया ‘दांत तोड़ जवाब’, और हाफ़िज़ रेहान राजा व हाजी असलम नाथानी को विशेष सम्मान प्रदान किया गया।"
जालना में दरगाह सैयद अहमद शेर सवार में 107वां उर्स ए आला हज़रत संपन्न

कार्यक्रम के दौरान रज़ा अकादमी और दारुल उलूम गुलशन कादरी की ओर से हाफ़िज़ रेहान रजा और हाजी असलम नाथानी को विशेष सम्मान प्रदान किया गया. यह सम्मान उन्हें 1500वीं सालाना विलादत-ए-रसूल (स.अ.) <a href='https://newsnationonline.com/india/jalna-owaisi-attack-bjp-nationalism-foreign-policy/'>के अवसर पर मदीना मुनव्वरा में हाज़िरी का</a> शरफ़ प्राप्त होने पर दिया गया.” class=”wp-image-11176″/><figcaption class=कार्यक्रम के दौरान रज़ा अकादमी और दारुल उलूम गुलशन कादरी की ओर से हाफ़िज़ रेहान रजा और हाजी असलम नाथानी को विशेष सम्मान प्रदान किया गया. यह सम्मान उन्हें 1500वीं सालाना विलादत-ए-रसूल (स.अ.) के अवसर पर मदीना मुनव्वरा में हाज़िरी का शरफ़ प्राप्त होने पर दिया गया.


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