आयकर रिटर्न न भरने से दुर्घटना मुआवज़े पर पड़ता है असर: अधिवक्ता महेश एस. धन्नावत की नागरिकों से महत्वपूर्ण अपील
जालना। “अच्छी आय होते हुए भी केवल आयकर रिटर्न दाखिल न करने के कारण अनेक दुर्घटना पीड़ित और उनके परिवार कानूनी रूप से मिलने वाली मुआवज़े की राशि से वंचित रह जाते हैं।” यह चेतावनी जालना नोटरी एसोसिएशन के कार्याध्यक्ष अधिवक्ता महेश एस. धन्नावत ने देते हुए कहा कि जिले में कई नागरिक पर्याप्त आय अर्जित करते हैं, लेकिन रिटर्न दाखिल करने के प्रति उदासीन रहते हैं। दुर्घटना की स्थिति में न्यायालय के समक्ष आय का ठोस प्रमाण न होने पर मुआवज़े की राशि या तो बहुत कम मिलती है या दावा ही खारिज हो जाता है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि अपने कानूनी अधिकार और आर्थिक भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए समय पर आयकर रिटर्न अवश्य दाखिल करें।
अधिवक्ता धन्नावत ने हाल ही में आए एक महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय का उल्लेख करते हुए बताया कि कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मोटर दुर्घटना दावों में आयकर रिटर्न को आय निर्धारण का एक विश्वसनीय और अधिकृत दस्तावेज माना है। संध्या रानी जना बनाम आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस मामले में न्यायालय ने स्पष्ट किया कि विभाग द्वारा स्वीकार किया गया आयकर रिटर्न पीड़ित के वास्तविक आय का आधिकारिक प्रमाण माना जाएगा।
न्यायालय के प्रमुख निष्कर्ष
उच्च न्यायालय ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने रिटर्न दाखिल नहीं किया है, तो आय सिद्ध करने के लिए बैंक विवरण, व्यवसायिक दस्तावेज और अन्य कागजात प्रस्तुत करने पड़ते हैं। लेकिन जब आयकर रिटर्न उपलब्ध हो और विभाग द्वारा स्वीकार किया जा चुका हो, तो उस पर संदेह करने का कोई कारण नहीं रहता।
संबंधित मामले में मृत व्यक्ति के तीन वर्षों के आयकर रिटर्न को नजरअंदाज़ कर दुर्घटना न्यायाधिकरण ने कम आय मान ली थी, जिसे उच्च न्यायालय ने त्रुटिपूर्ण मानते हुए संशोधित किया। न्यायालय ने कहा कि स्वयं-रोज़गार वाले व्यक्तियों के लिए आयकर रिटर्न ही आय का सबसे विश्वसनीय प्रमाण है।
सर्वोच्च न्यायालय ने भी कई मामलों में आयकर रिटर्न को आय का वैधानिक और निर्णायक दस्तावेज माना है।
जालना की स्थिति और अधिवक्ता धन्नावत की सलाह
अधिवक्ता धन्नावत ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जालना और आसपास के क्षेत्रों में अनेक व्यापारी, व्यवसायी तथा किसान पर्याप्त आय अर्जित करते हैं, लेकिन जानकारी के अभाव या लापरवाही के कारण रिटर्न दाखिल नहीं करते। उन्होंने कहा कि दुर्घटना जैसी आकस्मिक स्थितियों में यदि परिवार का कमाऊ सदस्य अपंग हो जाए या मृत्यु हो जाए, तो मुआवज़ा परिवार के लिए आर्थिक सहारा होता है। परंतु रिटर्न न भरने के कारण यह कानूनी अधिकार कमजोर पड़ जाता है।
उन्होंने कहा कि नागरिक केवल कर बचाने या प्रक्रियाओं से बचने के लिए रिटर्न दाखिल करने से न कतराएँ। कर्ज, वीज़ा, बीमा दावों और विशेष रूप से दुर्घटना मुआवज़ा मामलों में आयकर रिटर्न अत्यंत महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इसलिए सभी पात्र नागरिकों को अपने और अपने परिवार के सुरक्षित भविष्य के लिए समय पर आयकर रिटर्न दाखिल करना चाहिए।
Dhannawat Law Associates
Adv. Mahesh S. Dhannawat
B.Com, L.L.M, G.D.C. & A.
Ex–Vice President, Jalna District Bar Association
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