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वक्फ कानून पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी — अंतरिम आदेश टाला, गुरुवार को अगली सुनवाई

वक्फ कानून पर सुप्रीम कोर्ट ने टाला अंतरिम आदेश, गुरुवार को होगी अगली सुनवाई

नई दिल्ली, 16 अप्रैल 2025 – सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के खिलाफ दायर 73 याचिकाओं पर सुनवाई की, लेकिन अंतरिम आदेश पारित करने से परहेज किया। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की तीन सदस्यीय पीठ ने एक प्रस्तावित आदेश का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया कि ‘वक्फ बाय यूजर’ सहित घोषित वक्फ संपत्तियों को गैर-अधिसूचित नहीं किया जाएगा। केंद्र सरकार ने इस प्रस्ताव का विरोध किया और आगे सुनवाई की मांग की। कोर्ट ने अंतरिम आदेश पर फैसला लेने के लिए गुरुवार दोपहर 2 बजे अगली सुनवाई तय की है।

कोर्ट की चिंता और निर्देश

सुनवाई के दौरान, पीठ ने कोलकाता में वक्फ कानून से जुड़ी हिंसा पर चिंता जताई और स्पष्ट किया कि आस्था की परवाह किए बिना पदेन सदस्यों की नियुक्ति हो सकती है, लेकिन वक्फ बोर्ड के अन्य सदस्यों का मुस्लिम होना अनिवार्य है। मुख्य न्यायाधीश ने बार-बार दोहराए जाने वाले तर्कों से बचने का निर्देश दिया और कहा:

“हम सभी को नहीं सुन सकते। हम तय करेंगे कि कौन बहस करेगा और नामों की सूची बनाएंगे। कोई भी तर्क दोहराया नहीं जाएगा।”

सभी याचिकाकर्ताओं को अपने तर्कों के आधार सहित संक्षिप्त नोट तैयार करने का निर्देश दिया गया।

सुनवाई में प्रमुख तर्क और चर्चा

याचिकाकर्ताओं की दलीलें

  • कपिल सिब्बल का तर्क: उन्होंने कहा कि यह कानून संविधान के अनुच्छेद 26 का उल्लंघन करता है। वक्फ इस्लाम का अभिन्न हिस्सा है और इसमें सरकारी हस्तक्षेप असंवैधानिक है।
  • धारा 3(आर) और 3(ए)(2) पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इससे महिलाओं के अधिकारों में हस्तक्षेप होता है, जबकि सरकार को ऐसा अधिकार नहीं है।
  • जामा मस्जिद और अन्य प्राचीन संपत्तियों पर सरकार के दावों को भी अनुचित बताया।
  • धारा 9 और 14 के तहत गैर-मुस्लिमों की नियुक्ति को ‘मुस्लिम संपत्तियों का सरकारीकरण’ बताया।
  • ‘वक्फ बाय यूजर’ को समाप्त करना, इस्लामी परंपराओं के खिलाफ बताया।

केंद्र सरकार का पक्ष – सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता

  • सरकारी संपत्ति पर वक्फ का दावा नहीं किया जा सकता। कलेक्टर विवादों का समाधान करेंगे।
  • पंजीकृत संपत्तियां सुरक्षित रहेंगी, लेकिन गैर-पंजीकृत संपत्तियों पर जांच आवश्यक है।
  • धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन नहीं हो रहा है। मुसलमान ट्रस्ट के ज़रिए भी दान कर सकते हैं।
  • धारा 81 के तहत गठित ट्रिब्यूनल विवादों का निपटारा करेगा, जो न्यायिक समीक्षा के अधीन रहेगा।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां

  • धर्मनिरपेक्षता: अनुच्छेद 26 सभी पर समान रूप से लागू होता है।
  • समानता का सवाल: कोर्ट ने पूछा – क्या सरकार हिंदू ट्रस्टों में मुस्लिमों की नियुक्ति की अनुमति देगी?
  • जामा मस्जिद और स्मारक: अगर पहले वक्फ घोषित किया गया था, तो स्मारक बनने पर भी उसकी मान्यता बरकरार रहेगी।
  • धारा 3(सी)(2): पर चिंता जताई कि बिना समय सीमा के संपत्ति पर सरकार का दावा अनुचित है।
  • विधायिका बनाम न्यायपालिका: कोर्ट ने कहा कि कोई कानून अदालती निर्णय को अमान्य नहीं कर सकता।

पृष्ठभूमि और आगामी दिशा

यह मामला वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की संवैधानिक वैधता से जुड़ा है, जिसे याचिकाकर्ता धार्मिक स्वतंत्रता पर अतिक्रमण और सरकारी नियंत्रण के रूप में देख रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को अंतरिम आदेश पर निर्णय लेगा

निष्कर्ष: यह कानूनी लड़ाई धर्म, कानून और राज्य के बीच संतुलन की एक बड़ी परीक्षा है, जिसका असर भारत में वक्फ संपत्तियों के प्रशासन पर गहरा पड़ सकता है।

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Imran Siddiqui

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