एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने 26 दिन बाद अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी। देर रात केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने मेदांता अस्पताल पहुंचकर उनसे मुलाकात की और अनशन खत्म करवाया। अनशन समाप्त करने के बाद जारी वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने बताया कि पिछले दो दिनों तक सरकार के साथ लगातार बातचीत चली और अंततः उन्हें लिखित आश्वासन दिया गया, जिसके बाद उन्होंने अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया।
सरकार ने दिए ये लिखित आश्वासन
सोनम वांगचुक के अनुसार सरकार ने लिखित रूप से भरोसा दिया है कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों और युवाओं या 20 जुलाई के “संसद चलो” मार्च में शामिल लोगों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई या एफआईआर नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि पेपर लीक प्रकरण में जान गंवाने वाले 20 से अधिक बच्चों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाएगा। साथ ही संसद में शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और जवाबदेही के मुद्दे पर विस्तृत चर्चा कराने का भी आश्वासन दिया गया है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर क्या बोले?
सोनम वांगचुक ने स्पष्ट किया कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर सरकार ने कोई लिखित या निश्चित आश्वासन नहीं दिया। उन्होंने कहा कि उनके सामने दो विकल्प थे—या तो अनिश्चितकाल तक अनशन जारी रखें या फिर मिले आश्वासनों के आधार पर आंदोलन के अगले चरण की ओर बढ़ें। उनके अनुसार इस्तीफा सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा नहीं था, बल्कि छात्रों के भविष्य की सुरक्षा और आंदोलनकारियों के खिलाफ कार्रवाई रोकना ज्यादा जरूरी था।
आंदोलन जारी रखने का दिया संदेश
सोनम वांगचुक ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल किसी व्यक्ति का इस्तीफा नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करना है। उन्होंने आंदोलन का समर्थन करने वाले लोगों का धन्यवाद करते हुए कहा कि सरकार के लिखित आश्वासनों के आधार पर उन्होंने अनशन समाप्त किया है और आगे भी छात्रों के हितों की रक्षा तथा शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए आवाज उठाते रहेंगे।
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