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अण्णा भाऊ साठे ने साहित्य से जगाई मानवता की लौ – डॉ. सोमनाथ कदम

अण्णा भाऊ साठे ने साहित्य से जगाई मानवता की लौ – डॉ. सोमनाथ कदम

अण्णा भाऊ साठे ने साहित्य से जगाई मानवता की लौ – डॉ. सोमनाथ कदम

जालना, 11 अगस्त — लोकमंगल प्रतिष्ठान द्वारा आयोजित साहित्यरत्न अण्णा भाऊ साठे व्याख्यानमाला के उद्घाटन सत्र से रिपोर्ट

लोकप्रबोधनकार अण्णा भाऊ साठे ने अपने साहित्य के माध्यम से समाज में मानवतावादी विचारों को गहराई से फैलाया और सामाजिक परिवर्तन के बीज बोए — यह विचार कणकवली के लेखक व शोधकर्ता डॉ. सोमनाथ कदम ने व्यक्त किए।

डॉ. कदम यह बोल रहे थे जब डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर सभागृह में लोकमंगल प्रतिष्ठान द्वारा आयोजित व्याख्यानमाला का उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन युवा सेना के महाराष्ट्र प्रदेश सचिव अभिमन्यू खोतकर ने किया। इस अवसर पर वरिष्ठ श्रमिक नेता सगीर अहमद, माळी महासंघ के जिलाध्यक्ष संतोष रासवे, व्याख्यानमाला के अध्यक्ष शैलेश घुमारे, कार्याध्यक्ष किरण शिरसाठ, उपाध्यक्ष ललित कुचेकर, कोषाध्यक्ष सतीश कसबे तथा अनेक गणमान्य उपस्थित थे।

डॉ. कदम ने कहा कि अण्णा भाऊ साठे ने विखारी परंपराओं का परित्याग करके विचारशील परंपराओं को अपनाया और पोवाड़ा, लावणी, झक्कड़ जैसी लोक विधाओं के माध्यम से जनमानस में चेतना जगाई। उनके साहित्य का मूल उद्देश्य सामाजिक व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन लाना था।

डॉ. कदम ने आगे कहा कि अण्णा भाऊ साठे ने अपने लेखन से “मानव को मानव के रूप में सम्मान” का संदेश दिया। उन्होंने आम आदमी के श्रम, उसके आंसू और संघर्ष को साहित्य में स्थान देकर मानवता की रक्षा की और माणुसकी की गरिमा बनाए रखी। इसलिए उनका साहित्य अजरामर है और आज भी प्रासंगिकता बनाए हुए है।

उद्घाटन भाषण में अभिमन्यू खोतकर ने महापुरुषों के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने पर जोर दिया और नारी सम्मान तथा साहित्य पठन की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने बताया कि अण्णा भाऊ साठे की जयंती के अवसर पर यह व्याख्यानमाला पिछले 10 वर्षों से विचार जागरण का काम कर रही है।

मुख्य अतिथि सगीर अहमद ने अपने पिता, श्रमिक नेता इफ्तेखार अहमद के साथ अण्णा भाऊ साठे द्वारा चलाये गए सामाजिक अभियानों और जालना में हुई बैठकों की यादें साझा कीं।

व्याख्यानमाला के अध्यक्ष शैलेश घुमारे ने कहा कि उनका उद्देश्य साठे के विपुल लेखन और विचारों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना है तथा आगे भी इसी दिशा में विविध सामाजिक उपक्रम आयोजित किए जाएंगे।

कार्यक्रम का प्रारम्भ अण्णा भाऊ साठे की प्रतिमा पर पुष्पांजलि और दीपप्रज्वलन से हुआ। जयंती के अवसर पर आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को अभिमन्यू खोतकर व डॉ. सोमनाथ कदम ने सम्मानित किया। संचालन आशिष रसाळ ने किया और आभार प्रकट किए किरण शिरसाठ।

इस मौके पर रामदादा गायकवाड, डॉ. रावसाहेब ढवळे, डॉ. विजय कुमठेकर, गणेश चांदोडे, नंदा पवार, पंडित तडेगावकर, बबनराव कसबे, एस. आर. साबळे, संजय हेरकर, अशोक घोडे, प्रशांत आढाव, अनिलकुमार धारे, सतीश राऊत, अरुण लोखंडे समेत अनेक विद्यार्थी तथा परिवर्तनवादी चळवळी के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

Main Points in English

  • Anna Bhau Sathe was a pioneering writer who promoted humanistic and social reform ideas through his literature.
  • Dr. Somnath Kadam highlighted Sathe’s rejection of outdated traditions in favor of progressive thinking during a lecture series inauguration in Jalna.
  • Sathe’s work included folk forms like Powada, Lavani, and Jhakkad to raise social awareness.
  • His core message was respecting humans as humans, emphasizing dignity, labor, and struggles of the common people.
  • The lecture series, ongoing for over 10 years, aims to spread Sathe’s ideology widely, especially among the younger generation.
  • Prominent leaders including youth and labor representatives participated in the event, underscoring the continuing relevance of Anna Bhau Sathe’s thoughts.
  • Winners of various competitions held in Anna Bhau Sathe’s honor were felicitated during the program.

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