जालना में पहली बार सैयद अब्दुररब मखदूमी ‘चाँद बाबू’ का ऐतिहासिक आगमन
सालाना जलसे में मिलेगा रूहानी फैज़, दीनी व सामाजिक एकता का पैग़ाम
जालना।
हिंदुस्तान की प्रसिद्ध रूहानी दरगाह खानकाहे फिरदौसिया कियामिया चिश्तिया मखदूमीया सुभहानिया बिलहरी शरीफ के वर्तमान सज्जादानशीन, आले-रसूल औलाद-ए-अली हज़रत शाह अल्लामा सैयद अब्दुररब मखदूमी (अलमारूफ़ ‘चाँद बाबू’) का जालना और इस क्षेत्र में पहली बार आगमन होने जा रहा है। उनके तशरीफ़ लाने की ख़बर से जालना शहर सहित आसपास के इलाक़ों में विशेष उत्साह और आध्यात्मिक उमंग का माहौल है।
जानकारी के अनुसार, हज़रत सैयद अब्दुररब मखदूमी ‘चाँद बाबू’ 24 जनवरी 2026, शनिवार को खरपुडी रोड स्थित कृषि केंद्र के पास दारुल उलूम रजविया लतीफिया मिसबाहुल उलूम के सालाना जलसे में शिरकत करेंगे। इस जलसे का उद्देश्य समाज में दीन की समझ, अच्छे अख़लाक़, भाईचारे, आपसी सद्भाव और सामाजिक एकता को मज़बूत करना है।
मौलाना गुलाम जिलानी मिस्बाही ने बताया कि खानकाहे फिरदौसिया बिलहरी शरीफ सदियों से अहले-बैत की सियादत, करामात और रूहानी परंपरा की अनोखी मिसाल रही है। इस मुक़द्दस दरबार में हर दौर में उलेमा, मशाइख़, फुक़रा और अल्लाह वाले हाज़िरी देते रहे हैं। इतिहास साक्षी है कि राजा-महाराजा और नवाबों ने भी इस दरगाह की ज़ियारत को अपने लिए सौभाग्य माना।
मुग़ल काल के महान शासक औरंगज़ेब आलमगीर के इस रूहानी दरबार में हाज़िर होने का उल्लेख मिलता है। उनके समय भारत की सरज़मीं पर आले-रसूल की जो सूची तैयार की गई थी, उसमें इस ख़ानदान का नाम तीसरे क्रम पर दर्ज बताया जाता है। उस युग के दुनिया-त्यागी फकीर और अल्लाह वाले भी इस खानकाह की ज़ियारत को अपने जीवन का फ़ख़्र समझते थे।
इस महान रूहानी सिलसिले की बुनियाद आले-रसूल हज़रत अश्शाह क़ियामुद्दीन भीका शाह मक्की (रह.) ने रखी थी, जो मक्का मुकर्रमा से तशरीफ़ लाए थे। उनसे जुड़ी करामात आज भी मशहूर हैं—चाहे तालाब के पानी से वुज़ू को लेकर कही गई भविष्यवाणी हो या घाघरा नदी से संबंधित करामत—जिनका ज़िक्र आज भी अकीदत के साथ किया जाता है।
इसी रूहानी परंपरा के सच्चे वारिस और अमीन के रूप में सैयद अब्दुररब मखदूमी ‘चाँद बाबू’ को मसलक-ए-आला हज़रत का प्रामाणिक प्रतिनिधि माना जाता है। उनकी रूहानी शख़्सियत, इस्लाही पैग़ाम और सामाजिक सौहार्द का संदेश देशभर में विशेष सम्मान के साथ स्वीकार किया जाता है।
यह भव्य कार्यक्रम मग़रिब की नमाज़ के बाद शाम 7 बजे से शुरू होगा, जिसके पश्चात नियाज़ शरीफ का आयोजन भी किया जाएगा। आयोजकों ने जालना शहर और आसपास के क्षेत्रों के लोगों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस ऐतिहासिक जलसे में शिरकत करें, हज़रत की ज़ियारत से रूहानी फैज़ हासिल करें और आपसी भाईचारे व एकता के इस पैग़ाम का हिस्सा बनें।

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❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
❓ सैयद अब्दुररब मखदूमी ‘चाँद बाबू’ का जालना आगमन कब हो रहा है?
उत्तर: सैयद अब्दुररब मखदूमी ‘चाँद बाबू’ का जालना आगमन शनिवार, 24 जनवरी 2026 को हो रहा है।
❓ सैयद अब्दुररब मखदूमी ‘चाँद बाबू’ कौन हैं?
उत्तर: सैयद अब्दुररब मखदूमी ‘चाँद बाबू’ हिंदुस्तान की मशहूर रूहानी दरगाह खानकाहे फिरदौसिया बिलहरी शरीफ के वर्तमान सज्जादानशीन और मसलक-ए-आला हज़रत के प्रामाणिक प्रतिनिधि माने जाते हैं।
❓ जालना में उनका कार्यक्रम कहां आयोजित किया जाएगा?
उत्तर: यह कार्यक्रम खरपुडी रोड स्थित कृषि केंद्र के पास दारुल उलूम रजविया लतीफिया मिसबाहुल उलूम, जालना में आयोजित किया जाएगा।
❓ सालाना जलसे का उद्देश्य क्या है?
उत्तर: सालाना जलसे का उद्देश्य समाज में दीन की समझ, अच्छे अख़लाक़, भाईचारे, आपसी एकता और सामाजिक सद्भाव को मज़बूत करना है।
❓ कार्यक्रम किस समय शुरू होगा?
उत्तर: यह कार्यक्रम मग़रिब की नमाज़ के बाद शाम 7 बजे शुरू होगा, जिसके बाद नियाज़ शरीफ का आयोजन भी किया जाएगा।
❓ क्या आम नागरिक इस जलसे में शामिल हो सकते हैं?
उत्तर: जी हां, आयोजकों ने जालना शहर व आसपास के सभी नागरिकों और अकीदतमंदों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर जलसे में शिरकत करें।
❓ इस जलसे में शामिल होने से क्या रूहानी लाभ मिलेगा?
उत्तर: इस जलसे में शिरकत करने से अकीदतमंदों को रूहानी सुकून, इस्लाही पैग़ाम और सूफियाना तालीम के ज़रिए दीन व अख़लाक़ की राह पर चलने की प्रेरणा मिलेगी।
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