मनरेगा अंतर्गत बांस की खेती की मंजूरी प्रक्रिया तेज करने की मांग
जालना: शाश्वत आय और पर्यावरण के अनुकूल फसल के रूप में प्रसिद्ध बांस की खेती के लिए किसानों को मनरेगा योजना के तहत प्रति हेक्टेयर सात लाख रुपये का अनुदान प्रदान किया जा रहा है। इस योजना का लाभ उठाने के लिए जिले के किसानों में उत्साह बढ़ रहा है।
हालांकि, प्रस्ताव की मंजूरी की प्रक्रिया बहुत धीमी है, जिससे किसानों में निराशा है। इसे तेज करने के लिए बांस खेती आंदोलन के जिला समन्वयक डॉ. सुयोग कुलकर्णी ने पालकमंत्री एवं पर्यावरण मंत्री पंकजाताई मुंडे से मुलाकात कर स्पष्ट निर्देश देने का अनुरोध किया।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जालना दौरे पर आईं पंकजाताई मुंडे से डॉ. कुलकर्णी ने विधायक अर्जुन खोतकर के निवास पर भेंट की। इस दौरान उन्होंने बांस से बनी विठ्ठल-रुक्मिणी की मूर्ति और बांस की घड़ी भेंट कर फसल के महत्व को रेखांकित किया। इस मौके पर एडवोकेट भरत मंत्री, योगेश शिंदे, शैलेश बजाज, संजय लोंढे, राजू कोल्हे, अतुल लड्डा और शरद खेडेकर समेत कई किसान प्रतिनिधि मौजूद थे।
डॉ. कुलकर्णी ने बताया कि बांस की खेती न केवल पर्यावरण के लिए लाभकारी है, बल्कि यह किसानों के लिए आर्थिक रूप से भी फायदेमंद है। लेकिन, प्रस्ताव की मंजूरी में औसतन दो महीने का समय लग रहा है, जिससे किसानों की उत्सुकता कम हो रही है और खेती के मौसम पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है।
उन्होंने सरकार से एक माह के भीतर मंजूरी प्रक्रिया पूरी करने और पर्यावरण मंत्री के रूप में संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की।

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