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जालना में लोहे की सरिया उत्पादन में 30 प्रतिशत गिरावट, बारिश और आर्थिक मंदी से निर्माण उद्योग पर असर

जालना में लोहे की सरिया उत्पादन में 30 प्रतिशत गिरावट, बारिश और आर्थिक मंदी से निर्माण उद्योग पर असर

जालना : लगातार हो रही बारिश और निर्माण क्षेत्र में सुस्ती के कारण जालना के स्टील उद्योगों में लोहे की सरिया (TMT बार) उत्पादन में लगभग 30 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। पहले जहाँ जिले में प्रतिदिन करीब 15 हजार टन सरिया का उत्पादन होता था, वहीं अब यह घटकर 10 हजार टन से भी कम रह गया है। उद्योग जगत का अनुमान है कि यह स्थिति जनवरी 2026 तक बनी रह सकती है।

स्थानीय उद्योगपतियों के अनुसार, बाजार में सरिया की मांग में पहले से ही कमी थी, लेकिन लगातार हो रही बारिश के कारण कई बड़े निर्माण कार्य या तो ठप हैं या बहुत कम गति से चल रहे हैं। परिणामस्वरूप, सरिया की मांग में भारी गिरावट आई है और निर्माताओं को उत्पादन घटाना पड़ा है। रियल एस्टेट क्षेत्र के साथ-साथ सरकारी निर्माण परियोजनाओं से भी मांग में गिरावट देखी जा रही है, जिससे उत्पादन पर सीधा प्रभाव पड़ा है।

वैश्विक स्तर पर चल रही आर्थिक मंदी का असर भारत के निर्माण क्षेत्र पर भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है। अमेरिका और चीन जैसे बड़े देशों की औद्योगिक सुस्ती ने भारतीय स्टील बाजार को अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित किया है। इसके अलावा, महाराष्ट्र में कृषि क्षेत्र को हुए नुकसान ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कमजोर किया है। बार-बार होने वाले सूखे और अतिवृष्टि से किसानों की आय प्रभावित हुई है, जिससे बाजार में नकदी का प्रवाह घटा है और रियल एस्टेट में निवेश कम हुआ है।

उद्योग जगत के प्रतिनिधियों का कहना है कि सोना-चांदी के बढ़ते दाम भी सरिया उद्योग की मांग घटने का एक बड़ा कारण हैं। निवेशकों का झुकाव अब संपत्ति खरीदने की बजाय कीमती धातुओं की ओर बढ़ा है। साथ ही, कई सरकारी ठेकेदारों को भुगतान में देरी के कारण लघु और मध्यम स्तर के निर्माण कार्य ठप हैं। लगातार जारी बारिश ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है, जिससे निर्माण स्थलों पर कामकाज रुक गया है और सरिया की खपत घट गई है।

“हाल ही में कुछ वस्तुओं पर जीएसटी दरों में कमी की गई है, जिससे बाजार में सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। आने वाले महीनों में स्थिति धीरे-धीरे सुधरेगी और जनवरी तक उत्पादन सामान्य स्तर पर लौट सकता है।”

— घनश्याम गोयल, अध्यक्ष, स्टील मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन

“इस वर्ष दिवाली के दौरान सरिया के दाम पिछले पांच वर्षों में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए — लगभग ₹42,500 प्रति टन। हालांकि, अगले दो महीनों में बाजार में सुधार और मांग में वृद्धि की संभावना है।”

— नितीन काबरा, उद्योगपति, जालना

महाराष्ट्र का औद्योगिक केंद्र कहलाने वाला जालना वर्तमान में स्टील उद्योग और निर्माण क्षेत्र की मंदी से जूझ रहा है। हालांकि, उद्योग जगत को उम्मीद है कि आगामी महीनों में बाजार की स्थिति सुधरते ही सरिया उद्योग पुनः अपनी रफ्तार पकड़ लेगा।


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