NewsNation Online

FireFly In News

एडवोकेट महेश धन्नावत का दावा, उनकी मांग पर ही प्रशासन ने झोपड़पडपट्टियों का सर्वेक्षण प्रारंभ किया नागरिकों को अब मिलेगा PR कार्ड

जालना (प्रतिनिधि): जालना शहर के झोपड़पट्टी क्षेत्रों के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय सामने आया है। नोटरी एसोसिएशन के कार्याध्यक्ष एडवोकेट महेश धन्नावत की लंबे समय से चली आ रही मांग को आखिरकार प्रशासन ने स्वीकार कर लिया है। अब शहर की झोपड़पट्टी बस्तियों के पात्र नागरिकों को प्रॉपर्टी कार्ड (मालमत्ता पत्रक) उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन ने सर्वेक्षण शुरू करने के आदेश जारी किए हैं।

इस निर्णय से न केवल हजारों झोपड़पट्टीवासियों को अपने घर का कानूनी स्वामित्व मिलेगा, बल्कि जालना नगर परिषद को भी आर्थिक रूप से मजबूती प्राप्त होगी।

🔹 पृष्ठभूमि: नागरिकों के अधिकार और विकास की दृष्टि से रखी गई मांग

जालना नगर परिषद को महानगरपालिका का दर्जा देने की प्रक्रिया शासन के विचाराधीन थी। इस प्रस्ताव पर नागरिकों से सुझाव और आपत्तियाँ मांगी गई थीं। इसी दौरान एड. महेश धन्नावत ने एक लिखित आपत्ति पत्र जिलाधिकारी (नगर परिषद प्रशासन विभाग) को सौंपते हुए कहा था कि—

“महानगरपालिका बनने से पहले झोपड़पट्टियों में रहने वाले नागरिकों को उनके घरों के प्रॉपर्टी कार्ड देकर कानूनी मालिकाना हक देना आवश्यक है। यह केवल नागरिकों के अधिकारों का प्रश्न नहीं, बल्कि शहर के आर्थिक विकास से भी जुड़ा हुआ है।”

🔹 एडवोकेट महेश धन्नावत का दावा

एडवोकेट धन्नावत ने कहा कि,

“मेरे द्वारा उठाई गई इस मांग के परिणामस्वरूप ही प्रशासन ने अब शहर में झोपड़पट्टी धारकों को प्रॉपर्टी कार्ड देने के लिए सर्वेक्षण शुरू किया है। मेरा यह भी मानना है कि यदि जालना महानगरपालिका की झोपड़पट्टियों के नागरिकों को प्रॉपर्टी कार्ड उपलब्ध करा दिया जाता है, तो इससे न केवल नागरिकों को कानूनी सुरक्षा मिलेगी, बल्कि पालिका की आमदनी में भी वृद्धि होगी। जब ये क्षेत्र कानूनी रूप से मान्य होंगे, तो कर संग्रहण बढ़ेगा और शहर का विकास अधिक तेज़ी से हो सकेगा।

उनकी यह पहल प्रशासनिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर विकास और पारदर्शिता का संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

🔹 प्रशासन ने शुरू किया सर्वेक्षण

जिलाधिकारी कार्यालय ने आदेश जारी कर शहर के घोषित और अघोषित झोपड़पट्टी क्षेत्रों का सर्वेक्षण शुरू करने का निर्णय लिया है। इस सर्वेक्षण के अंतर्गत—

  • प्रत्येक घर और भूखंड का मापन व रजिस्ट्रेशन किया जाएगा,
  • रहिवाशियों की जानकारी एकत्र की जाएगी,
  • और पात्र नागरिकों को प्रॉपर्टी कार्ड जारी करने की प्रक्रिया को गति दी जाएगी।

इस निर्णय से न केवल झोपड़पट्टी क्षेत्रों को कानूनी दर्जा मिलेगा, बल्कि शहर के राजस्व और विकास की गति में भी सकारात्मक वृद्धि होगी।

🔹 प्रॉपर्टी कार्ड के प्रमुख लाभ

  • कानूनी स्वामित्व का प्रमाण: नागरिकों को अपने घर का वैध मालिकाना हक मिलेगा।
  • कर्ज सुविधा: बैंक और वित्तीय संस्थान इसे वैध दस्तावेज मानेंगे, जिससे गृहकर्ज लेना आसान होगा।
  • खरीद-बिक्री में पारदर्शिता: संपत्ति संबंधी लेनदेन कानूनी और पारदर्शी होंगे।
  • सरकारी योजनाओं का लाभ: नागरिक विभिन्न आवास और शहरी विकास योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे।
  • नगरपालिका की आय में वृद्धि: कर संग्रहण बढ़ेगा, जिससे विकास कार्यों के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध होंगे।
  • अतिक्रमण पर नियंत्रण: अवैध कब्जों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आसान होगी।

🔹 कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत होगी कार्रवाई

यह प्रक्रिया महाराष्ट्र भूमि महसूल संहिता, 1966 और महाराष्ट्र झोपड़पट्टी (सुधार, निर्मूलन व पुनर्विकास) अधिनियम, 1971 के तहत की जाएगी। इन कानूनों के अनुसार—

  • शहरी क्षेत्रों की जमीनों का सर्वेक्षण व रिकॉर्ड तैयार करना,
  • झोपड़पट्टियों की पहचान कर कानूनी अधिकार प्रदान करना,
  • और उन्हें पुनर्विकास योजनाओं में शामिल करना अनिवार्य है।

इस कानूनी ढांचे के माध्यम से नागरिकों को न केवल उनके हक मिलेंगे, बल्कि शासन के विकास कार्य भी अधिक सुदृढ़ रूप से संचालित होंगे।

🔹 सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से ऐतिहासिक कदम

इस निर्णय से जालना शहर के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को नया आत्मविश्वास मिलेगा। जो नागरिक अब तक “अनधिकृत” कहलाते थे, वे अब कानूनी रूप से अपने घर के स्वामी बनेंगे। यह कदम जालना को सामाजिक समानता और सुव्यवस्थित शहरी विकास की दिशा में अग्रसर करेगा।

NewsNationOnline Team


Discover more from NewsNation Online

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

author avatar
NewsNationOnline Team

Discover more from NewsNation Online

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading