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जालना मनपा में कांग्रेस में बगावत: गुटनेता पर भाजपा से मिलीभगत का आरोप, स्वीकृत सदस्य की सीट हाथ से गई

जालना मनपा में कांग्रेस में बगावत: गुटनेता पर भाजपा से मिलीभगत का आरोप, स्वीकृत सदस्य की सीट भी हाथ से गई

जालना | प्रतिनिधि

जालना महानगरपालिका में स्वीकृत (नामित) नगरसेवकों के चयन को लेकर कांग्रेस पार्टी के भीतर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। पार्टी के ही गुटनेता पर आरोप है कि उन्होंने कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार का समर्थन करने के बजाय भाजपा उम्मीदवार का साथ दिया। इस घटनाक्रम के कारण कांग्रेस को मिलने वाली स्वीकृत सदस्य की सीट भी हाथ से निकल गई और भाजपा को इसका राजनीतिक लाभ मिल गया।

इस मामले के सामने आने के बाद कांग्रेस के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं में भारी नाराज़गी देखी जा रही है। पार्टी के अंदर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है और संगठन के भीतर गुटबाजी खुलकर सामने आ रही है।


क्या है स्वीकृत (नामित) नगरसेवक का प्रावधान

महाराष्ट्र में महानगरपालिकाओं में कुछ नगरसेवकों को “स्वीकृत” या “नामित” सदस्य के रूप में नियुक्त किया जाता है। ये सदस्य आम चुनाव से नहीं बल्कि राजनीतिक दलों के संख्याबल के आधार पर चुने जाते हैं।

इस प्रावधान के अनुसार महानगरपालिका में मौजूद पार्टियों के नगरसेवकों की संख्या के आधार पर उन्हें स्वीकृत सदस्य भेजने का अधिकार मिलता है।

महाराष्ट्र नगर निगम से संबंधित जानकारी महाराष्ट्र सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।
👉 https://urban.maharashtra.gov.in


कांग्रेस गुटनेता पर विश्वासघात का आरोप

जानकारी के अनुसार कांग्रेस ने जिस नगरसेवक फारूक तुंडीवाले पर भरोसा जताते हुए उन्हें महानगरपालिका में गुटनेता बनाया था, अब उन्हीं पर पार्टी के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया जा रहा है।

कांग्रेस के पास महानगरपालिका में 9 नगरसेवक हैं। इस संख्याबल के आधार पर कांग्रेस को एक स्वीकृत सदस्य भेजने का अवसर मिल सकता था।

लेकिन आरोप है कि गुटनेता ने पार्टी द्वारा तय उम्मीदवार का समर्थन करने के बजाय भाजपा उम्मीदवार का समर्थन कर दिया। इसके चलते कांग्रेस की संभावित सीट भी भाजपा के खाते में चली गई।

इस घटनाक्रम के बाद भाजपा ने चुनाव में पराजित हुए अपने एक कार्यकर्ता को स्वीकृत सदस्य बनाने में सफलता हासिल कर ली।


जिलाध्यक्ष ने की कार्रवाई की मांग

कांग्रेस के जिलाध्यक्ष राजाभाऊ देशमुख ने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए गुटनेता के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

उन्होंने महानगरपालिका आयुक्त और जिला प्रशासन को पत्र लिखकर मांग की है कि कांग्रेस के हिस्से की स्वीकृत सदस्य की सीट फिलहाल खाली रखी जाए और मामले की जांच की जाए।

देशमुख ने आरोप लगाया कि

  • कांग्रेस के गुटनेता ने पार्टी के निर्णय की अनदेखी की
  • भाजपा उम्मीदवार को समर्थन देकर पार्टी के साथ विश्वासघात किया

उन्होंने कहा कि जब जिले से कांग्रेस का सांसद चुना गया है, तब भी स्थानीय स्तर पर पार्टी अनुशासन कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है।

कांग्रेस पार्टी की आधिकारिक जानकारी यहां उपलब्ध है:
👉 https://www.inc.in


भाजपा पर तोड़फोड़ की राजनीति का आरोप

इस पूरे घटनाक्रम के बाद जिले की राजनीति में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि सत्ता के लिए भाजपा अभी भी राजनीतिक तोड़फोड़ की रणनीति अपना रही है।

जालना महानगरपालिका में स्वीकृत नगरसेवकों के चयन की प्रक्रिया के दौरान यह विवाद सामने आया।

नामांकन के दौरान कांग्रेस के गुटनेता फारूक तुंडीवाले ने कांग्रेस उम्मीदवार के नामांकन पत्र पर हस्ताक्षर करने के बजाय भाजपा से जुड़े विनोद रत्नपारखे के नामांकन पत्र का समर्थन कर दिया। इससे भाजपा को एक अतिरिक्त सीट मिल गई।


कांग्रेस कार्यकर्ताओं में बढ़ा आक्रोश

इस घटना के बाद कांग्रेस के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं में भारी नाराज़गी देखी जा रही है। कई कार्यकर्ताओं ने गुटनेता के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

जिलाध्यक्ष राजाभाऊ देशमुख ने सार्वजनिक रूप से नाराज़गी जताते हुए कहा:

“हमारा गुटनेता बिक गया। कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर जीतकर आने वाले कुछ लोग बाद में पार्टी के साथ विश्वासघात करते हैं। मतदाताओं ने भाजपा के खिलाफ मतदान किया था, लेकिन हमारे ही गुटनेता ने भाजपा की मदद कर दी।”

उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के नियमों के अनुसार गुटनेता को जिलाध्यक्ष के निर्देशों का पालन करना आवश्यक होता है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया।


गुटनेता का पलटवार

दूसरी ओर गुटनेता फारूक तुंडीवाले ने भी जिलाध्यक्ष के आरोपों का जवाब दिया है।

तुंडीवाले का कहना है कि जिलाध्यक्ष ने स्वीकृत सदस्य के लिए तीन नाम प्रस्तावित किए थे और इस मामले में उन पर राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा था।

उन्होंने दावा किया कि

  • जिलाध्यक्ष के फैसलों से ही पार्टी को नुकसान हो रहा है
  • वे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से जिलाध्यक्ष को पद से हटाने की मांग करेंगे

स्थानीय राजनीति में बढ़ी हलचल

इस पूरे विवाद ने जालना शहर की राजनीति को गरमा दिया है। कांग्रेस के अंदर बढ़ती गुटबाजी और आरोप-प्रत्यारोप के कारण पार्टी की छवि पर असर पड़ने की चर्चा भी शुरू हो गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर कांग्रेस संगठन के अंदर चल रहा यह विवाद जल्द नहीं सुलझा, तो इसका फायदा भाजपा और अन्य दलों को मिल सकता है।


Graphic depicting political infighting in Jalna Municipal Corporation, with accusations of collusion between Congress and BJP. Features Congress and BJP party symbols, a visual representation of conflict, and text highlighting potential seat loss for Congress.
Political infighting in Jalna Municipal Corporation Congress accused of colluding with BJP risking potential seat loss

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