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जालना में शासन की दोहरी नीति पर सवाल — किसानों की जमीन ली जा रही, लेकिन सरकारी रास्ता देने से इनकार

जालना में शासन की दोहरी नीति पर सवाल — किसानों की जमीन ली जा रही, लेकिन सरकारी रास्ता देने से इनकार

जालना में शासन की दोहरी नीति पर सवाल — किसानों की जमीन ली जा रही, लेकिन सरकारी रास्ता देने से इनकार

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🗓️ दिनांक: 31 मई 2025 | 📰 स्थान: जालना | रिपोर्टर: विशेष प्रतिनिधि

जालना शहर में किसानों और अधिवक्ताओं के बीच शासन की दोहरी नीतियों को लेकर गहरी नाराजगी देखी जा रही है। जहां एक ओर सरकार समृद्धि महामार्ग जैसी परियोजनाओं के नाम पर किसानों की भूमि बेहद कम दरों पर अधिग्रहित कर रही है, वहीं दूसरी ओर स्वयं की मिल्कियत से मात्र 100 से 150 मीटर का पक्का रास्ता सरकारी कार्यालय तक बनाने के लिए भी इच्छाशक्ति नहीं दिखा रही है।

विशेष रूप से सहधर्मदाय आयुक्त कार्यालय तक पहुंचने के लिए अब तक कोई पक्का रास्ता नहीं बनाया गया है। वर्षा ऋतु में यह स्थिति और भी विकट हो जाती है, जिससे आम नागरिकों, अधिवक्ताओं और कर्मचारियों को काफी असुविधा झेलनी पड़ती है।

स्थानीय अधिवक्ता ॲड. महेश धन्नावत ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा:

“स्थिति इतनी बदतर हो गई है कि वकीलों को अपने ही कार्यालय जाने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। शासन अगर अपनी ही जमीन से रास्ता नहीं दे सकता, तो वह किसानों से उनकी जमीन कैसे छीन सकता है?”

धन्नावत ने आगे कहा कि शासन की यह नीति केवल किसानों के साथ अन्याय नहीं है, बल्कि संपूर्ण न्यायिक व्यवस्था के प्रति असंवेदनशीलता को दर्शाती है।

नगर परिषद पर भी गंभीर आरोप लगे हैं कि उसने बिल्डर के दबाव में आकर बिना स्थल निरीक्षण किए ही संबंधित इमारत को पूर्णता प्रमाणपत्र और मालमत्ता वापर प्रमाणपत्र दे दिया। वहीं, हर वर्ष लाखों रुपये कर के रूप में वसूलने के बावजूद मूलभूत सुविधा — एक पक्का रास्ता — तक नहीं दिया गया।

स्थानीय नागरिकों और अधिवक्ताओं की मांग है कि शासन इस मुद्दे को गंभीरता से ले और धर्मदाय आयुक्त कार्यालय तक शीघ्र पक्का रास्ता तैयार करवाए, अन्यथा आंदोलन की चेतावनी दी गई है।

मुख्य बिंदु:

  • शासन अपनी ही जमीन से मात्र 150 मीटर रास्ता बनाने में असफल
  • किसानों की ज़मीन कवडीमोल में अधिग्रहित, मगर खुद पीछे हट रही सरकार
  • नगर परिषद की कार्यशैली पर उठे सवाल
  • वकीलों और आम नागरिकों को भारी असुविधा
  • अधिवक्ता धन्नावत ने जताई नाराजगी, आंदोलन की चेतावनी

📢 निष्कर्ष:
जब सरकार अपनी ही जमीन से एक छोटा रास्ता नहीं बना सकती, तो फिर किसानों की ज़मीन लेने का नैतिक अधिकार किस आधार पर रखती है?

🔖 संबंधित हैशटैग: #JalnaNews #KisanAdhikar #ShasanVirodh #AdvocateDemand #NagarpalikaControversy #धर्मदायकार्यालय #InfrastructureNeglect


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Imran Siddiqui

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