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451 व्यंजनों का भोग: इस्कॉन जन्माष्टमी उत्सव की विशेषताएँ

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इस्कॉन मंदिर में उत्साहपूर्वक मनाया गया श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्सव

451 व्यंजनों का भोग, 80 लीटर पंचामृत से अभिषेक, भक्तिमय माहौल में हजारों की उपस्थिति

जालना: अंतरराष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ (इस्कॉन) द्वारा पूरे विश्व में आयोजित श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्सव गंगाधरवाडी स्थित इस्कॉन मंदिर में 16 और 17 अगस्त को धूमधाम से मनाया गया। उत्सव में हजारों भक्तों ने भाग लिया और 80 लीटर पंचामृत से भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक कर जन्मोत्सव का स्वागत किया। दो दिनों तक “हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्णा कृष्ण हरे हरे… हरे राम हरे राम, राम हरे हरे…” के उद्घोष से मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में बदल गया।

उत्सव की शुरुआत और आयोजन

 

उत्सव की शुरुआत नगर संकीर्तन, नाटिका, भागवत कथा और प्रवचन से हुई। 451 व्यंजनों का भोग अर्पित कर महाआरती संपन्न की गई। राधिका वल्लभ प्रभु ने प्रवचन में परीक्षित महाराज और सुखदेव स्वामी के संवाद के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया और सभी के जीवन में शांति, सुख और समृद्धि की कामना की। इस्कॉन मंदिर प्रमुख रास गोविंद प्रभु ने इस्कॉन युवक कल्याण एवं विकास केंद्र द्वारा आयोजित गतिविधियों की जानकारी दी। भक्तों ने भजन, कीर्तन और भक्ति गीतों में ठेका जमाया तथा महाप्रसाद का वितरण किया। भारी वर्षा के बावजूद हजारों भक्तों ने उत्सव में उत्साहपूर्वक भाग लिया।

विशेष मूर्तियों और पंचामृत अभिषेक का आयोजन

भगवान कृष्ण, बलराम और सुभद्रा की मूर्तियों को विशेष सजावट के साथ सजाया गया। शनिवार की शाम से पंचामृत अभिषेक का आरंभ हुआ। इस अवसर पर पूर्व विधायक कैलाश गोरंट्याल, पूर्व नगराध्यक्ष संगीताताई गोरंट्याल, मनपा आयुक्त संतोष खांडेकर, रास गोविंद प्रभु, इस्कॉन युवक कल्याण एवं विकास केंद्र के अध्यक्ष घनश्यामदास गोयल, सचिव कमलबाबू झुनझुनवाला, जयभगवान जिंदल, छाया अग्रवाल, संजय राठी, महोत्सव समिति के अध्यक्ष डॉ. विवेक केंद्रे, सचिव विनोद कुमावत, उपाध्यक्ष मीरा अग्रवाल, कन्हैया खेरुडकर, कोषाध्यक्ष गोविंद दत्त प्रभू, सल्लाहकार रितेश अग्रवाल, डॉ. संदेश कदम और डॉ. राजेंद्र अंभोरे सहित हजारों भक्तों ने अभिषेक में भाग लिया। रात 12 बजे भक्तिमय माहौल में महाआरती संपन्न हुई।

नंदोत्सव से उत्सव का समापन

रविवार को नंदोत्सव का आयोजन हुआ। यह दिन इस्कॉन द्वारा प्रभूपाद आविर्भाव (जयंती) के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर कीर्तन, प्रभूपाद अभिषेक और पुष्पांजलि अर्पित की गई।

 

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