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जालना में सरकारी ज़मीन घोटाला: फर्जी सर्वे नंबरों से करोड़ों की हेराफेरी, हाईकोर्ट जाने की चेतावनी

Government land scam in Jalna: Crores of rupees embezzled through fake survey numbers, warning of going to High Court

प्रशासन की निष्क्रियता पर उठे सवाल, भ्रष्ट अधिकारियों की संलिप्तता का आरोप

जालना, महाराष्ट्र: जालना जिले में सरकारी ज़मीन घोटाले का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें भूमाफियाओं ने फर्जी सर्वे नंबर तैयार कर करोड़ों रुपये की सरकारी ज़मीन हड़प ली। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, शहर में अधिकतम सर्वे नंबर 557 तक ही अधिकृत हैं, लेकिन 558, 559 और 560 जैसे अवैध सर्वे नंबर बना लिए गए। इस मुद्दे पर हाईकोर्ट और मंत्रालय के आदेश होने के बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।

भाजपा जिला उपाध्यक्ष वीरेंद्र धोखा ने इस मामले में चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो वे हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर करेंगे।

भूमाफियाओं और अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों का घोटाला

वीरेंद्र धोखा ने प्रेस वार्ता में खुलासा किया कि इस ज़मीन घोटाले में भूमाफियाओं, स्थानीय प्रभावशाली लोगों और भ्रष्ट राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत सामने आई है। 50 एकड़ से अधिक सरकारी ज़मीन पर अवैध कब्जा किया गया है, जिससे करोड़ों का राजस्व नुकसान हुआ है।

धोखा ने प्रशासन से सवाल किया कि जब आधिकारिक रूप से जालना में सर्वे नंबर 557 तक ही मौजूद हैं, तो 558, 559 और 560 नंबर कैसे तैयार किए गए? उन्होंने कहा कि भूमि अभिलेख विभाग और महसूल विभाग के अधिकारियों ने मिलीभगत कर फर्जी सर्वे नंबर जारी किए। अवैध तरीके से ज़मीन को नोटरी के आधार पर वैध दिखाने का प्रयास किया गया, और इन भूखंडों पर महंगे बंगले और इमारतें भी बना दी गई हैं।

फाटक कमीशन की रिपोर्ट लागू करने की मांग

वीरेंद्र धोखा ने प्रशासन से फाटक कमीशन की रिपोर्ट को तत्काल लागू करने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि अगर निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो यह मामला कल्याण की तरह एक बड़े ज़मीन घोटाले का रूप ले सकता है, जिससे हजारों परिवार प्रभावित हो सकते हैं।

प्रशासन के खिलाफ मांगें

1. दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।


2. अवैध रूप से बेची गई ज़मीन पर 10 गुना जुर्माना वसूला जाए।


3. जिन लोगों ने इन ज़मीनों पर घर बनाए हैं, उन्हें सुरक्षित किया जाए।






1996 से घोटाले का पर्दाफाश कर रहे वीरेंद्र धोखा

वीरेंद्र धोखा ने बताया कि वे 1996 से जालना के ज़मीन घोटालों का खुलासा कर रहे हैं। उनकी मांग पर ही फाटक कमीशन का गठन हुआ था, जिसने इस घोटाले की पुष्टि करते हुए कार्रवाई की सिफारिश की थी। हालांकि, आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

वीरेंद्र धोखा

राजनीतिक हस्तक्षेप और निष्क्रिय प्रशासन

वीरेंद्र धोखा ने आरोप लगाया कि तत्कालीन पालक मंत्री बबनराव लोनीकर, अतुल सावे और महसूल मंत्री ने जिला प्रशासन को इस मामले में कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे, लेकिन प्रशासन ने अब तक कोई कदम नहीं उठाया।

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि 15 दिनों के भीतर दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर करेंगे।

अब क्या होगा?

अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस गंभीर घोटाले पर कोई ठोस कार्रवाई करता है या यह मामला हाईकोर्ट तक जाएगा।

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Imran Siddiqui

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