प्राकृतिक आपदा अनुदान घोटाला: ₹1.35 करोड़ की हेराफेरी करने वाला तलाठी गिरफ्तार, 6 दिन की पुलिस हिरासत
- प्राकृतिक आपदा अनुदान घोटाला का पर्दाफाश: जालना के अंबड और घनसावंगी क्षेत्रों में किसानों के लिए घोषित सहायता राशि में ₹1.35 करोड़ की हेराफेरी का खुलासा हुआ है, जिसमें मुख्य आरोपी तलाठी पवनसिंह सुलाने गिरफ्तार किया गया है।
- घोटाले का कैसे हुआ खुलासा: प्राकृतिक आपदा के चलते किसानों को मिली सहायता में फर्जी नामों के जरिए राशि का दुरुपयोग किया गया, जिनके आधार पर सरकारी अनुदान वापस लिया गया।
- उच्चस्तरीय जांच का बड़ा खुलासा: सत्यापन जांच में पाया गया कि जिले के 240 गांवों में लगभग ₹24.91 करोड़ की राशि का गबन किया गया है, जिसके बाद मामला दर्ज किया गया है।
- मुख्य आरोपी की फरार स्थिति: चार महीनों से फरार चल रहे पवनसिंह सुलाने को तकनीकी विश्लेषण से ट्रेस कर गिरफ्तार किया गया है, वह राजस्थान सहित अन्य राज्यों में छिपा हुआ था।
- आगामी कार्रवाई और गिरफ्तारी की दिशा में प्रयास: अब तक 12 आरोपियों को हिरासत में लिया जा चुका है, और फरार आरोपियों की खोजबीन जारी है, जिससे आगे और गिरफ्तारी संभव है।
जालना | प्रतिनिधि:
जालना जिले के अंबड और घनसावंगी क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदा के बाद किसानों को दी जाने वाली सरकारी सहायता राशि में हुए बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। इस मामले में ₹1 करोड़ 35 लाख रुपये की हेराफेरी के मुख्य आरोपी तलाठी पवनसिंह सुलाने को आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने गिरफ्तार किया है। आरोपी को न्यायालय में पेश किए जाने के बाद अदालत ने उसे 6 दिनों की पुलिस हिरासत (पीसीआर) में भेजने के आदेश दिए हैं। प्राकृतिक आपदा अनुदान घोटाला.
कैसे सामने आया घोटाला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अंबड और घनसावंगी क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदा के कारण किसानों की फसलों को भारी नुकसान हुआ था। इसके बाद राज्य सरकार ने समय-समय पर शासनादेश जारी कर प्रभावित किसानों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। लेकिन अनुदान वितरण की प्रक्रिया के दौरान संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा बड़ी संख्या में ऐसे फर्जी नाम सूची में शामिल कर दिए गए, जिनका वास्तविक खेती या किसानों से कोई संबंध नहीं था।
इन फर्जी लाभार्थियों के नाम पर प्राप्त सरकारी अनुदान की राशि बाद में उनसे वापस ले ली गई। इस पूरे मामले को लेकर प्रशासन को कई शिकायतें प्राप्त हुईं, जिसके बाद प्रकरण की गंभीरता सामने आई।
जांच समिति की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
शिकायतों के आधार पर तत्कालीन जिलाधिकारी ने सत्यापन के लिए एक विशेष जांच समिति का गठन किया। जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि जिले के कुल 240 गांवों में लगभग ₹24 करोड़ 90 लाख 77 हजार 811 रुपये की सरकारी राशि का गबन किया गया है।
जांच रिपोर्ट के आधार पर अंबड पुलिस थाने में अपराध क्रमांक 453/2025 के तहत भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया।
चार महीने से फरार था मुख्य आरोपी
इस मामले की जांच जालना पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर आर्थिक अपराध शाखा द्वारा की जा रही है। अब तक इस घोटाले में 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका था। मुख्य आरोपी तलाठी पवनसिंह सुलाने पिछले चार महीनों से राजस्थान सहित अन्य राज्यों में छिपकर रह रहा था।
पुलिस से बचने के लिए आरोपी लगातार अपने मोबाइल नंबर और ठिकाने बदल रहा था। पहचान छिपाने के उद्देश्य से वह वेशभूषा बदलकर भी घूमता रहा और अग्रिम जमानत प्राप्त करने के लिए कई प्रयास करता रहा।
तकनीकी विश्लेषण से गिरफ्तारी
आर्थिक अपराध शाखा की टीम ने तकनीकी विश्लेषण के आधार पर आरोपी की लोकेशन ट्रेस की और उसे छत्रपति संभाजीनगर से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की उम्र 36 वर्ष बताई गई है। वह मूल रूप से शेवगा, जिला छत्रपति संभाजीनगर का निवासी है और वर्तमान में अंबड क्षेत्र के धाईत नगर में रह रहा था।
अब तक 12 आरोपी गिरफ्तार, तलाश जारी
इस गिरफ्तारी के साथ ही इस घोटाले में अब तक कुल 12 आरोपियों को हिरासत में लिया जा चुका है। पुलिस के अनुसार, मामले से जुड़े अन्य फरार आरोपियों और उनके एजेंटों की तलाश लगातार जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
पुलिस टीम की भूमिका
यह पूरी कार्रवाई जालना पुलिस अधीक्षक अजयकुमार बंसल, अपर पुलिस अधीक्षक आयुष नोपाणी और आर्थिक अपराध शाखा के प्रभारी उपअधीक्षक सिद्धार्थ माने के मार्गदर्शन में की गई। इस अभियान को सफल बनाने में आर्थिक अपराध शाखा के पुलिस निरीक्षक मिथुन घुगे सहित पुलिसकर्मियों और महिला कर्मचारियों की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यह मामला न केवल सरकारी तंत्र में हुई गंभीर अनियमितताओं को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि प्राकृतिक आपदा जैसी संवेदनशील परिस्थितियों में किसानों के हक पर डाका डालने वालों के खिलाफ प्रशासन अब सख्त कार्रवाई कर रहा है।

प्राकृतिक आपदा अनुदान घोटाला क्या है?
प्राकृतिक आपदा अनुदान घोटाला एक धोखाधड़ी का मामला है जिसमें जालना जिले के अंबड और घनसावंगी क्षेत्रों में किसानों को दी जाने वाली सहायता राशि में ₹1.35 करोड़ की हेराफेरी की गई है।
इस घोटाले का खुलासा कैसे हुआ?
घोटाले का खुलासा सरकारी अनुदान वितरण के दौरान हुई शिकायतों और विशेष जांच समिति की रिपोर्ट से हुआ, जिसमें पाया गया कि फर्जी नामों के माध्यम से सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया।
मुख्य आरोपी को कैसे गिरफ्तार किया गया?
मुख्य आरोपी पवनसिंह सुलाने को तकनीकी विश्लेषण के आधार पर ट्रेस कर छत्रपति संभाजीनगर से गिरफ्तार किया गया, वह कई महीनों से फरार था और राजस्थान में छिपा हुआ था।
इस घोटाले में कितने आरोपियों को अब तक गिरफ्तार किया गया है?
अब तक कुल 12 आरोपियों को हिरासत में लिया जा चुका है, और फरार आरोपियों की खोज जारी है।
इस मामले की जांच कौन कर रहा है?
यह मामला जालना पुलिस अधीक्षक अजयकुमार बंसल, अपर पुलिस अधीक्षक आयुष नोपाणी और आर्थिक अपराध शाखा के प्रभारी उपअधीक्षक सिद्धार्थ माने के मार्गदर्शन में जांच की जा रही है।
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