उमरैन और सुबहान ने रखा ज़िंदगी का पहला रोज़ा, रमज़ान में बच्चों के जज़्बे ने जीता दिल
जालना: रमज़ान के पाक महीने में सब्र और इबादत का खूबसूरत उदाहरण सामने आया है। बुऱ्हाणनगर, जालना के दो नन्हे बच्चों ने अपनी ज़िंदगी का पहला रोज़ा रखकर न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि पूरे मोहल्ले का दिल जीत लिया।
उमरैन जमील परसुवाले (11 वर्ष) और अफ्फान सुबहान परसुवाले (10 वर्ष) ने पूरे उत्साह और खुशी के साथ पहला रोज़ा पूरा किया। बच्चों ने दिनभर संयम और सब्र के साथ रोज़ा रखा, नमाज़ और दुआ में समय बिताया और रमज़ान की रूहानी फिज़ा को पूरी तरह महसूस किया।
परिवार में खुशी का माहौल
परिवारजनों के अनुसार, दोनों बच्चों ने बिना किसी शिकायत के रोज़े की पाबंदियों का पालन किया। उनके इस जज़्बे को देखकर घर में खुशी और फख़्र का माहौल रहा। माता-पिता ने बताया कि बच्चों में रोज़ा रखने को लेकर काफी उत्सुकता थी और उन्होंने इसे इबादत का अहम हिस्सा समझकर पूरे दिल से निभाया।
मोहल्ले वालों ने दी दुआएं
नन्हे रोज़ेदारों के इस कदम की मोहल्ले के लोगों ने भी खुलकर सराहना की। पड़ोसियों और रिश्तेदारों ने बच्चों को मुबारकबाद दी और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए दुआएं कीं।
दुआ और नेक संदेश
इस मौके पर दुआ की गई कि अल्लाह तआला उमरैन और सुबहान के रोज़े क़बूल फरमाए, उन्हें अच्छी सेहत, लंबी उम्र और नेक रास्ते पर चलने की तौफीक़ अता करे। साथ ही, उनके माता-पिता के लिए भी इसे सवाब का ज़रिया बनाए।
रमज़ान के महीने में बच्चों का ऐसा जज़्बा समाज के लिए एक सकारात्मक और प्रेरणादायक संदेश है। यह दिखाता है कि छोटी उम्र से ही धार्मिक मूल्यों, सब्र और अनुशासन की सीख आने वाली पीढ़ी को बेहतर इंसान बनने की राह दिखाती है।


जालना में बच्चों का पहला रोज़ा
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