कुरेशी समाज की दहाड़ मुंबई से दिल्ली तक: फेडरेशन का संघर्ष बना सरकार की अग्नि परीक्षा!
मुंबई: फेडरेशन ऑफ महाराष्ट्र मुस्लिमस ने अन्याय, हिंसा और प्रशासनिक चुप्पी के खिलाफ एक ऐसा जोरदार ऐलान किया, जिसने सत्ता के गलियारों में हलचल मचा दी। अवैध गोरक्षक गुटों की गुंडागर्दी, पशुव्यापारियों पर हो रहे अत्याचार और कुरेशी समाज को निशाना बनाए जाने की घटनाओं के बीच फेडरेशन ने उनकी आवाज को पूरे दमखम से उठाया। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में गूंजती यह आवाज केवल विरोध नहीं थी — यह एक इंकलाबी पैगाम था कि अब चुप रहना मुमकिन नहीं, और न्याय के बिना कोई भी समझौता नामंजूर होगा।
राज्य में पिछले एक महीने से शांतिपूर्ण ढंग से चल रहे कुरेशी समाज के आंदोलन को लेकर फेडरेशन ऑफ महाराष्ट्र मुस्लिमस ने मुंबई स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में एक महत्वपूर्ण पत्रकार वार्ता का आयोजन किया। इस मौके पर समाज पर हो रहे अन्याय, बेकायदा गोरक्षक गुटों द्वारा की जा रही हिंसा, और उनके कारण किसानों व समाज पर पड़ रहे आर्थिक दुष्परिणामों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया।
पत्रकार वार्ता में फेडरेशन ने तीन प्रमुख मांगें रखीं —
- अवैध गोरक्षक गुटों पर त्वरित प्रतिबंध और कानूनी कार्रवाई
- पशुव्यापारियों को सरकारी सुरक्षा
- बंद के कारण प्रभावित किसानों को आर्थिक मुआवजा
इन मांगों को लेकर फेडरेशन के प्रतिनिधिमंडल ने उपमुख्यमंत्री अजित पवार से भेंट की। उपमुख्यमंत्री ने न केवल सभी विषयों को गंभीरता से सुना, बल्कि त्वरित कार्रवाई के तहत पुलिस महानिदेशक रश्मी शुक्ला के साथ एक संयुक्त विशेष बैठक आयोजित की।
मंत्रालय में हुई इस बैठक में डीजीपी रश्मी शुक्ला, अजित पवार और कुरेशी समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि राज्य पुलिस प्रशासन जल्द ही एक आधिकारिक परिपत्र जारी करेगा, जिससे गैरकानूनी गोरक्षक समूहों की गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा। साथ ही पशु परिवहन से संबंधित अड़चनों को दूर करने हेतु उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से सीधी बैठक तय की है।
फेडरेशन ने इन सकारात्मक कदमों का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि सरकार जल्द ही अपने आश्वासनों को अमल में लाएगी और कुरेशी समाज को न्याय मिलेगा।
प्रमुख उपस्थित लोग
पत्रकार परिषद में मौलाना महमूद दरियाबादी (महासचिव, ऑल इंडिया उलमा काउंसिल), मौलाना जहिर अब्बास रिजवी (उपाध्यक्ष, शिया पर्सनल लॉ बोर्ड), एड. अब्दुल मजीद कुरेशी (सचिव, जमीयत अल-कुरैश), मुहम्मद जावेद कुरेशी, मुनव्वर अहमद, फरीद शेख, मौलाना अनिस अशरफी, हाफिज इक्बाल चूनावाला, शाकीर शेख, हमायूं शेख, अब्दुल हफीज, आसिफ कुरेशी, सिराज कुरेशी, फैयाज कुरेशी और आरिफ चौधरी जैसे समाज के प्रमुख प्रतिनिधि उपस्थित थे।
साथ ही राज्य मंत्री हसन मुश्रीफ, विधायक सना मलिक, पूर्व मंत्री नवाब मलिक और नजीब मुल्ला सहित प्रशासन से डीजीपी रश्मी शुक्ला और पुलिस आयुक्त देवेंद्र भारती भी मौजूद थे।
निष्कर्ष
फेडरेशन का यह प्रयास कुरेशी समाज की समस्याओं को राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर गंभीरता से रखने की दिशा में एक ठोस पहल है। यह न केवल सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि कानून और व्यवस्था की बहाली की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।


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