कांग्रेस खत्म होने वाली नहीं… सुभाष चंद्र बोस ने 1938 में ही दे दी थी भविष्यवाणी!
Congress Party & AICC Convention 2025: जब भी कांग्रेस पार्टी के भविष्य पर सवाल उठते हैं, इतिहास में झांकना जरूरी हो जाता है। गुजरात में होने वाले कांग्रेस के अधिवेशन से पहले पार्टी के पुनर्जागरण की चर्चा फिर से तेज हो गई है।
क्या कांग्रेस खत्म हो जाएगी? नेताजी ने 1938 में ही दे दिया था जवाब
“मैं जानता हूं कि कुछ लोग सोचते हैं कि स्वतंत्रता के बाद कांग्रेस को समाप्त हो जाना चाहिए… यह धारणा पूरी तरह गलत है। कांग्रेस के खत्म होने का सवाल ही नहीं उठता, यह बहस ही बेमानी है।”
— सुभाष चंद्र बोस, हरिपुरा अधिवेशन 1938
बोस का स्पष्ट मानना था कि स्वतंत्रता के बाद भी कांग्रेस को भारत के पुनर्निर्माण की पूरी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। उनका यह दृष्टिकोण आज के समय में और भी प्रासंगिक हो गया है।
गुजरात और कांग्रेस: एक ऐतिहासिक रिश्ता
- 1902, अहमदाबाद: सुरेन्द्रनाथ बनर्जी की अध्यक्षता में पहला अधिवेशन।
- 1907, सूरत: रासबिहारी घोष की अध्यक्षता, कांग्रेस में पहला विभाजन।
- 1921, अहमदाबाद: हकीम अजमल खान की अध्यक्षता – “युवा भारत की अंगड़ाई।”
- 1938, हरिपुरा: नेताजी सुभाष चंद्र बोस का ऐतिहासिक अधिवेशन।
- 1961, भावनगर: नीलम संजीव रेड्डी – भविष्य के राष्ट्रपति द्वारा अध्यक्षता।
आज की चुनौतियाँ और नए संकेत

पूर्व कानून मंत्री अश्विनी कुमार का कहना है कि:
“कांग्रेस को खत्म नहीं माना जा सकता। उसे अपनी गलतियों से सीखकर जनता से फिर से जुड़ना चाहिए और वैचारिक रूप से टिकाऊ गठबंधन बनाने चाहिए।”
कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने कहा कि पार्टी में पीढ़ीगत परिवर्तन हो रहा है और युवा नेता जिम्मेदारियों को बखूबी निभा रहे हैं।
कांग्रेस का भविष्य अधिवेशनों से नहीं, विचारों और संघर्षों से जुड़ा है। नेताजी की सोच आज भी उतनी ही सटीक है — “कांग्रेस को खत्म मान लेना नासमझी होगी।”
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