गरीब मरीजों की उम्मीदें अधर में, जालना अस्पताल की एमआरआई मशीन एक साल से बंद; मराठा महासंघ का आक्रोश
जालना: जिला सामान्य अस्पताल में एक साल पहले लाई गई आधुनिक एमआरआई मशीन आज भी धूल खा रही है। लाखों रुपये खर्च कर खरीदी गई यह मशीन गरीब मरीजों की बड़ी उम्मीद थी, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता और कथित राजनीतिक टालमटोल के कारण अब तक शुरू नहीं की गई।
नतीजा यह है कि गरीबों को मजबूरी में निजी अस्पतालों में 6 से 8 हजार रुपये खर्च कर जांच करवानी पड़ रही है। जिन परिवारों के लिए दो वक्त की रोटी जुटाना मुश्किल है, उनके लिए यह बोझ असहनीय है।
मामले की मुख्य बातें
- जिला सामान्य अस्पताल की एमआरआई मशीन एक वर्ष से निष्क्रिय।
- गरीब मरीजों को निजी अस्पतालों में महंगी जांच करानी पड़ रही है।
- प्रशासन पर लापरवाही और राजनीतिक देरी के आरोप।
- मराठा महासंघ ने आंदोलन की चेतावनी दी।
“यह मशीन गरीबों की जिंदगी बचाने के लिए लाई गई थी, लेकिन एक साल से उसे सिर्फ राजनीति की भेंट चढ़ा दिया गया है। आखिर आम मरीज कब तक निजी अस्पतालों के चक्कर लगाते रहेंगे?”
— अरविंद देशमुख, जिलाध्यक्ष, मराठा महासंघ
राजनीतिक अड़चनें और आरोप
महासंघ के पदाधिकारियों का कहना है कि मशीन शुरू न होने के पीछे ‘राजनीतिक मुहूर्त तलाश’ और निजी अस्पतालों का दबाव है। बताया जाता है कि मशीन का उद्घाटन उपमुख्यमंत्री अजित पवार से कराने की योजना थी, जिस कारण कार्यान्वयन को जानबूझकर रोका गया। संगठन ने इसे मात्र प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि गरीब मरीजों के साथ अन्याय बताया है।
मरीजों की बढ़ती परेशानी
गांव-गांव से आने वाले मरीजों की निगाहें इस मशीन पर टिकी थीं। एक साल बाद भी मशीन चालू न होने से निराशा और आक्रोश स्वाभाविक है। निजी जांचों का खर्च वहन न कर पाने वाले कई मरीज उपचार टालने या अधूरा छोड़ने पर मजबूर हैं।
जेब पर पड़ रहा सीधा असर
- निजी अस्पतालों में एमआरआई का औसत खर्च: ₹6,000–₹8,000
- आम मरीजों के लिए अतिरिक्त यात्रा व दवा खर्च का बोझ
- समय पर जांच न होने से उपचार में देरी
मराठा महासंघ का अल्टीमेटम
मराठा महासंघ के जिलाध्यक्ष अरविंद देशमुख ने चेतावनी दी है कि अगर मशीन तुरंत कार्यान्वित नहीं की गई तो संगठन सड़क पर उतरकर आंदोलन करेगा।
“गरीब मरीजों के जीवन से किया जा रहा यह खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा। मशीन को तत्काल शुरू किया जाए।”
— मराठा महासंघ
अब सवाल प्रशासन से
क्या प्रशासन मरीजों की जान से बढ़कर राजनीति को प्राथमिकता देगा? एक ओर सार्वजनिक धन से खरीदी गई मशीन बंद पड़ी है, दूसरी ओर गरीब मरीज महंगी जांच के बोझ तले दबे हैं। जल्द निर्णय न लेने पर यह मामला बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है।
आवश्यक कदम (सुझाव)
- एमआरआई मशीन का तत्काल टेक्निकल ऑडिट और कमी दूर करना।
- ऑपरेटर/टेक्नीशियन की शीघ्र नियुक्ति एवं प्रशिक्षण।
- जांच शुल्क की पारदर्शी सूची जारी कर गरीबों के लिए रियायत।
- समयबद्ध कार्यान्वयन की सार्वजनिक घोषणा।
नागरिक क्या करें
- अस्पताल प्रशासन से लिखित जानकारी (RTI/प्रतिनिधि आवेदन) लें।
- जनप्रतिनिधियों से समय-सीमा तय करवाने की मांग करें।
- जरूरतमंद मरीजों के लिए सरकारी योजनाओं की जानकारी लें।

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