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आंखें नम कर देने वाला पल: जालना में हाफिज़-ए-क़ुरआन विद्यार्थियों का ऐतिहासिक सम्मान

आंखें नम कर देने वाला पल: दारुल उलूम रजविया लतीफिया मिसबाहुल उलूम में हाफिज़-ए-क़ुरआन विद्यार्थियों का ऐतिहासिक सम्मान

जालना: जालना शहर के खरपुडी रोड स्थित मदरसा दारुल उलूम रजविया लतीफिया मिसबाहुल उलूम मंगलवार को उस समय भावनाओं से सराबोर हो उठा, जब हाफिज़-ए-क़ुरआन का मुक़द्दस सफ़र पूरा करने वाले विद्यार्थियों के सम्मान में एक रूह को छू लेने वाला समारोह आयोजित किया गया। आला हजरत एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसाइटी के तत्वावधान में हुए इस कार्यक्रम में हर आंख में खुशी के आंसू और हर चेहरे पर फख़्र साफ़ झलक रहा था।

सालों की मेहनत, तन्हा रातों की इबादत, सब्र, अनुशासन और क़ुरआन से बेपनाह मोहब्बत का फल उस समय सामने आया, जब आजाद शमीम खान, सुफियान नुरुलहुदा, हसनैन अंजार शेख, शाहनवाज़ सोहेल शेख, अलीहसन जहांगीर आलम और अली हसन जुमराती शेख को हाफिज़-ए-क़ुरआन के मुक़ाम पर फाइज़ होने का गौरव प्राप्त हुआ।

समारोह में विद्यार्थियों को शाल ओढ़ाकर, प्रमाणपत्र प्रदान कर और दुआओं के साथ सम्मानित किया गया। इस दौरान उलेमा, अभिभावकों और समाज के लोगों के चेहरों पर गर्व और खुशी साफ़ दिखाई दे रही थी। यह खुशी केवल सम्मान की नहीं, बल्कि उस संघर्ष और कुर्बानी की गवाही थी, जो इन मासूम चेहरों ने अल्लाह के कलाम को अपने सीने में महफूज़ करने के लिए दी।

हाफिज़-ए-क़ुरआन की अज़मत पर प्रभावशाली संदेश

मदरसे के मोहतमीम एवं नाज़िम मौलाना गुलाम जिलानी मिस्बाही ने हाफिज़-ए-क़ुरआन की अज़मत बयान करते हुए कहा कि क़ुरआन को हिफ़्ज़ करना अल्लाह की वह महान नेअमत है, जो बहुत कम लोगों को नसीब होती है। हाफिज़ सिर्फ एक विद्यार्थी नहीं होता, बल्कि वह पूरे समाज के लिए रहमत, रोशनी और हिदायत का चिराग होता है।

उन्होंने कहा कि इस मुक़ाम तक पहुंचने के लिए वर्षों की मेहनत, कठोर अनुशासन, सब्र, तन्हाई और अल्लाह पर मुकम्मल भरोसा आवश्यक होता है। आज ये बच्चे नहीं, बल्कि क़ुरआन के अमीन बनकर हमारे सामने खड़े हैं। मौलाना मिस्बाही ने उस्तादों और अभिभावकों की दुआओं और कुर्बानियों को इस सफलता का आधार बताया।

उस्तादों की वर्षों की मेहनत रंग लाई

इस मुक़द्दस उपलब्धि के पीछे मदरसे के उस्तादों की अथक मेहनत भी शामिल है। हाफिज़ मोहम्मद रिज़वान कादरी, मौलाना जियाउर रहमान, हाफिज़ क़ारी फ़ैयाज़ अहमद, हाफिज़ तसव्वुर आलम और हाफिज़ क़ारी मुबारक हुसैन ने विद्यार्थियों को सब्र, मोहब्बत और अनुशासन के साथ हिफ़्ज़-ए-क़ुरआन की तालीम दी। आज उन्हीं की कोशिशों का परिणाम इस ऐतिहासिक समारोह के रूप में सामने आया।

समाज के गणमान्य नागरिक रहे उपस्थित

इस अवसर पर मोहम्मद इब्राहिम, हाजी अब्दुल वहाब, नासिर बागबान, अनीस बागवान, हाजी असलम नाथानी, अशफाक पटेल कुरैशी, ताबिश बागबान, ताहिर तंबोली, सैयद नदीम, अबुज़र मेमन सहित बड़ी संख्या में समाज के गणमान्य नागरिक, अभिभावक और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का समापन सामूहिक दुआ के साथ हुआ, जिसमें देश में अमन, समाज की तरक्की और उम्मत की भलाई की दुआ की गई। यह समारोह केवल सम्मान का नहीं, बल्कि क़ुरआन से जुड़ी एक ऐसी अविस्मरणीय याद बन गया, जो लंबे समय तक दिलों में जिंदा रहेगी।

  • अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
  • प्रश्न 1: हाफिज़-ए-क़ुरआन किसे कहा जाता है?
  • उत्तर: जो विद्यार्थी पूरे पवित्र क़ुरआन को शब्दशः याद कर लेते हैं, उन्हें हाफिज़-ए-क़ुरआन कहा जाता है। यह इस्लामी शिक्षा में एक अत्यंत प्रतिष्ठित मुक़ाम माना जाता है।
  • प्रश्न 2: यह सम्मान समारोह कहाँ आयोजित किया गया?
  • उत्तर: यह समारोह जालना शहर के खरपुडी रोड स्थित मदरसा दारुल उलूम रजविया लतीफिया मिसबाहुल उलूम में आयोजित किया गया।
  • प्रश्न 3: इस कार्यक्रम का आयोजन किस संस्था ने किया था?
  • उत्तर: हाफिज़-ए-क़ुरआन विद्यार्थियों के सम्मान का यह कार्यक्रम आला हजरत एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसाइटी के तत्वावधान में आयोजित किया गया।
  • प्रश्न 4: किन विद्यार्थियों को हाफिज़-ए-क़ुरआन के रूप में सम्मानित किया गया?
  • उत्तर: आजाद शमीम खान, सुफियान नुरुलहुदा, हसनैन अंजार शेख, शाहनवाज़ सोहेल शेख, अलीहसन जहांगीर आलम और अली हसन जुमराती शेख को सम्मानित किया गया।
  • प्रश्न 5: हिफ़्ज़-ए-क़ुरआन पूरा करने में कितना समय लगता है?
  • उत्तर: यह विद्यार्थी की क्षमता और मेहनत पर निर्भर करता है, लेकिन सामान्यतः 3 से 5 वर्षों का समय लग सकता है।
  • प्रश्न 6: इस समारोह का मुख्य उद्देश्य क्या था?
  • उत्तर: समारोह का उद्देश्य क़ुरआन को हिफ़्ज़ करने वाले विद्यार्थियों का सम्मान करना, उस्तादों की मेहनत को सराहना और समाज में इस्लामी शिक्षा के महत्व को उजागर करना था।
  • प्रश्न 7: कार्यक्रम का समापन कैसे हुआ?
  • उत्तर: कार्यक्रम का समापन सामूहिक दुआ के साथ हुआ, जिसमें देश में अमन, समाज की तरक्की और उम्मत की भलाई के लिए दुआ की गई।

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