आज की डिजिटल दुनिया में GPS हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। रास्ता ढूंढने से लेकर डिलीवरी ट्रैकिंग और ऑनलाइन नेविगेशन तक हर जगह इसका इस्तेमाल हो रहा है। लेकिन इसी तकनीक के साथ एक बड़ा खतरा भी जुड़ गया है जिसे GPS Spoofing कहा जाता है। इसमें नकली सिग्नल भेजकर डिवाइस को गलत लोकेशन दिखाई जाती है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि उपयोगकर्ता को पता ही नहीं चलता कि उसका सिस्टम गलत जानकारी दे रहा है। इसी कारण यह खतरा सामान्य GPS Jammer से भी ज्यादा खतरनाक माना जाता है।
क्या है GPS Spoofing और क्यों है यह गंभीर खतरा
GPS Spoofing एक ऐसी तकनीक है जिसमें असली सैटेलाइट सिग्नल की जगह नकली सिग्नल भेजे जाते हैं। इससे वाहन, मोबाइल या ट्रैकिंग सिस्टम को भ्रमित किया जाता है। उदाहरण के तौर पर किसी ट्रक या शिपमेंट को सही रास्ते पर दिखाया जा सकता है जबकि असल में उसे किसी और दिशा में मोड़ दिया जाता है। यह खासकर लॉजिस्टिक्स और सिक्योरिटी सेक्टर के लिए बड़ा खतरा है। कई मामलों में अपराधियों ने इसका इस्तेमाल कीमती सामान की चोरी और ट्रैकिंग सिस्टम को धोखा देने के लिए किया है।
वैज्ञानिकों ने बनाया रियल टाइम डिटेक्शन डिवाइस
इसी बढ़ते खतरे को देखते हुए वैज्ञानिकों ने एक नया पोर्टेबल डिवाइस विकसित किया है जो GPS Spoofing को रियल टाइम में पकड़ सकता है। यह तकनीक Oak Ridge National Laboratory के शोधकर्ताओं ने तैयार की है। दावा किया जा रहा है कि यह दुनिया का पहला हाई सेंसिटिव पोर्टेबल GPS Spoofing Detector है। इसकी खासियत यह है कि यह केवल सिग्नल ब्लॉक होने पर ही नहीं बल्कि तब भी नकली सिग्नल पकड़ सकता है जब वे असली सैटेलाइट सिग्नल जैसे मजबूत हों। यह इसे मौजूदा तकनीकों से कहीं अधिक उन्नत बनाता है।
कैसे काम करता है यह नया GPS डिटेक्टर
यह डिवाइस पारंपरिक GPS सिस्टम से अलग तरीके से काम करता है। आम GPS केवल सैटेलाइट से आने वाले सिग्नल पर निर्भर करता है लेकिन यह नया डिवाइस Advanced Radio Technology और हाई पावर कंप्यूटिंग का इस्तेमाल करता है। यह सिग्नल का गहराई से विश्लेषण करता है और तुरंत बता सकता है कि सिग्नल असली है या उसमें छेड़छाड़ की गई है। इस तकनीक की वजह से यह चलते वाहन या किसी भी स्थिति में रियल टाइम अलर्ट देने में सक्षम है।
क्यों तेजी से बढ़ रहा है GPS Spoofing का खतरा
हाल के वर्षों में GPS Spoofing और Jamming के मामले तेजी से बढ़े हैं। हालांकि कई देशों में इसका इस्तेमाल अवैध है फिर भी ऐसे उपकरण आसानी से मिल जाते हैं। अपराधी इसका उपयोग ट्रक हाईजैकिंग और शिपमेंट चोरी जैसे मामलों में कर रहे हैं। यह खासकर उन वाहनों के लिए खतरनाक है जो महंगे या संवेदनशील सामान ले जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल सिस्टम पर बढ़ती निर्भरता के साथ यह खतरा और भी गंभीर होता जा रहा है।
आम लोगों और भविष्य के लिए बड़ी सुरक्षा तकनीक
यह नई तकनीक केवल सुरक्षा एजेंसियों के लिए ही नहीं बल्कि आम लोगों के लिए भी बेहद उपयोगी हो सकती है। अगर किसी ड्राइवर को तुरंत पता चल जाए कि GPS गलत जानकारी दे रहा है तो वह समय रहते बचाव कर सकता है। वैज्ञानिकों ने इसे Carbon Monoxide Alarm जैसी सुरक्षा प्रणाली से तुलना की है जो खतरे से पहले चेतावनी देती है। भविष्य में इसे और सस्ता और व्यापक बनाने की योजना है ताकि ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को अधिक सुरक्षित बनाया जा सके।
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