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AI पर यूरोप की बड़ी सख्ती, लागू हुए नए नियम; अब डीपफेक और AI कंटेंट पर देना होगा स्पष्ट लेबल

कंप्यूटर द्वारा तैयार हिंदी ऑडियो

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल दुनिया भर में तेजी से बढ़ रहा है। फोटो, वीडियो, ऑडियो, लेख और चैटबॉट जैसी सेवाओं में AI की बढ़ती भूमिका ने जहां नई संभावनाएं खोली हैं, वहीं डीपफेक, फर्जी जानकारी और डिजिटल धोखाधड़ी जैसी चुनौतियां भी बढ़ी हैं। इन्हीं जोखिमों को देखते हुए यूरोपीय संघ (EU) ने AI से जुड़े नए नियम लागू कर दिए हैं, जिनका उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और लोगों का भरोसा बनाए रखना है।

AI से बने कंटेंट पर होगा साफ लेबल

नए नियमों के तहत यदि किसी फोटो, वीडियो, ऑडियो या टेक्स्ट को AI की मदद से तैयार किया गया है या उसमें महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, तो उसे स्पष्ट रूप से AI-Generated या AI आधारित कंटेंट के रूप में चिह्नित करना होगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दर्शकों और पाठकों को यह जानकारी रहे कि वे जो कंटेंट देख रहे हैं, वह इंसान ने बनाया है या AI की सहायता से तैयार किया गया है।

डीपफेक पर रहेगी विशेष निगरानी

यूरोपीय संघ ने डीपफेक तकनीक को सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक माना है। यदि किसी व्यक्ति, सार्वजनिक हस्ती या घटना का AI की मदद से तैयार किया गया वीडियो, ऑडियो या चित्र वास्तविक जैसा दिखाया जाता है, तो उसके साथ स्पष्ट चेतावनी या लेबल देना अनिवार्य होगा। इसका उद्देश्य गलत सूचना और भ्रामक सामग्री के प्रसार को रोकना है।

AI चैटबॉट की पहचान बताना भी जरूरी

नियम केवल फोटो और वीडियो तक सीमित नहीं हैं। यदि कोई व्यक्ति किसी AI चैटबॉट, वर्चुअल असिस्टेंट या AI एजेंट से बातचीत कर रहा है, तो उसे पहले ही बताया जाना चाहिए कि सामने इंसान नहीं, बल्कि एक AI सिस्टम है। इससे उपयोगकर्ताओं को अधिक पारदर्शिता और भरोसे के साथ डिजिटल सेवाओं का उपयोग करने में मदद मिलेगी।

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AI कंपनियों पर बढ़ी जिम्मेदारी

नए नियमों के तहत बड़े AI मॉडल विकसित करने वाली कंपनियों को अपने सिस्टम से जुड़ी तकनीकी जानकारी सुरक्षित रखनी होगी। उन्हें प्रशिक्षण (Training) में इस्तेमाल किए गए डेटा का सार सार्वजनिक करना होगा और कॉपीराइट कानूनों का पालन सुनिश्चित करना होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर कंपनियों पर भारी आर्थिक दंड लगाया जा सकता है।

दुनिया पर क्या पड़ेगा असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि AI का उपयोग आने वाले वर्षों में और तेजी से बढ़ेगा। ऐसे में यह पहचानना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण होगा कि कौन-सा कंटेंट वास्तविक है और कौन-सा AI से तैयार किया गया है। यूरोपीय संघ के ये नियम पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं। यदि इनका प्रभाव सकारात्मक रहता है, तो भविष्य में अन्य देश भी इसी तरह के नियामक ढांचे को अपनाने पर विचार कर सकते हैं।


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Imran Siddiqui
Imran Siddiqui is a senior journalist and editor of NewsNationOnline, with over 17 years of experience covering news, politics, education and social issues in Maharashtra.