आज के दौर में स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। बैंकिंग ऐप्स, निजी तस्वीरें, दस्तावेज और सोशल मीडिया अकाउंट्स जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां फोन में ही मौजूद रहती हैं। ऐसे में जब फोन चोरी होता है, तो चोर सबसे पहले उसे एयरप्लेन मोड पर डाल देता है। एयरप्लेन मोड ऑन होते ही मोबाइल नेटवर्क, इंटरनेट, वाई-फाई और ब्लूटूथ जैसे सभी वायरलेस कनेक्शन बंद हो जाते हैं। यही वजह है कि ज्यादातर लोगों को लगता है कि अब उनका फोन ट्रैक नहीं किया जा सकता। लेकिन तकनीकी रूप से यह पूरी तरह सही नहीं है।
एयरप्लेन मोड में भी GPS करता है काम
एयरप्लेन मोड का मतलब केवल नेटवर्क कनेक्शन बंद होना है। फोन के अंदर मौजूद GPS सिस्टम इससे प्रभावित नहीं होता। GPS सीधे सैटेलाइट से सिग्नल प्राप्त करता है और फोन की लोकेशन का अनुमान लगाता रहता है। यानी फोन अपनी स्थिति जान सकता है, भले ही उसमें मोबाइल नेटवर्क या इंटरनेट न हो। हालांकि समस्या यह है कि बिना इंटरनेट या नेटवर्क के यह लोकेशन किसी सर्वर या ट्रैकिंग सेवा तक भेजी नहीं जा सकती।
कब आसान हो जाती है ट्रैकिंग?
अगर एयरप्लेन मोड ऑन करने के बाद भी वाई-फाई या ब्लूटूथ मैन्युअली चालू कर दिया जाए, तो फोन दोबारा किसी नेटवर्क से जुड़ सकता है। ऐसी स्थिति में Google Find My Device या Apple Find My जैसी सेवाएं फोन की लोकेशन अपडेट कर सकती हैं। इसके अलावा कानून प्रवर्तन एजेंसियां जरूरत पड़ने पर विशेष उपकरणों और तकनीकों की मदद से भी डिवाइस की पहचान और लोकेशन का पता लगाने की कोशिश कर सकती हैं।
क्या एयरप्लेन मोड आपको पूरी तरह छिपा देता है?
विशेषज्ञों के अनुसार एयरप्लेन मोड आपको पूरी तरह “अदृश्य” नहीं बनाता। यह केवल फोन की रियल-टाइम ऑनलाइन ट्रैकिंग को सीमित करता है। GPS सिस्टम लोकेशन प्राप्त करता रहता है, लेकिन नेटवर्क न होने के कारण वह जानकारी बाहर नहीं भेज पाता। इसलिए यदि आपका फोन चोरी हो जाए, तो तुरंत Find My Device जैसी सेवाओं का उपयोग करें, फोन लॉक करें और नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराएं। सही समय पर की गई कार्रवाई आपके फोन को वापस पाने की संभावना बढ़ा सकती है।
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