स्मार्टफोन कैमरा तकनीक आने वाले कुछ वर्षों में पूरी तरह बदल सकती है। जापान की Nagoya University के शोधकर्ताओं ने एक नई ट्रांसपेरेंट ऑप्टिकल सेंसर तकनीक विकसित की है, जो मौजूदा बड़े कैमरा सेंसर की जगह ले सकती है। इस नई तकनीक की मदद से भविष्य के स्मार्टफोन में छोटे और पतले कैमरा मॉड्यूल के बावजूद बेहतर फोटो क्वालिटी मिल सकेगी। यदि यह तकनीक व्यावसायिक रूप से सफल होती है, तो स्मार्टफोन डिज़ाइन और फोटोग्राफी दोनों में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
छोटे सेंसर, बेहतर तस्वीरें और आसान मैन्युफैक्चरिंग
रिसर्च के अनुसार, नए सेंसर 400 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में भी स्थिर प्रदर्शन करने में सक्षम हैं। साथ ही यह वैक्यूम और अत्यधिक नमी वाले वातावरण में भी प्रभावी ढंग से काम करते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि इससे न केवल स्मार्टफोन बल्कि ऑटोमोबाइल, मेडिकल एंडोस्कोप, औद्योगिक इमेजिंग सिस्टम और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में भी नई संभावनाएं खुलेंगी। इसके अलावा, सेंसर निर्माण की प्रक्रिया भी पहले की तुलना में अधिक आसान और किफायती हो सकती है।
मौजूदा कैमरा सेंसर कैसे करते हैं काम?
वर्तमान स्मार्टफोन कैमरा सेंसर में प्रत्येक पिक्सल केवल रेड, ग्रीन या ब्लू (RGB) में से एक रंग को रिकॉर्ड करता है। बाद में सॉफ्टवेयर आसपास के पिक्सल की जानकारी जोड़कर पूरी रंगीन तस्वीर तैयार करता है। इस प्रक्रिया में लाखों रंग फिल्टर का उपयोग करना पड़ता है और कई बार तस्वीर की पूरी डिटेल कैप्चर नहीं हो पाती। यही वजह है कि कैमरा सेंसर को बड़ा बनाना पड़ता है ताकि बेहतर क्वालिटी हासिल की जा सके।
नया सेंसर ऐसे करेगा कमाल
नई तकनीक में ट्रांसपेरेंट GZO नैनोशीट पर कई लाइट-डिटेक्टिंग लेयर लगाई जाती हैं। हर लेयर अलग-अलग प्रकाश तरंगों (वेवलेंथ) को पहचानती है, जिससे एक ही पिक्सल RGB की पूरी जानकारी रिकॉर्ड कर सकता है। इससे कुल पिक्सल की जरूरत लगभग 75 प्रतिशत तक कम हो सकती है, जबकि इमेज क्वालिटी और रेजॉल्यूशन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह तकनीक इंसान की आंख के रेटिना की तरह काम करती है, जो दिमाग तक पहुंचने से पहले ही रंगों की जानकारी अलग-अलग प्रोसेस कर देती है।
Discover more from NewsNation Online
Subscribe to get the latest posts sent to your email.


















































































Leave a Reply