आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ चैटबॉट, ऐप या तस्वीरें बनाने तक सीमित नहीं है। वैज्ञानिकों ने पहली बार AI की मदद से ऐसे नए वायरस तैयार किए हैं, जो प्राकृतिक रूप से पहले मौजूद नहीं थे। यह उपलब्धि चिकित्सा विज्ञान के लिए नई उम्मीद लेकर आई है, लेकिन इसके साथ जैव सुरक्षा और AI के दुरुपयोग को लेकर कई सवाल भी खड़े हो गए हैं।
AI ने कैसे तैयार किए नए वायरस?
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और कैलिफोर्निया स्थित आर्क इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने Evo 1 और Evo 2 नाम के AI मॉडल का इस्तेमाल किया। यह मॉडल उसी तरह काम करता है जैसे कोई AI भाषा मॉडल अगले शब्द का अनुमान लगाता है। फर्क सिर्फ इतना है कि यहां यह DNA में अगला आनुवंशिक अक्षर (Genetic Letter) अनुमानित करता है और उसी आधार पर नए DNA अनुक्रम तैयार करता है।
शोधकर्ताओं ने प्राकृतिक जीनोम के विशाल डेटासेट पर मॉडल को प्रशिक्षित किया और इसके बाद हजारों संभावित डिजाइनों में से करीब 300 का प्रयोगशाला में परीक्षण किया।
क्या इंसानों के लिए खतरा है?
रिसर्च टीम के अनुसार, AI से तैयार किए गए ये वायरस केवल विशेष प्रकार के बैक्टीरिया (बैक्टीरियोफेज) को संक्रमित करने के लिए डिजाइन किए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन्हें इंसानों, जानवरों या पौधों को संक्रमित करने के लिए नहीं बनाया गया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि प्रशिक्षण के दौरान मानव रोगजनकों (Human Pathogens) से जुड़ा डेटा शामिल नहीं किया गया।
हालांकि, किसी भी नई जैव-प्रौद्योगिकी की तरह, इस क्षेत्र में आगे के शोध और स्वतंत्र वैज्ञानिक मूल्यांकन महत्वपूर्ण रहेंगे।
इलाज में कैसे मिल सकती है मदद?
इस शोध का सबसे बड़ा संभावित लाभ एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी (Antibiotic Resistant) संक्रमणों के इलाज में देखा जा रहा है। दुनिया भर में ऐसे बैक्टीरिया बढ़ रहे हैं, जिन पर सामान्य एंटीबायोटिक दवाएं असर नहीं करतीं। ऐसे में बैक्टीरिया को नष्ट करने वाले विशेष वायरस भविष्य में वैकल्पिक उपचार (Phage Therapy) का हिस्सा बन सकते हैं।
प्रयोग के दौरान वैज्ञानिकों ने पेट्री डिश में बैक्टीरिया के नष्ट होने के संकेत देखे, जिससे यह पुष्टि हुई कि कुछ AI-डिजाइन किए गए वायरस सक्रिय थे।
नई तकनीक के साथ बढ़ीं सुरक्षा चिंताएं
विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि चिकित्सा विज्ञान के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ जैव सुरक्षा (Biosecurity) पर नए सवाल भी उठे हैं। चूंकि Evo मॉडल ओपन-सोर्स है, इसलिए इस तरह की तकनीकों के सुरक्षित उपयोग, निगरानी और नियमन पर वैश्विक स्तर पर चर्चा की जरूरत महसूस की जा रही है।
हालांकि, कई वैज्ञानिकों का कहना है कि इस अध्ययन में सबसे छोटे और अपेक्षाकृत सरल वायरस पर काम किया गया है। अधिक जटिल वायरस तैयार करना अभी भी अत्यंत कठिन वैज्ञानिक चुनौती बना हुआ है।
AI और बायोटेक्नोलॉजी का नया दौर
पिछले कुछ वर्षों में AI का उपयोग दवाओं की खोज, प्रोटीन डिजाइन और चिकित्सा अनुसंधान में तेजी से बढ़ा है। अब DNA डिजाइन में AI की भूमिका यह संकेत देती है कि भविष्य में नई दवाओं और उपचार पद्धतियों के विकास की गति और तेज हो सकती है। साथ ही यह भी स्पष्ट है कि ऐसी तकनीकों के साथ मजबूत नैतिक मानकों और सुरक्षा नियमों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक होगी।
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