Special significance of Sri Datta Jayanti festival in Suchindram – Bharuka
जालना/प्रतिनिधि – कन्याकुमारी से 11 किमी की दूरी पर स्थित सुचिंद्रम में दत्त जयंती महोत्सव एक अनोखे और विशेष तरीके से मनाया जाता है। यहां देवी-देवताओं की ऊंची मूर्तियां हैं और इस गांव में गोपुरम नामक एक विशाल मंदिर स्थित है। सुचिंद्रम गांव में सबसे बड़ा दत्त जयंती उत्सव, रथोत्सव और चैत्र महीने में जलोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह जानकारी आध्यात्मिक लेखक और लायन्स क्लब ऑफ जालना संस्कृति के पूर्व अध्यक्ष हनुमानप्रसाद भारुका ने दी।
शनिवार, 14 दिसंबर को दत्त जयंती है। इस अवसर पर तीर्थक्षेत्र के महत्व पर जानकारी देते हुए श्री भारुका ने कहा कि सुचिंद्रम का विशेष महत्व इसलिए है क्योंकि यहीं पर महासती अनुसूया की सतीत्व की परीक्षा ली गई थी।
पौराणिक कथा के अनुसार, मुनि अत्रि की पत्नी अनुसूया अपने पति के साथ सुचिंद्रम के एक आश्रम में तपस्या कर रही थीं। एक दिन मुनि अत्रि हिमालय की ओर प्रस्थान कर गए। अनुसूया की सतीत्व की परीक्षा लेने के लिए ब्रह्मा, विष्णु और महेश अतिथि के रूप में आश्रम में आए। अनुसूया ने उनका स्वागत किया और भोजन के लिए पात्र सजाए।

लेकिन उनकी परीक्षा के लिए आए इन तीनों ने कहा कि उन्हें निर्वस्त्र होकर भोजन परोसें, अन्यथा वे चले जाएंगे। अनुसूया ने यह बात स्वीकार कर ली और तीनों पर अपने कमंडल के पवित्र जल का छिड़काव किया। इसके बाद वह रसोई में गईं और अपने पति का स्मरण करके निर्वस्त्र होकर भोजन परोसने के लिए आईं। लेकिन जैसे ही वह आईं, तीनों देवता बाल रूप में बदल गए और रोने लगे।
इस घटना के बारे में नारद मुनि ने लक्ष्मी, सरस्वती और पार्वती को बताया। तीनों देवियों ने सती अनुसूया के चरण पकड़कर प्रार्थना की कि उनके पतियों को उनके मूल स्वरूप में लौटा दें। सती अनुसूया ने उनकी यह इच्छा पूरी की। यह कथा इस तीर्थस्थान के महत्व को दर्शाती है। यह जानकारी श्री भारुका ने दी।
