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एआई से महिला आर्थिक सशक्तिकरण को मिलेगी नई ताकत: इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट–2026

एआई से महिला आर्थिक सशक्तिकरण

एआई से महिला आर्थिक सशक्तिकरण को मिलेगी नई ताकत, शाश्वत विकास संभव: विजय रहाटकर

‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट–2026’ में महिला नेतृत्व और डिजिटल समृद्धि पर व्यापक मंथन

नई दिल्ली।
तेजी से बदलते तकनीकी दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) अब केवल एक तकनीकी साधन नहीं, बल्कि शिक्षा, प्रशासन, उद्योग और अर्थव्यवस्था का अहम आधार बनता जा रहा है। आने वाले वर्षों में एआई के चलते रोजगार के अवसरों और उनके स्वरूप में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। ऐसे समय में महिलाओं को एआई की केवल उपयोगकर्ता बनकर सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि शोधकर्ता, नवाचारकर्ता और निर्माता बनकर इस परिवर्तन का नेतृत्व करना होगा।

यह विचार विजया रहाटकर, अध्यक्ष राष्ट्रीय महिला आयोग ने ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट–2026’ के दौरान व्यक्त किए। उन्होंने आशावाद जताया कि यदि महिला आर्थिक सशक्तिकरण को एआई का समर्थन मिले, तो महिलाओं का शाश्वत और समावेशी विकास सुनिश्चित किया जा सकता है।

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भारत मंडपम में हुआ विशेष सत्र

दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के तहत “एआई और आर्थिक शक्ति: महिला नेतृत्व में समृद्धि की रूपरेखा” विषय पर विशेष सत्र का आयोजन किया गया। यह सत्र राष्ट्रीय महिला आयोग, International Telecommunication Union (आईटीयू) और United Nations Institute for Training and Research (यूनिटार) के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।

समापन भाषण में विजय रहाटकर ने कहा कि यह सत्र केवल चर्चा नहीं, बल्कि एक आंदोलन है। भारतीय महिलाओं ने हर क्षेत्र में नेतृत्व किया है और एआई जैसे उभरते क्षेत्रों में भी वे पीछे नहीं रहेंगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि महिलाओं के लिए उपयुक्त प्रशिक्षण और मजबूत इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा, ताकि वे इस तकनीक की मालिक बन सकें, न कि केवल उपभोक्ता।

एआई साक्षरता, डेटा सुरक्षा और नैतिकता पर जोर

विजया रहाटकर ने स्पष्ट किया कि महिलाओं के लिए एआई साक्षरता बेहद जरूरी है। इसमें डेटा संरक्षण, डिजिटल नैतिकता और साइबर सुरक्षा की गहरी समझ शामिल होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय महिला आयोग केवल नीतिगत घोषणाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सूक्ष्म और लघु उद्योगों (MSME) को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ने के लिए ठोस कदम उठाएगा।

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👉 राष्ट्रीय महिला आयोग से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए देखें:
🔗 https://ncw.nic.in

महिलाओं के खिलाफ डिजिटल खतरों पर चिंता

सूचना एवं जनसंपर्क महानिदेशक तथा प्रधान सचिव ब्रिजेश सिंह ने अपने संबोधन में महिलाओं के सामने बढ़ते डिजिटल खतरों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि एआई प्रणालियां अक्सर पुरुष-प्रधान डेटा पर आधारित होती हैं, जिससे संवेदनशीलता, न्याय और समानता की कमी नजर आती है।

उन्होंने बताया कि डीपफेक तकनीक के करीब 91 प्रतिशत शिकार महिलाएं होती हैं, जो बेहद चिंताजनक है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही तय करने, ‘सेफ हार्बर’ नियमों के दुरुपयोग पर रोक लगाने और एआई-निर्मित कंटेंट पर वॉटरमार्क अनिवार्य करने की जरूरत बताई।

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👉 आईटीयू की डिजिटल सेफ्टी पहलों के बारे में पढ़ें:
🔗 https://www.itu.int

वैश्विक सहयोग से खुलेगा महिलाओं के लिए नया रास्ता

यूनिटार की निदेशक मिहोको कुमामोटो ने क्षमता निर्माण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर देते हुए कहा कि इससे महिलाएं एआई आधारित वैश्विक अवसरों का लाभ उठा सकेंगी। उन्होंने कहा कि यूनिटार भारत सरकार, राष्ट्रीय महिला आयोग और अन्य साझेदार संस्थाओं के साथ मिलकर ऐसे कार्यक्रम लागू करना चाहता है, जो महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को मजबूती दें और ग्लोबल साउथ के लिए एक उदाहरण बनें।

👉 यूनिटार की वैश्विक पहलों के लिए देखें:
🔗 https://unitar.org

छोटे शहरों की महिलाओं पर फोकस

आईटीयू की एशिया-पैसिफिक क्षेत्रीय निदेशक अत्सुको ओकुडा ने कहा कि द्वितीय और तृतीय श्रेणी के शहरों की महिलाओं के लिए डिजिटल समावेशन बढ़ाना बेहद जरूरी है। उन्होंने एआई नवाचार को महिलाओं के वास्तविक आर्थिक सशक्तिकरण में बदलने के लिए भारत से एक प्रैक्टिकल रोडमैप तैयार करने का आह्वान किया।

रचनात्मक और डिजिटल अर्थव्यवस्था में नए अवसर

एआई संगीत निर्माता कार्तिक शाह ने बताया कि एआई के चलते रचनात्मक और डिजिटल अर्थव्यवस्था में महिलाओं के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि तकनीक कला और संगीत के क्षेत्र में बदलाव लाकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का मंच दे सकती है।

कार्यक्रम की शुरुआत महिला सशक्तिकरण पर आधारित एआई वीडियो से हुई। सत्र का संचालन सलोनी लखिया ने किया, जबकि आकांक्षा ने सभी वक्ताओं का परिचय कराया।

👉 निष्कर्ष:
‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट–2026’ ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि यदि एआई को महिला सशक्तिकरण से जोड़ा जाए, तो न केवल महिलाओं का, बल्कि पूरे समाज और अर्थव्यवस्था का समावेशी और टिकाऊ विकास संभव है।

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Imran Siddiqui

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