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अकीदत की खुशबू में लिपटा जालना, 748वें उर्स-ए-शेर सवार का रूहानी आग़ाज़

जालना में 748वां उर्स-ए-शेर सवार आरंभ, पहले दिन संदलपोशी सहित विविध मजहबी कार्यक्रम संपन्न

तीन दिवसीय आयोजन में सुन्नी इज्तेमा, दस्तारबंदी व रूहानी महफिलें; देशभर के उलेमा होंगे शामिल

जालना: जालना शहर स्थित दरगाह राजाबाग शेर सवार में सूफी संत हज़रत सैयद अहमद शेर सवार (रहमतुल्लाह अलैह) का 748वां उर्स-ए-मुबारक पूरे अकीदत व एहतराम के साथ शुरू हो गया है। उर्स की औपचारिक शुरुआत शनिवार, 27 दिसंबर 2025 को हुई, जबकि देर शाम संदलपोशी की रस्म अदा की गई, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत कर अपनी हाज़िरी दर्ज कराई।

उर्स के उपलक्ष्य में दरगाह परिसर में तीन दिनों तक चलने वाले विविध मजहबी और रूहानी कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। सभी कार्यक्रम दरगाह के इनामदार व मुतवल्ली सैयद जमील अहमद क़ादरी रज़वी की सरपरस्ती में संपन्न हो रहे हैं।

पहले दिन के कार्यक्रम
उर्स के पहले दिन सुबह 10 बजे ख़त्म-ए-ख़्वाजगान के साथ कार्यक्रमों की शुरुआत हुई। ज़ुहर की नमाज़ के बाद कुरआन ख़्वानी और अस्र के बाद सिलसिला-ए-क़ादरिया का ज़िक्र-ए-ख़्वाजगान अदा किया गया। इसके पश्चात नूरी महफिल में नातिया कलाम और मनक़बत पेश की गईं।
मगरिब की नमाज़ के बाद क़ुल शरीफ़ व चादरपोशी की रस्म अदा की गई। इसके उपरांत दरगाह ट्रस्ट की ओर से ज़ायरीन के लिए
ग़रीब नवाज़ लंगर की व्यवस्था की गई। इशा की नमाज़ के बाद दारुल उलूम क़ादरी अनवार-ए-रज़ा के छात्रों द्वारा तालीमी प्रदर्शन प्रस्तुत किया गया। देर रात बज़्म-ए-नात-ए-रसूल ﷺ में प्रसिद्ध नात ख़्वां मौलाना अहमद रज़ा मिस्बाही उर्फ़ नूरी मियां ने नात व मनक़बत से समां बांधा।

जालना में हज़रत सैयद अहमद शेर सवार की दरगाह सजावट और रंग-बिरंगी रोशनी के साथ रात में दिख रही है।

दूसरा दिन: सुन्नी इज्तेमा व दस्तारबंदी

रविवार, 28 दिसंबर को मगरिब से रात 12 बजे तक केवल पुरुष ज़ायरीन के लिए मुक़द्दस तबर्रुक़ात की ज़ियारत कराई जाएगी। इनमें सरकार-ए-दो आलम ﷺ का मुए-मुबारक, ग़िलाफ़-ए-काबा शरीफ़, ग़िलाफ़-ए-मज़ार-ए-अक़दस ﷺ, गुम्बद-ए-ख़ज़रा की मिट्टी से बनी मोहर-ए-नबूवत, ख़ाना-ए-काबा के अंदरूनी फ़र्श का संगमरमर तथा हज़रत शेर सवार रहमतुल्लाह अलैह से संबंधित अन्य तबर्रुक़ात शामिल हैं।
इशा की नमाज़ के बाद सुन्नी इज्तेमा व दस्तारबंदी का आयोजन किया जाएगा। इज्तेमा की क़ियादत हज़रत अल्लामा सैयद मुईनुद्दीन अशरफ़ अशरफ़ी जिलानी (सज्जादानशीन किछौछा शरीफ़) करेंगे, जबकि सदारत क़ायद-ए-मिल्लत हाजी मौलाना सईद नूरी (सदर, रज़ा अकादमी मुंबई) करेंगे। इस अवसर पर दारुल उलूम गुलशन-ए-क़ादरी अनवार-ए-रज़ा के छात्रों की दस्तारबंदी
भी की जाएगी।
मुख्य वक्ताओं के रूप में अल्लामा सैयद शाह नूर मियां अशरफ़ी (राजस्थान) और अल्लामा मुफ्ती मोहम्मद शाहनवाज़ आलम मिस्बाही (उत्तर प्रदेश) शिरकत करेंगे। कार्यक्रम की निज़ामत हाफ़िज़ व क़ारी मोहम्मद रमज़ान अली सुल्तानी (बिहार) करेंगे।

समापन व अपील

27 और 28 दिसंबर को दरगाह शरीफ़ में महिलाओं का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। तीन दिवसीय उर्स का समापन सोमवार, 29 दिसंबर को फ़ातेहा ख़्वानी के साथ होगा।
दरगाह के मुतवल्ली सैयद जमील अहमद क़ादरी ने तमाम अकीदतमंदों से उर्स, सुन्नी इज्तेमा और दस्तारबंदी में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है। उर्स को सफल बनाने के लिए दारुल उलूम गुलशन-ए-क़ादरी अनवार-ए-रज़ा के उस्ताद, रज़ा अकादमी के अराकीन
तथा विभिन्न दीनी संगठनों के कार्यकर्ता सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं। यह जानकारी एड फ़िरोज़ बाग़बान ने दी।

जालना में स्थित दरगाह राजाबाग शेर सवार के समक्ष श्रद्धालुओं की भीड़, उर्स-ए-शेर सवार के कार्यक्रम के दौरान सजावट और फूलों से सुसज्जित स्थान।
एक धार्मिक कार्यक्रम में भाग ले रहे लोग, जिसमें कई पुरुष और बच्चे एकत्रित हैं। पृष्ठभूमि में सजावट और शांति का माहौल है।
लोग दरगाह पर एकत्र होकर मजहबी रस्म अदा करते हुए, जिसमें रंग-बिरंगी पगड़ी पहने लोग और मुस्लिम स्कार्फ वाले व्यक्ति शामिल हैं।

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