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अनुचित तुलना: हिंदू धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन से वक्फ कानून की तुलना अनुचित और निराधार है — केंद्र सरकार का सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा

अनुचित तुलना: हिंदू धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन से वक्फ कानून की तुलना अनुचित और निराधार है — केंद्र सरकार का सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा

नई दिल्ली/प्रतिनिधि।
वक्फ संशोधन कानून 2025 को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं पर केंद्र सरकार ने अपना आधिकारिक पक्ष रखते हुए कहा है कि यह कानून किसी भी प्रकार से भारतीय संविधान का उल्लंघन नहीं करता। सरकार ने कोर्ट से अनुरोध किया कि इस कानून के किसी भी प्रावधान पर अंतरिम रोक न लगाई जाए और पहले इसकी पूरी सुनवाई कर अंतिम निर्णय दिया जाए।

सरकार का स्पष्ट रुख:

केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में इस बात पर जोर दिया है कि हिंदू धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन से वक्फ कानून की तुलना पूरी तरह से अनुचित और निराधार है। यह दोनों व्यवस्थाएं अलग कानूनी और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से संचालित होती हैं, जिनकी तुलना नहीं की जा सकती।

प्रमुख बिंदु जो सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखे:

  • कोई नागरिक अधिकार का उल्लंघन नहीं: याचिकाओं में किसी भी व्यक्ति के साथ अन्याय या प्रत्यक्ष नुकसान की बात नहीं की गई है। अतः इसे संविधान के नागरिक अधिकारों के उल्लंघन के रूप में नहीं देखा जा सकता।
  • वक्फ संशोधन कानून का उद्देश्य: यह कानून मुस्लिम समुदाय में वक्फ प्रबंधन को पारदर्शी, न्यायिक रूप से जवाबदेह और व्यवस्थित बनाने के लिए लाया गया है।
  • धार्मिक प्रथाओं का सम्मान: इस कानून में केवल प्रशासनिक और संपत्ति प्रबंधन संबंधी प्रावधान शामिल हैं। मुस्लिम समाज की धार्मिक आस्थाओं और इबादत की स्वतंत्रता को पूरी तरह अछूता रखा गया है।
  • कोई जबरन संपत्ति हस्तांतरण नहीं: वक्फ संपत्तियों की पहचान और रेगुलेशन न्यायिक निगरानी में किया जाता है। कानून यह सुनिश्चित करता है कि किसी नागरिक को अदालत तक पहुँच से वंचित न किया जाए।
  • वक्फ बोर्ड में समावेशिता: वक्फ परिषद और बोर्ड के 22 सदस्यों में अधिकतम दो गैर-मुस्लिम सदस्य शामिल किए जा सकते हैं, जिससे समावेशी दृष्टिकोण को बल मिलता है।
  • सरकारी जमीन पर स्थिति स्पष्ट: केंद्र ने कहा कि यदि सरकारी जमीन को वक्फ संपत्ति के रूप में गलत तरीके से दर्ज किया गया है तो उसका उद्देश्य केवल राजस्व रिकॉर्ड को ठीक करना है, न कि किसी धार्मिक समुदाय की जमीन पर दावा।

संवैधानिकता और संसद की शक्ति:

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि संसद को कानून बनाने का अधिकार है और वक्फ संशोधन कानून उसी अधिकार क्षेत्र में पारित किया गया है। यह कानून संविधान के ढांचे के अनुसार पारदर्शिता, सामाजिक न्याय, धार्मिक स्वायत्ता और जनहित के उद्देश्यों को संतुलित करता है।

निष्कर्ष:

वक्फ कानून 2025 के खिलाफ उठ रही आशंकाओं को केंद्र सरकार ने ठोस कानूनी और संवैधानिक तर्कों के साथ खारिज किया है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि किसी प्रावधान पर रोक लगाने के बजाय, इस मामले की गहराई से सुनवाई कर निर्णय लिया जाए ताकि धार्मिक आस्थाओं और प्रशासनिक जिम्मेदारियों में संतुलन बना रहे।


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Imran Siddiqui

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