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कांग्रेस द्वारा उम्मीदवारी में देरी और ईवीएम पर सवाल: कैलाश गोरंट्याल ने हार के कारणों का किया खुलासा

Delay in candidature by Congress and questions on EVM: Kailash Gorantyal reveals the reasons for defeat

जालना: विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद कांग्रेस उम्मीदवार और पूर्व विधायक कैलाश गोरंट्याल ने अपनी हार पर नाराजगी जाहिर की है. उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर आरोप लगाते हुए कहा कि टिकट मिलने के बाद भी उन्हें चुनावी मैदान में अकेला छोड़ दिया गया. साथ ही, गोरंट्याल ने ईवीएम पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे अदालत में चुनौती देने की तैयारी की बात कही है.

*उम्मीदवारी में देरी बनी हार की वजह

गोरंट्याल ने कहा कि कांग्रेस ने उनकी उम्मीदवारी देर से घोषित की, जिससे उन्हें प्रचार के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाया. उन्होंने चुनाव प्रचार के लिए उद्धव ठाकरे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी जैसी बड़ी हस्तियों की सभाओं की मांग की थी, लेकिन पार्टी ने इस पर कोई कदम नहीं उठाया. गोरंट्याल ने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी के शहर अध्यक्ष ने उनके खिलाफ काम किया, जिसकी शिकायत उन्होंने पार्टी नेतृत्व से की है.

*ईवीएम पर सवाल और कानूनी लड़ाई का इरादा

गोरंट्याल ने मतगणना प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि कई ईवीएम मशीनों की चार्जिंग 90% थी, जो सामान्य नहीं है. उन्होंने कहा कि वे इस मुद्दे को अदालत में उठाएंगे और इसके लिए आवश्यक दस्तावेज जुटाए जा रहे हैं.

*पारंपरिक वोट बैंक खिसका, विरोधियों को मिला फायदा

गोरंट्याल ने बताया कि कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक इस चुनाव में उनसे दूर हो गया. वंचित बहुजन आघाडी के डेविड सुमारे को 6,000 और कांग्रेस के बागी उम्मीदवार अब्दुल हफीज को 30,000 वोट मिले. ये सारे वोट कांग्रेस के परंपरागत मत थे.  गोरंट्याल ने दावा किया कि इस बार उन्हें जो वोट मिले, वे उनके व्यक्तिगत प्रयासों से जुड़े हुए थे.

*चुनावी समीकरण बदले और प्रचार में आई बाधा*

गोरंट्याल ने कहा कि 18 नवंबर तक महाविकास आघाड़ी के लिए सकारात्मक माहौल था, लेकिन उसके बाद समीकरण बदल गए. विरोधी दलों ने मतदाताओं को प्रलोभन दिया, जिसे रोकने में पार्टी नाकाम रही. इसके अलावा, उम्मीदवारी देर से घोषित होने के कारण उन्हें मतदाताओं तक पहुंचने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल सका.

*पार्टी छोड़ने का इरादा नहीं

गोरंट्याल ने साफ किया कि उनका पार्टी छोड़ने का कोई इरादा नहीं है. उन्होंने कहा कि वे कांग्रेस पार्टी के प्रति वफादार हैं और उम्मीद करते हैं कि पार्टी उनके आरोपों की जांच कर उचित कार्रवाई करेगी.

*आखिरी दिनों में अफवाहों का असर 

गोरंट्याल ने कहा कि चुनाव के आखिरी दो दिनों में यह अफवाह फैलाई गई कि अब्दुल हफीज जीत रहे हैं. ये विरोधियों की साजिश थी और व्यापारी वर्ग इस साजिश का शिकार हो गया. इसका असर यह हुआ कि व्यापारी वर्ग का वोट विरोधी खेमे में चला गया. उन्होंने कहा कि इस स्थिति को रोकने के लिए कांग्रेस ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया. गोरंट्याल ने कहा कि चुनाव में ताकत और समय दोनों की कमी रही, जिससे उन्हें हार का सामना करना पड़ा. 

कैलाश गोरंट्याल की यह नाराजगी कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक चुनौतियों को उजागर करती है. यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी इस पर क्या कदम उठाती है और गोरंट्याल ईवीएम और चुनाव में अन्य गड़बड़ियों को लेकर  अपनी शिकायतों को लेकर अदालत में कैसे आगे बढ़ते हैं.

यह ध्यान देने योग्य है कि 2014 के चुनावों में, भले ही कैलाश गोरंट्याल हार गए थे, लेकिन उन्होंने चुनाव में हुई अनियमितताओं को चुनौती देते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था. यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां अदालत ने अर्जुन खोतकर की जीत को रद्द कर दिया था.


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Imran Siddiqui

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