जालना रेलवे स्टेशन मस्जिद में रमज़ान पर ‘दस दिन के इस्लाही बयानात’ की शुरुआत
तरावीह के बाद हर रात होंगे उलेमा के बयान, दीन से जुड़े सवालों के जवाब भी मिलेंगे
जालना | प्रतिनिधि
पवित्र रमज़ान माह के मुबारक मौके पर जालना शहर की रेलवे स्टेशन मस्जिद में “दस दिन के दस इस्लाही बयानात” का विशेष धार्मिक कार्यक्रम शुरू किया गया है। यह आध्यात्मिक और शैक्षणिक सिलसिला 19 रमज़ान (9 मार्च 2026) से आरंभ होकर 28 रमज़ान (18 मार्च 2026) तक लगातार दस दिनों तक चलेगा।
आयोजकों के अनुसार इस कार्यक्रम का उद्देश्य रमज़ान के पवित्र दिनों में लोगों को कुरआन और सुन्नत की रोशनी में दीन की सही समझ देना तथा समाज में इस्लाही माहौल पैदा करना है। कार्यक्रम में शहर और आसपास के इलाकों के बड़ी संख्या में लोग शामिल होने की उम्मीद है।
हर रोज़ तरावीह के बाद होगा बयान
आयोजन समिति के मुताबिक, हर दिन तरावीह की नमाज़ के बाद रात ठीक 10 बजे अलग-अलग विषयों पर उलेमा-ए-किराम अपने इस्लाही बयान पेश करेंगे।
हर बयान के अंत में लगभग 10 मिनट का सवाल-जवाब सत्र भी रखा गया है, जिसमें उपस्थित लोग अपने दीन और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े सवाल पूछ सकेंगे और उलेमा से मार्गदर्शन प्राप्त कर सकेंगे।
यह पहल खास तौर पर युवाओं और आम लोगों के लिए उपयोगी मानी जा रही है, ताकि वे अपने धार्मिक और सामाजिक जीवन से जुड़े मुद्दों को बेहतर तरीके से समझ सकें।
कुरआन और सुन्नत की रोशनी में मार्गदर्शन
दस दिवसीय इस इस्लाही कार्यक्रम में उलेमा-ए-किराम मुसलमानों की जिंदगी से जुड़े महत्वपूर्ण धार्मिक और सामाजिक विषयों पर प्रकाश डालेंगे।
प्रमुख विषयों में शामिल हैं:
- आख़िरी अशरे की कद्र करें, संवर जाएगा मुकद्दर
- लिबास के शरई उसूल
- वालिदैन और औलाद के आपसी हकूक
- निज़ाम-ए-ज़कात : इबादत भी, ज़रूरत भी
- सही अकीदा क्यों ज़रूरी है
- हज़रत महदी के ज़ुहूर पर कुरआन और सुन्नत की रोशनी
- शादीशुदा जिंदगी के सुनहरे उसूल
- रजू इलल्लाह (अल्लाह की ओर लौटना)
- रिश्तेदारों के हकूक
- इस्तेकामत (दीन पर डटे रहना) – कामयाबी की ज़मानत
इन विषयों के माध्यम से समाज में नैतिकता, पारिवारिक मूल्यों और इस्लामी शिक्षाओं को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

मशहूर उलेमा करेंगे खिताब
इस कार्यक्रम में विभिन्न स्थानों से आए कई प्रतिष्ठित उलेमा-ए-किराम अपने विचार व्यक्त करेंगे।
बयान करने वाले प्रमुख उलेमा में शामिल हैं:
- मौलाना शुएब
- मौलाना अरशद नदवी
- मुफ़्ती आदम इशाअती
- मुफ़्ती इमरान इशाअती
- मुफ़्ती अवैस क़ासमी
- मौलाना आरिफ अशरफी
- मुफ़्ती अब्दुर्रहमान
- मुफ़्ती फहीम
- मुफ़्ती एहसानुलहक
इसके अलावा कार्यक्रम के दौरान किराअत (कुरआन की तिलावत) और नात भी पेश की जाएगी, जिससे महफिल का माहौल और अधिक रूहानी और प्रभावशाली बनेगा।
जमीयत उलमा जालना के सहयोग से आयोजन
इस पूरे कार्यक्रम का आयोजन जमीयत उलमा शहर व जिला जालना तथा रेलवे स्टेशन मस्जिद जालना के जिम्मेदारों की देखरेख में किया जा रहा है।
आयोजकों का कहना है कि रमज़ान का महीना इबादत, तौबा और आत्मिक सुधार का महीना है। ऐसे में इस तरह के इस्लाही कार्यक्रम लोगों को दीन की सही राह पर चलने और अपने जीवन को बेहतर बनाने की प्रेरणा देते हैं।

लोगों से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील
आयोजकों ने शहर के लोगों से अपील की है कि रमज़ान के इन मुबारक दिनों में ज्यादा से ज्यादा संख्या में मस्जिद पहुंचकर इन इस्लाही बयानात से फायदा उठाएं और अपनी जिंदगी को कुरआन व सुन्नत की शिक्षाओं के अनुसार संवारने की कोशिश करें।
धार्मिक विद्वानों के अनुसार रमज़ान के आखिरी दिनों में इबादत और दीन की समझ हासिल करना इंसान की रूहानी तरक्की और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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