जालना में 21वें रमजान की खास रौनक: हजरत जानुल्लाह शाह बाबा के दस्तरखान पर हजारों रोजेदार करेंगे इफ्तार
जालना: पवित्र रमजान माह के दौरान जालना शहर में 21वें रोजे का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इसी अवसर पर शहर की प्रसिद्ध दरगाह हजरत जानुल्लाह शाह बाबा के दस्तरखान पर हर साल की तरह इस वर्ष भी भव्य सामूहिक इफ्तार का आयोजन किया जा रहा है।
दरगाह प्रबंधन के अनुसार 21वें रमजान (11 मार्च) को दरगाह परिसर में हजारों रोजेदार एक साथ रोजा खोलेंगे। इस दौरान इबादत, दुआ और लंगर का विशेष आयोजन भी किया जाएगा। इस धार्मिक कार्यक्रम में जालना शहर के अलावा आसपास के जिलों और गांवों से भी बड़ी संख्या में अकीदतमंदों के पहुंचने की संभावना है।
जालना शहर के नाम से जुड़ी है दरगाह की पहचान
धार्मिक मान्यता के अनुसार जालना शहर का नाम भी हजरत जानुल्लाह शाह बाबा से जुड़ा हुआ माना जाता है। इसलिए 21वें रमजान को दरगाह पर होने वाला यह आयोजन शहर के धार्मिक और सामाजिक जीवन में विशेष स्थान रखता है।
इस दिन को दरगाह का एक तरह से खास उर्स भी माना जाता है। इस अवसर पर लोग दरगाह में हाजिरी देकर दुआ करते हैं और सामूहिक इफ्तार में शामिल होकर भाईचारे और एकता का संदेश देते हैं।
हाथ से लिखी कुरान शरीफ के दीदार का मिलेगा दुर्लभ अवसर
21वें रमजान के इस खास अवसर पर अकीदतमंदों को एक और अनोखा मौका मिलता है। दरअसल, हजरत जानुल्लाह शाह बाबा द्वारा अपने हाथों से लिखी गई पवित्र कुरान शरीफ के दीदार का अवसर साल में केवल इसी दिन मिलता है।
बताया जाता है कि यह कुरान शरीफ दरगाह की ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहर है। इसके दीदार के लिए दूर-दराज के इलाकों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दरगाह पहुंचते हैं और इस अनमोल विरासत को देखने का सौभाग्य प्राप्त करते हैं।
हजरत अली की याद में शुरू हुई इफ्तार की परंपरा
दरगाह के खादिम मोहम्मद जावेद मोहम्मद यूसुफ ने बताया कि हजरत जानुल्लाह शाह बाबा के समय से ही दरगाह में लंगर और रमजान के दौरान इफ्तार की परंपरा चली आ रही है।
उन्होंने बताया कि 21 रमजान को हजरत अली (रज़ि.) का वफात का दिन माना जाता है। इसी वजह से हजरत जानुल्लाह शाह बाबा ने अपने दौर में जालना में 21वें रमजान के दिन बड़े पैमाने पर इफ्तार कराने की परंपरा शुरू की थी।
उनकी हयात से शुरू हुआ यह सिलसिला आज भी जारी है और हर साल हजारों लोग इस सामूहिक इफ्तार में शामिल होकर दुआ और बरकत हासिल करते हैं।
अधिक से अधिक लोगों से शामिल होने की अपील
21वें रमजान के अवसर पर होने वाले इस सामूहिक इफ्तार में अधिक से अधिक लोगों को शामिल होने की अपील दरगाह स्थित मस्जिद के इमाम हाफिज अनीस, खादिम मोहम्मद जावेद तथा शेख उरुज मैकेनिक सहित अन्य जिम्मेदारों ने की है।
उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल इफ्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मोहब्बत, भाईचारे और इंसानियत का पैगाम देने वाला धार्मिक कार्यक्रम है, जिसमें हर साल हजारों लोग शामिल होकर इबादत और दुआ में शरीक होते हैं।
रमजान और शब-ए-कद्र से जुड़ी जानकारी के लिए आप Laylatul Qadr के बारे में भी पढ़ सकते हैं।

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