जालना में रमज़ान के दौरान 7 रातों की शबीना तरावीह का विशेष आयोजन
दरगाह हज़रत सैयद अहमद शेर स्थित मस्जिद शेर सवार में पहली से सातवीं रमज़ान तक मुकम्मल क़ुरआन की तिलावत
जालना | प्रतिनिधि
रमज़ान के मुबारक महीने में हर साल की परंपरा को कायम रखते हुए इस बार भी जालना शहर में इबादत और रूहानियत से भरा विशेष आयोजन किया जा रहा है। शहर की दरगाह हज़रत सैयद अहमद शेर में स्थित मस्जिद शेर सवार में रमज़ान की पहली तारीख़ से सातवीं रमज़ान तक लगातार सात रातों की शबीना तरावीह अदा की जाएगी।
इस सात दिवसीय शबीना तरावीह में मौलाना नौशाद रज़ा क़ादरी अलीमी द्वारा क़ुरआन-ए-पाक की मुकम्मल तिलावत की जाएगी। आयोजकों के अनुसार, इन सातों रातों में पूरे क़ुरआन शरीफ़ की तिलावत पूरी की जाएगी, जिससे नमाज़ियों को विशेष सवाब और रूहानी सुकून प्राप्त होगा।

समय-सारिणी और व्यवस्थाएँ
आयोजन समिति ने नमाज़ियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए समय-सारिणी भी जारी की है।
- इशा की अज़ान: रात 8:15 बजे
- जमात: रात 8:45 बजे से
ध्वनि व्यवस्था को लेकर स्पष्ट किया गया है कि केवल तरावीह की नमाज़ के दौरान ही लाउडस्पीकर का उपयोग किया जाएगा.
अधिक से अधिक सहभागिता की अपील
दरगाह के मुतवल्ली सैयद जमील अहमद क़ादरी रज़वी और जमील मौलाना ने सभी अहले-ईमान से अपील की है कि वे बड़ी संख्या में शिरकत कर रमज़ान की बरकतें और सवाब हासिल करें।
पार्किंग और अनुशासन
व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए अकीदतमंदों से अनुरोध किया गया है कि वे अपनी गाड़ियाँ दरगाह शरीफ़ के नदी वाले गेट की ओर ही पार्क करें, जिससे आवागमन में किसी प्रकार की असुविधा न हो।
शबीना तरावीह क्या है? (जानकारी हेतु)
शबीना तरावीह में सीमित रातों के भीतर पूरे क़ुरआन की तिलावत के साथ तरावीह अदा की जाती है। इसके बारे में अधिक जानकारी आप यहाँ पढ़ सकते हैं:
- तरावीह नमाज़ – विकिपीडिया: https://hi.wikipedia.org/wiki/तरावीह
- रमज़ान का महत्व: https://en.wikipedia.org/wiki/Ramadan
यह रूहानी आयोजन न केवल इबादत का अवसर है, बल्कि आपसी भाईचारे और अनुशासन का भी संदेश देता है।
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