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मदीना मुनव्वरा की ऐतिहासिक निशानी: बाबुस्सलाम के दाहिने हिस्से पर “नून” — इस्लामी विरासत का अनमोल प्रतीक

मदीना मुनव्वरा की ऐतिहासिक निशानी: बाबुस्सलाम के दाहिने हिस्से पर “नून” — इस्लामी विरासत का अनमोल प्रतीक

मदीना मुनव्वरा: मस्जिदे-नबवी शरीफ़ के बाबुस्सलाम (Babussalam) के दाहिने हिस्से पर कुरआनी आयत में मौजूद “नून” (ن) का निशान इस्लामी इतिहास का एक जीवंत साक्ष्य माना जाता है। यह वही स्थान बताया जाता है जो ख़िलाफ़ते फ़ारूक़-ए-आज़म हज़रत उमर इब्न अल-ख़त्ताब (रज़ि.) के दौर में एक सहाबी-ए-रसूल ﷺ के मकान के पर्नाले (नाली) के नीचे स्थित था।

उस्मानी तुर्कों ने इस ऐतिहासिक निशानी को बड़े सम्मान और सावधानी से संरक्षित रखा। आज यह निशान मस्जिदे-नबवी की दीवारों पर सुनहरे अक्षरों में चमकता हुआ नज़र आता है, जो न सिर्फ़ वास्तुशिल्प की सुंदरता को दर्शाता है, बल्कि इस्लामी सभ्यता की निरंतरता और सहाबा-ए-किराम के दौर की याद को भी जीवंत रखता है।

इस तहरीर में प्रयुक्त सुलेख थुलुथ (Thuluth) और कूफ़ी (Kufi) शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो ओट्टोमन काल की कला और कुरआनी तज़ीन (सजावट) की पहचान बन चुका है। दीवार पर अंकित यह आयत कुरआन की सूरह अल-बक़रा (2:197) से है:

وَتَزَوَّدُوا فَإِنَّ خَيْرَ الزَّادِ التَّقْوَىٰ
“और यात्रा का सामान लो, पर सबसे अच्छा सामान परहेज़गारी (तक़्वा) है।”

यह आयत हर उस व्यक्ति को प्रेरित करती है जो मदीना मुनव्वरा आता है — कि सच्ची यात्रा वही है जो दिल में तक़्वा और अल्लाह की याद लेकर की जाए। बाबुस्सलाम का यह “नून” उस दौर की पवित्रता, इतिहास और आस्था की शाश्वत मिसाल है।

📅 तारीख़: 25 अक्टूबर 2025
📍 स्थान: मस्जिदे-नबवी शरीफ़, मदीना मुनव्वरा


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Rashmi Bagdi
Rashmi Bagdi is a journalist and digital content creator associated with NewsNation Online. She specializes in reporting on local news, civic issues, education, government updates, and viral stories with a reader-focused approach.

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