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NEET-UG में बड़ा बदलाव? क्या JEE जैसा टू-स्टेज फॉर्मूला खत्म करेगा पेपर लीक का संकट

कंप्यूटर द्वारा तैयार हिंदी ऑडियो

NEET-UG 2026 के पेपर लीक से शुरू हुआ विवाद अब परीक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की ओर बढ़ता दिख रहा है। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने पहली बार संकेत दिया है कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा को JEE की तरह दो चरणों और कंप्यूटर आधारित बनाया जा सकता है। लेकिन क्या इससे छात्रों की सबसे बड़ी चिंता सचमुच खत्म होगी?

पेपर लीक से सुधार की बहस तक

NEET-UG 2026 का पेपर लीक, परीक्षा रद्द होना, दोबारा परीक्षा और छात्रों का देशभर में विरोध प्रदर्शन—इन घटनाओं ने पूरी परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। इस विवाद के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे ने मामले को और राजनीतिक बना दिया। अब सरकार परीक्षा प्रणाली में संरचनात्मक बदलाव पर विचार कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने क्या कहा?

4 अगस्त 2026 को दाखिल हलफनामे में केंद्र सरकार ने बताया कि NEET-UG को पेन-पेपर मोड से कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट (CBT) में बदलने और JEE की तरह दो-चरणीय परीक्षा प्रणाली अपनाने पर सक्रिय रूप से विचार किया जा रहा है। हालांकि अंतिम फैसला नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता वाली हाई-पावर्ड टास्क फोर्स की सिफारिशों के बाद ही लिया जाएगा। फिलहाल NTA की अधिकांश बड़ी परीक्षाएं पहले से ही CBT मोड में आयोजित की जा रही हैं।

कैसे काम करेगा टू-स्टेज मॉडल?

प्रस्तावित व्यवस्था में पहला चरण NEET-Main होगा, जिसमें सभी अभ्यर्थी शामिल होंगे। इसके आधार पर सफल उम्मीदवार दूसरे चरण NEET-Advanced में पहुंचेंगे। अंतिम मेरिट दूसरे चरण के प्रदर्शन से तय होगी। इससे कम छात्रों के लिए अधिक सुरक्षित परीक्षा आयोजित करना आसान माना जा रहा है।

क्या इससे पेपर लीक पर लगेगी रोक?

विशेषज्ञों का मानना है कि CBT मोड, मल्टी-सेट प्रश्नपत्र और सीमित उम्मीदवारों वाला दूसरा चरण पेपर लीक की संभावना को काफी कम कर सकता है। साथ ही प्रिंटिंग, परिवहन और स्टोरेज से जुड़े जोखिम भी घटेंगे। हालांकि साइबर सुरक्षा, ग्रामीण छात्रों की डिजिटल पहुंच और बड़े स्तर पर तकनीकी व्यवस्था जैसी चुनौतियां अब भी मौजूद रहेंगी।

सरकार के सुरक्षा उपाय और आगे की राह

सरकार ने अदालत को बताया कि QR-कोडेड प्रश्नपत्र, GPS-टैग्ड ट्रांसपोर्ट, बायोमेट्रिक सत्यापन, फेस रिकॉग्निशन और नए कानूनी प्रावधान पहले ही लागू किए जा चुके हैं। इसके बावजूद विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल तकनीक पर्याप्त नहीं होगी। पारदर्शिता, मजबूत संस्थागत निगरानी और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई भी उतनी ही जरूरी है।

निष्कर्ष: बदलाव की शुरुआत, समाधान का अंत नहीं

NEET-UG को JEE की तरह टू-स्टेज और CBT आधारित बनाने का प्रस्ताव निश्चित रूप से सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। लेकिन केवल परीक्षा का प्रारूप बदलने से भरोसा वापस नहीं आएगा। जब तक छात्रों को निष्पक्ष व्यवस्था, मजबूत सुरक्षा तंत्र और जवाबदेह संस्थान नहीं मिलते, तब तक कोई भी मॉडल पूरी तरह सफल नहीं कहा जा सकता। असली परीक्षा अब सरकार की है कि वह छात्रों का विश्वास कितनी मजबूती से दोबारा जीत पाती है।


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Imran Siddiqui
Imran Siddiqui is a journalist based in Jalna, Maharashtra, and district representative for Navbharat (previously with Lokmat Samachar). He edits NewsNation Online, covering Jalna, Marathwada, Maharashtra and India, and ImranJalna, covering Islamic knowledge and Muslim-world news in English, Hindi and Urdu.

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