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पीएनबी घोटाला: भगोड़ा मेहुल चोकसी बेल्जियम में गिरफ्तार | 13,850 करोड़ रुपये बैंक फ्रॉड केस में बड़ी कार्रवाई

पीएनबी घोटाले का फरार आरोपी मेहुल चोकसी बेल्जियम में गिरफ्तार — मुंबई कोर्ट के वारंट पर हुई कार्रवाई

नई दिल्ली/एजेंसी।
पंजाब नेशनल बैंक (PNB) से जुड़े 13,850 करोड़ रुपये के कर्ज घोटाले के मुख्य आरोपी और भगोड़े कारोबारी मेहुल चोकसी को आखिरकार बेल्जियम पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की मांग पर बेल्जियम सरकार ने शनिवार को यह कार्रवाई की। फिलहाल मेहुल चोकसी बेल्जियम की जेल में बंद है।

पत्नी के साथ बेल्जियम में रह रहा था चोकसी

जानकारी के मुताबिक मेहुल चोकसी भारत से फरार होकर अपनी पत्नी प्रीति चोकसी के साथ बेल्जियम के एंटवर्प शहर में रह रहा था। प्रीति चोकसी के पास बेल्जियम की नागरिकता है, जबकि मेहुल चोकसी के पास ‘एफ रेसिडेंसी कार्ड’ था।

मुंबई कोर्ट के दो अरेस्ट वारंट के आधार पर गिरफ्तारी

बेल्जियम पुलिस ने मेहुल चोकसी को गिरफ्तार करते समय मुंबई की विशेष अदालत द्वारा जारी 23 मई 2018 और 15 जून 2021 के दो गिरफ्तारी वारंट का हवाला दिया।

क्या है मामला?

मेहुल चोकसी और उसके भतीजे नीरव मोदी पर पंजाब नेशनल बैंक से 13,850 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है। इस मामले में CBI और ED ने उनके खिलाफ केस दर्ज किया है। दोनों घोटाले के उजागर होने से पहले ही भारत से फरार हो गए थे।

पहले भी हो चुकी है गिरफ्तारी

2021 में मेहुल चोकसी को डोमिनिका में गिरफ्तार किया गया था, जब वह क्यूबा भागने की कोशिश कर रहा था। उस समय चोकसी ने दावा किया था कि उसके खिलाफ राजनीतिक साजिश रची गई है।

संपत्तियों की जब्ती

ED ने 2018 में चोकसी की भारत में 1,217 करोड़ रुपये की 41 संपत्तियां अस्थायी रूप से जब्त की थीं। इनमें मुंबई के पॉश इलाके में दो फ्लैट्स, कोलकाता का एक मॉल और मुंबई-गोवा हाईवे पर 27 एकड़ जमीन शामिल हैं।

निष्कर्ष

मेहुल चोकसी की गिरफ्तारी भारत सरकार के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। जल्द ही उसके भारत प्रत्यर्पण की प्रक्रिया भी तेज होने की उम्मीद है।

मेहुल चोकसी बेल्जियम में गिरफ्तार: भारत के प्रत्यर्पण प्रयासों को मिली गति

मेहुल चोकसी बेल्जियम में गिरफ्तार: भारत के प्रत्यर्पण प्रयासों को मिली गति

एंटवर्प, 13 अप्रैल 2025: पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के 13,500 करोड़ रुपये के घोटाले के मुख्य आरोपी और भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी को बेल्जियम में गिरफ्तार किया गया है। भारतीय जांच एजेंसियों के अनुरोध पर हुई इस कार्रवाई ने चोकसी के प्रत्यर्पण की संभावनाओं को मजबूती दी है। सूत्रों के अनुसार, चोकसी को 12 अप्रैल को एक अस्पताल से हिरासत में लिया गया, जहां वह कथित तौर पर कैंसर का इलाज करा रहे थे।

गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि

मेहुल चोकसी जनवरी 2018 में पीएनबी घोटाले के खुलासे से पहले भारत छोड़कर फरार हो गए थे। उनके और उनके भतीजे नीरव मोदी पर बैंक के साथ मिलकर फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) और विदेशी क्रेडिट लेटर (एफएलसी) के जरिए हजारों करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप है। भारत छोड़ने के बाद चोकसी ने एंटीगुआ और बारबुडा की नागरिकता हासिल की और बाद में 2023 में बेल्जियम में स्थायी निवास प्राप्त किया। उनकी पत्नी प्रीति चोकसी, जो बेल्जियम की नागरिक हैं, के साथ वह एंटवर्प में रह रहे थे।

मेहुल चोकसी की गिरफ्तारी

प्रत्यर्पण की प्रक्रिया और चुनौतियां

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने चोकसी की गिरफ्तारी के लिए बेल्जियम प्रशासन के साथ पिछले कई महीनों से समन्वय बनाए रखा था। भारत और बेल्जियम के बीच 1901 से चली आ रही प्रत्यर्पण संधि इस प्रक्रिया को कानूनी आधार प्रदान करती है। हालांकि, चोकसी के वकील स्वास्थ्य आधार पर जमानत और प्रत्यर्पण का विरोध करने की योजना बना रहे हैं। 2023 में इंटरपोल द्वारा रेड कॉर्नर नोटिस वापस लेने से भारत के प्रयासों को पहले झटका लगा था, लेकिन हाल की कार्रवाई ने नई उम्मीद जगाई है।

भारतीय एजेंसियों की सक्रियता

सीबीआई और ईडी ने चोकसी के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में कई चार्जशीट दाखिल की हैं। ईडी ने 2018 में उनकी 1,217 करोड़ रुपये की संपत्तियों को कुर्क किया था, जिसमें मुंबई, कोलकाता, और अन्य शहरों में अचल संपत्तियां शामिल हैं। सूत्रों का कहना है कि चोकसी बेल्जियम से स्विट्जरलैंड भागने की योजना बना रहे थे, लेकिन भारतीय एजेंसियों की त्वरित कार्रवाई ने इसे नाकाम कर दिया।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं

केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी ने इस गिरफ्तारी को “भारत की बड़ी उपलब्धि” करार देते हुए कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को दर्शाता है। वहीं, पीएनबी घोटाले के व्हिसलब्लोअर हरिप्रसाद एसवी ने चेतावनी दी कि चोकसी की संपत्ति और यूरोपीय वकीलों तक पहुंच प्रत्यर्पण को जटिल बना सकती है।

आगे की राह

चोकसी की गिरफ्तारी के बाद अब सबकी नजरें बेल्जियम की अदालतों पर टिकी हैं, जहां प्रत्यर्पण की सुनवाई होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पास मजबूत सबूत और कानूनी आधार हैं, लेकिन चोकसी की लीगल टीम द्वारा स्वास्थ्य और मानवाधिकारों के मुद्दे उठाए जाने की संभावना है। अगर प्रत्यर्पण सफल होता है, तो यह भारत के लिए आर्थिक अपराधियों को वापस लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।


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Imran Siddiqui

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