जालना: जिले में संभावित सूखे और जल संकट को देखते हुए जिला प्रशासन ने अभी से तैयारियां तेज कर दी हैं। जिलाधिकारी एवं जिला दंडाधिकारी आशिमा मित्तल ने प्रत्येक गांव का ‘वॉटर ऑडिट’ करने, सभी जलस्रोतों की गांववार मैपिंग कराने और अवैध रूप से पानी निकालने वालों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। तालाबों और बांधों से गाद निकालकर उनकी जल भंडारण क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।
सूखे की स्थिति और आने वाले महीनों में पानी की संभावित कमी को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय में आशिमा मित्तल की अध्यक्षता में दो महत्वपूर्ण समीक्षा बैठकें हुईं। इनमें निवासी उपजिलाधिकारी शशिकांत हदगल, उपजिलाधिकारी मनीषा दांडगे, जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी गहिनीनाथ कापसे सहित जल संसाधन, मृदा एवं जल संरक्षण, लघु सिंचाई, सिंचाई एवं ग्रामीण जलापूर्ति, पशुसंवर्धन, जिला परिषद जालना तथा भूजल सर्वेक्षण एवं विकास एजेंसी के अधिकारी मौजूद रहे।

बैठक में जिले के जलस्रोतों की मौजूदा स्थिति, उपलब्ध जल भंडार, पेयजल व्यवस्था, अवैध जल दोहन, पशुधन के लिए चारे की उपलब्धता और भविष्य में संभावित पानी की किल्लत पर विस्तार से समीक्षा की गई। इससे पहले भी जिले में जल संकट गंभीर रहा है। NewsNationOnline की रिपोर्ट में जालना के 561 गांवों में जल संकट और टैंकरों से जलापूर्ति की स्थिति सामने आई थी।
संकट आने का इंतजार नहीं, पहले से करें तैयारी
जिलाधिकारी मित्तल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सूखे की स्थिति गंभीर होने के बाद राहत उपाय शुरू करने के बजाय अभी से संभावित परिस्थितियों का आकलन कर तैयारी की जाए। सभी विभाग आपसी समन्वय से ऐसी कार्ययोजना बनाएं, जिससे पानी की उपलब्धता और जरूरत के बीच संतुलन कायम रखा जा सके। आने वाले समय की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उपलब्ध पानी का योजनाबद्ध और किफायती इस्तेमाल सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
अवैध जल दोहन पर लगेगी रोक
जिले के जलस्रोतों से होने वाली अवैध और अनधिकृत पानी निकासी को तत्काल रोकने के निर्देश दिए गए हैं। अनधिकृत रूप से इस्तेमाल की जा रही मोटर और पंपों की नियमित जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का जोर इस बात पर रहेगा कि सीमित जल भंडार का अनियंत्रित दोहन न हो और उपलब्ध पानी का इस्तेमाल प्राथमिकता के आधार पर किया जाए।
कुएं से जलाशय तक, हर जलस्रोत की होगी मैपिंग
जिले के प्रत्येक गांव में मौजूद कुएं, बोरवेल, तालाब, बांध, जलाशय और अन्य जलस्रोतों की गांववार मैपिंग की जाएगी। इनमें वर्तमान में कितना पानी उपलब्ध है और उनकी स्थिति क्या है, इसका विस्तृत रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इसी जानकारी के आधार पर गांवों की वर्तमान और भविष्य की पानी की जरूरत का आकलन कर जल प्रबंधन की योजना बनाई जाएगी। जालना जिला प्रशासन से जुड़ी आधिकारिक सूचनाएं जालना जिला प्रशासन की वेबसाइट पर भी उपलब्ध रहती हैं।
हर गांव का होगा ‘वॉटर ऑडिट’
प्रशासन ने गांववार ‘वॉटर ऑडिट’ को प्राथमिकता दी है। इसके तहत गांव में उपलब्ध पानी, उसकी खपत और भविष्य की संभावित जरूरत का आकलन किया जाएगा। इससे पता चलेगा कि किस गांव में कितना पानी उपलब्ध है, उसका इस्तेमाल किन कार्यों में हो रहा है और आने वाले महीनों में कितनी अतिरिक्त जरूरत पड़ सकती है। इसी आधार पर पानी की बचत और जल संरक्षण के उपाय लागू किए जाएंगे।
तालाब-बांधों से निकलेगी गाद, 250 गांवों में अभियान
तालाबों, बांधों और अन्य जलस्रोतों की जल भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए जरूरत के अनुसार गाद निकालने के निर्देश दिए गए हैं। इससे जलस्रोतों की क्षमता बढ़ाने और भविष्य में अधिक पानी संग्रहित करने में मदद मिलेगी। जल संरक्षण और बेहतर जल प्रबंधन के लिए 250 गांवों को गोद लेने की पहल को भी गति दी जाएगी। इन गांवों में जलस्रोतों के संरक्षण, पानी की बचत और जनभागीदारी पर विशेष ध्यान रहेगा।
तहसील स्तर पर होगी नियमित समीक्षा
संभावित सूखे की स्थिति पर नजर रखने के लिए प्रत्येक तहसील स्तर पर नियमित बैठकें आयोजित की जाएंगी। इनमें उपलब्ध पानी, संभावित संकट वाले क्षेत्रों और वहां किए जाने वाले उपायों की समीक्षा होगी। संबंधित विभागों को अपने-अपने क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की नियमित रिपोर्ट भी प्रशासन को देनी होगी।
स्कूली बच्चों को दिया जाएगा ‘पानी बचाओ’ का संदेश
जल संरक्षण के प्रति नई पीढ़ी को जागरूक करने के लिए स्कूलों में भी विशेष गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। शिक्षा विभाग को ‘पानी बचाएं, पानी संजोएं’ संदेश के साथ विद्यार्थियों में जल संरक्षण और पानी के जिम्मेदार इस्तेमाल के प्रति जागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
किसानों से सीधे संवाद करेगा प्रशासन
किसानों के लिए ‘किसान संवाद सभाएं’ आयोजित की जाएंगी। इनमें उपलब्ध पानी के अनुसार फसल नियोजन, सिंचाई के बेहतर तरीके, पानी का प्रभावी इस्तेमाल और जल संरक्षण जैसे विषयों पर मार्गदर्शन दिया जाएगा। किसानों को स्थानीय जल उपलब्धता को ध्यान में रखकर कृषि संबंधी निर्णय लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
पानी की स्थिति पर रहेगी जिलाधिकारी की सीधी नजर
जिले की जल स्थिति की लगातार निगरानी जिलाधिकारी स्तर से की जाएगी। सभी विभागों को निर्धारित उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने और उनकी प्रगति की नियमित जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं।
“सूखे की स्थिति बनने के बाद उपाय करने के बजाय संभावित संकट का पहले ही आकलन कर प्रतिबंधात्मक कदम उठाना जरूरी है। उपलब्ध जल भंडार का उचित नियोजन, जलस्रोतों का संरक्षण और पानी का किफायती इस्तेमाल बेहद महत्वपूर्ण है। इसमें नागरिकों की भागीदारी भी आवश्यक है।”
— जिलाधिकारी आशिमा मित्तल
जिला प्रशासन की इस कार्ययोजना का मुख्य उद्देश्य संभावित जल संकट से पहले गांव स्तर पर पानी की वास्तविक स्थिति का आकलन करना और उपलब्ध जलस्रोतों का ऐसा प्रबंधन करना है, जिससे गर्मी के महीनों में पेयजल सहित जरूरी जरूरतों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
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