रेत के शहर में सपनों का महल — एम.ए. यूसुफ अली की प्रेरक जीवनगाथा
कभी-कभी ज़िंदगी की शुरुआत इतनी छोटी होती है कि कोई यक़ीन नहीं करता कि उसी बीज से एक दिन विशाल वृक्ष उगेगा। एम.ए. यूसुफ अली की कहानी भी ऐसी ही है — केरल के एक छोटे से गाँव नाटिका में जन्मे उस युवक की, जिसने मेहनत, ईमानदारी और दुआओं के सहारे अरब के रेगिस्तान में अपनी तक़दीर लिख डाली।
🌾 केरल का छोटा सा गाँव, बड़े सपनों का जन्म
त्रिशूर ज़िले के एक साधारण परिवार में जन्मे यूसुफ अली का बचपन गरीबी में बीता। न बिजली थी, न बड़ी सुविधाएँ — लेकिन दिल में एक आग थी, कुछ कर दिखाने की। वे कहा करते हैं — “मैंने कभी गरीबी को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उसने मुझे और मज़बूत बनाया।” 1973 में उन्होंने अबू धाबी की उड़ान भरी — हाथ में कुछ कपड़े, दिल में उम्मीद और जेब में बस कुछ रुपये। वहाँ उनके चाचा का छोटा-सा किराने का व्यापार था — वहीं से शुरू हुई वह कहानी, जो आगे चलकर अरब की धरती पर लुलु ग्रुप इंटरनेशनल के नाम से चमकी।
🏬 एक दुकान से शुरू हुआ साम्राज्य
रेगिस्तान की धूप में पसीना बहाते हुए यूसुफ अली ने खुद दुकान संभाली, ग्राहकों को मुस्कान से सेवा दी, और हर दिन एक नई सीख ली। वे कहते हैं — “बिज़नेस सिर्फ़ पैसों से नहीं, भरोसे से चलता है।” उनका यही भरोसा आज 240 से ज़्यादा हाइपरमार्केट्स, मॉल्स और शॉपिंग सेंटर में झलकता है। लुलु ग्रुप आज मध्य पूर्व, एशिया, यूरोप और अफ्रीका तक फैला हुआ है। सालाना कारोबार अरबों डॉलर में है, और उनके साथ 60,000 से अधिक लोग काम करते हैं — जिनमें अधिकांश भारतीय हैं। हर उस प्रवासी भारतीय की तरह उन्होंने भी अपने देश की मिट्टी को दिल में बसाए रखा।
💖 दिल बड़ा हो, तो दुनिया छोटी लगती है
एम.ए. यूसुफ अली का जीवन सिर्फ़ बिज़नेस की कहानी नहीं, बल्कि इंसानियत का पाठ भी है। जब 2018 में केरल में भयंकर बाढ़ आई, तो उन्होंने करोड़ों रुपये दान दिए। उन्होंने अस्पताल बनवाए, गरीब बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाया, और हजारों परिवारों को रोजगार दिया। कोचीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट में उनकी हिस्सेदारी है — जो भारत का पहला पब्लिक-प्राइवेट एयरपोर्ट मॉडल है। एक बार अबू धाबी में उन्होंने एक बुज़ुर्ग कामगार को सड़क किनारे देखा। वे खुद गाड़ी रोककर उतरे, उस बुज़ुर्ग को पानी दिया और कहा — “जब मैं आया था, तब मैं भी तुम जैसा ही था। फर्क बस इतना है कि मैंने कभी रुकना नहीं सीखा।” यह एक अरबपति नहीं, बल्कि एक संवेदनशील भारतीय की पहचान है।
🌍 फोर्ब्स की सूची में, लेकिन दिल ज़मीन पर
आज एम.ए. यूसुफ अली का नाम फोर्ब्स अरबपति सूची में है। उनकी नेटवर्थ लगभग $7.3 बिलियन (₹50,000 करोड़ से अधिक) आँकी गई है। वे दुनिया के 663वें सबसे अमीर व्यक्ति हैं — लेकिन उनके व्यवहार में कभी घमंड नहीं दिखा। उनसे पूछा गया — “आपकी सबसे बड़ी उपलब्धि क्या है?” उन्होंने मुस्कराकर जवाब दिया — “जब मेरे कर्मचारी कहते हैं कि मैं उनके लिए पिता समान हूँ — वही मेरी सबसे बड़ी दौलत है।”
🌠 हर भारतीय के लिए प्रेरणा
यूसुफ अली की कहानी हर उस युवक के लिए है जो सोचता है कि “मेरे पास कुछ नहीं है।” उन्होंने साबित किया कि असली पूँजी मेहनत, विश्वास और नेक नीयत होती है। रेत की तपती ज़मीन पर उन्होंने पसीने से सपनों को सींचा, और आज वही सपने फूलों की तरह खिल रहे हैं। “सफलता का रास्ता कभी आसान नहीं होता, पर जो थकता नहीं — वही इतिहास लिखता है।”
🌺 संदेश
एम.ए. यूसुफ अली की कहानी हमें सिखाती है — कि चाहे शुरुआत कितनी भी छोटी क्यों न हो, अगर इरादा साफ़, दिल ईमानदार और मेहनत लगातार हो, तो इंसान दुनिया के किसी भी कोने में अपनी पहचान बना सकता है। आज वे सिर्फ़ एक अरबपति नहीं, बल्कि भारत की मेहनत, संस्कार और मानवता के प्रतीक हैं। उनकी यात्रा हर भारतीय को यही सिखाती है — “सपने छोटे नहीं होते, नसीब बस उन्हीं का बदलता है जो उन्हें पूरा करने की हिम्मत रखते हैं।”

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