ऑपरेशन सिंदूर के बाद उठे सवाल: अमेरिका क्यों बचाता है पाकिस्तान?
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हिंदी समाचार रिपोर्ट | http://www.newsnationonline.com
नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट | मई 2025
भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनावपूर्ण संबंधों में एक बार फिर नया मोड़ आया है। 2025 के पहलगाम आतंकी हमले और भारत की जवाबी सैन्य कार्रवाई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद उपजे हालात ने एक बार फिर अमेरिका की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं — क्या अमेरिका पाकिस्तान को आतंकवाद के बावजूद ढाल क्यों देता है?
भारत-पाक तनाव और अमेरिका की ऐतिहासिक भूमिका
1947 में विभाजन के साथ ही कश्मीर विवाद, आतंकवाद और सीमा संघर्ष जैसे मुद्दों ने भारत-पाक संबंधों में बार-बार तनाव पैदा किया। इन टकरावों में अमेरिका की भूमिका हमेशा ‘मध्यस्थ’ की रही, लेकिन अक्सर उसका झुकाव पाकिस्तान की ओर दिखाई दिया — चाहे वह 1971 का युद्ध हो या 1999 का कारगिल संघर्ष।
1971 में जब बांग्लादेश की स्वतंत्रता की लड़ाई में भारत ने निर्णायक सैन्य जीत हासिल की, तब अमेरिका ने खुले तौर पर पाकिस्तान का समर्थन करते हुए सातवीं फ्लीट बंगाल की खाड़ी में भेज दी थी। हालांकि, सोवियत संघ की कड़ी चेतावनी और भारत की कूटनीतिक तैयारी ने अमेरिका को हस्तक्षेप से रोक दिया।
2025 का ऑपरेशन सिंदूर — आतंक के खिलाफ भारत का जवाब
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आत्मघाती हमले में 26 नागरिकों की मौत के बाद, भारत ने 6-7 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पीओके में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के 9 आतंकी अड्डों पर मिसाइल हमले किए। इन हमलों में जैश सरगना मसूद अजहर के कई करीबी मारे गए।
भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने स्पष्ट किया कि “हमारा लक्ष्य केवल आतंकवादी अड्डे थे, न कि पाकिस्तानी सैन्य ठिकाने।”
अमेरिकी हस्तक्षेप और ट्रंप की मध्यस्थता
ऑपरेशन के बाद उपजे सैन्य तनाव को कम करने में अमेरिका की भूमिका एक बार फिर सामने आई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 10 मई को युद्धविराम की घोषणा की। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दोनों देशों से सीधा संवाद किया।
हालांकि भारत ने इसे एक द्विपक्षीय समझौता बताया, लेकिन कई जानकारों का मानना है कि अमेरिकी दबाव ने भारत की सैन्य पहल को सीमित कर दिया।
अमेरिका का पाकिस्तान को MMNA दर्जा — एक रणनीतिक बंधन?
पाकिस्तान को 2004 में गैर-नाटो प्रमुख सहयोगी (MNNA) का दर्जा मिला था, जिससे उसे अमेरिकी सैन्य सहायता, खुफिया साझेदारी, और वित्तीय समर्थन प्राप्त होता है। यह दर्जा पाकिस्तान को अमेरिका की रणनीतिक प्राथमिकताओं में एक ‘विशेष मोहरा’ बना देता है।
अमेरिका का पाकिस्तान प्रेम — कारण क्या हैं?
- भू-राजनीतिक स्थिति: पाकिस्तान की सीमाएं अफगानिस्तान, चीन और ईरान से लगती हैं।
- चीन का प्रभाव: CPEC परियोजनाओं के जरिए पाकिस्तान चीन के करीब है।
- परमाणु खतरा: अस्थिर पाकिस्तान और उसके परमाणु शस्त्र अमेरिका के लिए चिंता का विषय हैं।
- आतंकवाद का दोहरा खेल: अमेरिका जानता है कि पाकिस्तान आतंकवाद को पनाह देता है, फिर भी सामरिक मजबूरियों के तहत वह सहयोग बनाए रखता है।
भारत का रुख — आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस
भारत ने स्पष्ट किया है कि वह आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाएगा। भारत ने सिंधु जल संधि की समीक्षा, व्यापार बंदी, और वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान को अलग-थलग करने की नीति अपनाई है।
निष्कर्ष: क्या बदलेगा अमेरिका का रुख?
अमेरिका का रुख हमेशा संतुलन बनाने की कोशिश करता है — न भारत से संबंध खराब करना चाहता है और न पाकिस्तान को पूरी तरह छोड़ना। लेकिन भारत को अब अपनी कूटनीति को और अधिक प्रभावशाली बनाकर वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान को बेनकाब करना होगा।
लेखक: विशेष संवाददाता — http://www.newsnationonline.com
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