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‘संविधान अमर है, इसकी हत्या संभव नहीं’ — एडवोकेट धन्नावत ने ‘संविधान हत्या दिवस’ के आयोजन पर जताया विरोध

संविधान अमर है, इसकी हत्या संभव नहीं — एडवोकेट धन्नावत

‘संविधान अमर है, इसकी हत्या संभव नहीं’ — एडवोकेट धन्नावत ने ‘संविधान हत्या दिवस’ के आयोजन पर जताया कड़ा विरोध

जालना, 25 जून 2025:

जालना के प्रख्यात अधिवक्ता एडवोकेट महेश धन्नावत ने 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में मनाए जाने के खिलाफ तीव्र आपत्ति दर्ज करते हुए जिलाधिकारी कार्यालय में औपचारिक ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि इस तरह के भ्रामक और लोकतांत्रिक व्यवस्था को चोट पहुंचाने वाले आयोजनों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए।

ज्ञापन में उन्होंने स्पष्ट किया कि कुछ संगठन आपातकाल की स्मृति में 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में प्रचारित कर रहे हैं, जबकि यह न केवल ऐतिहासिक तथ्यों की गलत व्याख्या है, बल्कि संविधान जैसे जीवंत और स्थायी दस्तावेज़ का अपमान भी है।

“संविधान की हत्या नहीं हो सकती, यह अमर है। संविधान जिंदा था, तभी तो आपातकाल के बाद चुनाव संभव ही नहीं होता।” — एडवोकेट महेश धन्नावत

उन्होंने यह सुझाव दिया कि इस दिन को ‘आपातकाल विरोधी दिवस’ के रूप में मनाया जाना ज्यादा उपयुक्त होगा, जिससे इतिहास के काले अध्याय को याद करते हुए लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प लिया जा सके — परंतु ‘संविधान हत्या दिवस’ जैसे नकारात्मक और असंवैधानिक शब्दों से बचा जाना चाहिए।

एडवोकेट धन्नावत ने इस बात पर कड़ा ऐतराज जताया कि जालना जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में भी इस तरह के पोस्टर लगाए गए हैं जिनमें संविधान के खिलाफ असंवेदनशील भाषा का प्रयोग हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकारी प्रतिष्ठानों से ऐसे संदेशों का प्रसार संविधान की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है।

“भारतीय संविधान आज भी देश की लोकतांत्रिक आत्मा का आधार है। इतिहास की किसी भी घटना या त्रुटि को संविधान पर दोषारोपण करना एक गंभीर भ्रांति है।”

धन्नावत ने चेताया कि वर्तमान समय में जब समाज विचारधाराओं और राजनीतिक ध्रुवीकरण से गुजर रहा है, तब ऐसे आयोजन सामाजिक शांति और लोकतांत्रिक संतुलन को बाधित कर सकते हैं।

अंत में, उन्होंने प्रशासन से अपील की कि संविधान को लेकर सकारात्मक सोच विकसित करने हेतु संविधान जागरूकता अभियान चलाया जाए, जिससे नागरिकों में उनके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूकता बढ़े और लोकतंत्र की नींव और मजबूत हो।


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Imran Siddiqui

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