कवि अशोक नायगांवकर को ‘दुखी’ राज्य काव्य पुरस्कार, लेखिका मीनाक्षी पाटिल को ना. धों. महानोर राज्य सम्मान
जालना: दुखी’ राज्य काव्य पुरस्कार: महाराष्ट्र के साहित्यिक जगत के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए जालना स्थित स्व. नंदकिशोर साहनी चैरिटेबल ट्रस्ट और अनुभव प्रतिष्ठान ने प्रतिष्ठित ‘दुखी’ राज्य काव्य पुरस्कार के लिए इस वर्ष ठाणे के सुप्रसिद्ध कवि अशोक नायगांवकर के नाम की घोषणा की है। यह पुरस्कार प्रसिद्ध उर्दू शायर स्वर्गीय राय हरिश्चंद्र साहनी की स्मृति में प्रतिवर्ष दिया जाता है और राज्य के प्रमुख साहित्यिक सम्मानों में से एक माना जाता है।
आयोजकों के अनुसार इस वर्ष यह पुरस्कार 28वीं बार प्रदान किया जा रहा है। पुरस्कार के अंतर्गत विजेता को 25 हजार रुपये नकद राशि तथा स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया जाएगा।

इसके साथ ही इस वर्ष का ना. धों. महानोर राज्य पुरस्कार मुंबई की चर्चित कवयित्री और ललित लेखिका मीनाक्षी पाटिल को प्रदान किए जाने की घोषणा की गई है। इस पुरस्कार के तहत 10 हजार रुपये नकद और स्मृति-चिह्न प्रदान किया जाएगा।
दोनों पुरस्कारों का वितरण गुड़ी पड़वा के अवसर पर गुरुवार, 19 मार्च को शाम 7 बजे जालना में आयोजित लोकप्रिय साहित्यिक कार्यक्रम ‘कवितेचा पाडवा’ के दौरान किया जाएगा। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित अतिथि और साहित्यकार उपस्थित रहेंगे।
रविवार को आयोजित एक पत्रकार परिषद में अभय साहनी, विनीत साहनी, लेखिका एवं कवयित्री डॉ. संजीवनी तडेगांवकर तथा अनुभव प्रतिष्ठान के सचिव पंडितराव तडेगांवकर ने पुरस्कारों की औपचारिक घोषणा की।
आयोजकों ने बताया कि पुरस्कार वितरण समारोह के बाद आमंत्रित कवियों की भव्य काव्य संध्या भी आयोजित की जाएगी, जिसमें देशभर के कवि अपनी रचनाओं का पाठ करेंगे। साहित्य प्रेमियों और काव्य रसिकों से इस प्रतिष्ठित साहित्यिक आयोजन में बड़ी संख्या में उपस्थित रहने की अपील की गई है।
इससे पहले इस सम्मान से बलवंत धोंगड़े, वृषाली किन्हालकर, कैलास भाले, फ. मु. शिंदे, स्व. भगवान देशमुख, रामदास फुटाणे, इंद्रजीत भालेराव, नीरजा, मनोज बोरगांवकर, लोकनाथ यशवंत, विष्णू सूर्या वाघ, राजन गवस, प्रज्ञा दया पवार, अरुणा ढेरे, रेखा बैजल और दासू वैद्य जैसे कई प्रतिष्ठित कवियों और साहित्यकारों को सम्मानित किया जा चुका है।

समृद्ध काव्य और साहित्यिक योगदान
प्रख्यात विनोदी कवि अशोक नायगांवकर की साहित्यिक यात्रा काफी समृद्ध रही है। उनके प्रमुख कविता संग्रहों में “वाटेवरच्या कविता” (1992) और “कवितेच्या वाटेवर” (2022) शामिल हैं। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक काव्य मंचों पर अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को प्रभावित किया है। उनकी विशिष्ट ‘नायगांवकरी’ हास्य शैली मराठी काव्य मंचों पर बेहद लोकप्रिय मानी जाती है।
वहीं कवयित्री, चित्रकार और ललित लेखिका मीनाक्षी पाटिल भी समकालीन साहित्य में अपनी विशिष्ट पहचान रखती हैं। उनके कविता संग्रह “Is It In Your DNA” और “Laldyad’s Lullaby” विशेष रूप से चर्चित रहे हैं। इसके अलावा उनका समीक्षात्मक ग्रंथ “उत्तर आधुनिकता और मराठी कविता” साहित्यिक विमर्श में महत्वपूर्ण माना जाता है।
उनके अन्य कार्यों में “खानदेशी कहावतें और मुहावरे : एक लोक अध्ययन” तथा “साधना डायरी” जैसे अनूदित ग्रंथ भी प्रकाशित हो चुके हैं, जिनसे मराठी और भारतीय लोक साहित्य के अध्ययन को नई दिशा मिली है।
अधिक जानकारी के लिए महाराष्ट्र के साहित्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से संबंधित जानकारी महाराष्ट्र सरकार की आधिकारिक वेबसाइट
https://www.maharashtra.gov.in
और साहित्यिक गतिविधियों से जुड़े कार्यक्रम साहित्य अकादेमी की वेबसाइट
https://sahitya-akademi.gov.in
पर भी देखी जा सकती है।

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