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जालना में नवनगर प्रकल्प पर किसानों का तीव्र विरोध — लँडपूलिंग पद्धति पर उठे गंभीर सवाल, नगद मुआवज़े की मांग जोरों पर

जालना में नवनगर प्रकल्प पर किसानों का तीव्र विरोध — लँडपूलिंग पद्धति पर उठे गंभीर सवाल, नगद मुआवज़े की मांग जोरों पर

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समाचार रिपोर्ट | जालना | विशेष प्रतिनिधि

महाराष्ट्र राज्य रस्ते विकास महामंडळ (MSRDC) द्वारा जालना शहर के समीप जमवाडी, श्रीकृष्णनगर और गुंडेवाडी क्षेत्र में लगभग 400 हेक्टेयर भूमि पर नवनगर प्रकल्प (नोड) के तहत एक नया विकसित नगर क्षेत्र बसाने की योजना बनाई गई है। इस परियोजना की अधिसूचना वर्ष 2021 में जारी की गई थी और भूमि अधिग्रहण के लिए लँडपूलिंग पद्धति को अपनाने की योजना है।

हालांकि, यह योजना स्थानीय किसानों के भारी विरोध के कारण विवादों में घिर गई है। किसानों ने नवनगर योजना को पूरी तरह रद्द करने और उनकी जमीनों पर लगे आरक्षण को तुरंत हटाने की मांग की है। विरोध की तीव्रता ने लँडपूलिंग की वैधता और व्यावहारिकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

लँडपूलिंग क्या है?

लँडपूलिंग एक आधुनिक भूमि अधिग्रहण प्रणाली है, जिसमें किसानों को उनकी जमीन के बदले सीधे नगद भुगतान नहीं दिया जाता, बल्कि उन्हें उनके मूल भूखंड का लगभग 30% हिस्सा विकसित स्वरूप में लौटाया जाता है। शेष 70% भूमि सरकार या निजी विकासकर्ता द्वारा परियोजना हेतु प्रयोग की जाती है।

इस प्रणाली से किसानों को दीर्घकालिक लाभ की संभावना रहती है, लेकिन तत्काल आर्थिक सहायता न मिलने से किसान भविष्य को लेकर आशंकित हैं।

किसानों की चिंता: “हमारी जमीनें करोड़ों की हैं, लेकिन हमें 10 साल बाद 30% विकसित जमीन मिलेगी। तब तक हम और हमारे परिवार क्या खाएँगे? हमें रोख मुआवज़ा चाहिए।”

किसानों की स्पष्ट चेतावनी

किसानों ने इस मुद्दे पर विधायक अर्जुनराव खोतकर से मिलकर ज्ञापन देने का निर्णय लिया है। उनका स्पष्ट कहना है:

“हमें नवनगर योजना नहीं चाहिए। हमारी जमीनें हमें खाली चाहिए। यदि सरकार ने हमारी मांगें नहीं मानी, तो हम सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।”

कई किसान संगठन भी इस आंदोलन को समर्थन देने की तैयारी में हैं। रास्ता रोको और जनआंदोलन जैसे बड़े कदमों की चेतावनी दी गई है।

सरकार का पक्ष

MSRDC का कहना है कि नवनगर योजना से जालना क्षेत्र का आर्थिक और सामाजिक विकास होगा। लँडपूलिंग प्रणाली के ज़रिए किसानों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा और क्षेत्र में रोजगार की नई संभावनाएँ भी बनेंगी।

किसानों का दर्द — “हमें रोख मुआवज़ा चाहिए!”

“हमारे लिए ज़मीन ही आजीविका है। हम 10 साल कैसे जिएँगे? हमारा रोज़गार, हमारी फसलें, सब कुछ छिन जाएगा। बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च कैसे चलेगा? हमें सीधा मुआवज़ा चाहिए, विकास के नाम पर धोखा नहीं।”
— स्थानीय किसान

निष्कर्ष:

सरकार जहाँ एक ओर नवनगर के ज़रिए भविष्य का विकास देख रही है, वहीं किसानों के लिए यह योजना आजीविका पर संकट बनकर उभरी है। इस विरोध के चलते अब नवनगर प्रकल्प का भविष्य पूरी तरह किसानों के आंदोलन और सरकार की प्रतिक्रिया पर निर्भर हो गया है।


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Imran Siddiqui

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