जालना में लोकतंत्र की पाठशाला: कुबेर धन्नावत का मां के नाम पत्र बना मतदान जागरूकता की प्रेरक मिसाल
कर्तव्यनिष्ठ जिलाधिकारी आशिमा मित्तल से प्रेरित होकर बच्चों ने संभाली मतदाता जागरूकता की जिम्मेदारी
जालना:
आगामी जालना महानगरपालिका चुनावों की पृष्ठभूमि में शहर से लोकतांत्रिक चेतना को मजबूत करने वाली एक भावनात्मक और प्रेरणादायी तस्वीर सामने आई है। जिले की कर्तव्यनिष्ठ जिलाधिकारी आशिमा मित्तल की अनुकरणीय कार्यशैली से प्रेरित होकर अब जालना के बच्चे भी लोकतंत्र की अहम जिम्मेदारी—मतदान—को लेकर लोगों को जागरूक करने में आगे आ रहे हैं। इसी कड़ी में 15 वर्षीय कुबेर धन्नावत द्वारा अपनी मां के नाम लिखा गया एक भावुक पत्र इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है।
कुबेर ने अपने पत्र में न सिर्फ अपनी मां से, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से सभी नागरिकों से यह अपील की है कि वे जिम्मेदार मतदाता बनें और सोच-समझकर योग्य नगरसेवक का चुनाव करें। उसने लिखा है कि जालना को आशिमा मित्तल जैसी ईमानदार, संवेदनशील और कर्तव्यनिष्ठ प्रशासक मिली हैं, जो पूरी निष्ठा से अपने दायित्वों का निर्वहन कर रही हैं। ऐसे में अब नागरिकों की भी यह जिम्मेदारी बनती है कि वे लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए सही प्रतिनिधियों का चयन करें।
कुबेर ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासन अपने स्तर पर विकास के लिए पूरी ईमानदारी से प्रयास कर रहा है, लेकिन शहर का सर्वांगीण विकास तभी संभव है, जब नागरिक जागरूक होकर मतदान करें। उसने नए वर्ष के संकल्प के रूप में ‘मतदान का संकल्प’ लेने का आग्रह करते हुए कहा कि एक सही वोट शहर की दिशा और दशा बदल सकता है।
गौरतलब है कि जालना महानगरपालिका के चुनाव 15 जनवरी 2025 को होने हैं। चुनाव नजदीक आते ही शहर में लोकतांत्रिक माहौल तेज होता जा रहा है। इसी दौरान यह देखने में आ रहा है कि कई बच्चे अपने माता-पिता, रिश्तेदारों और पड़ोसियों से मतदान के महत्व पर बातचीत कर रहे हैं और उन्हें मतदान अवश्य करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। बच्चों की यह पहल यह दर्शाती है कि लोकतंत्र की समझ अब केवल वयस्कों तक सीमित नहीं रही, बल्कि नई पीढ़ी भी इसे गंभीरता से आत्मसात कर रही है।
शहर के जागरूक नागरिकों के बीच यह भावना भी प्रबल होती जा रही है कि आशिमा मित्तल जैसी दूरदर्शी, विकासोन्मुख और अनुशासित अधिकारियों की जालना को निरंतर आवश्यकता है, ताकि प्रशासनिक पारदर्शिता और विकास की गति बनी रहे।
कुल मिलाकर, बच्चों द्वारा शुरू की गई यह भावनात्मक और सकारात्मक मतदाता जागरूकता पहल न केवल समाज को आत्ममंथन के लिए प्रेरित कर रही है, बल्कि आने वाले चुनावों में मतदान प्रतिशत बढ़ाने की दिशा में भी इसे एक महत्वपूर्ण और प्रेरक कदम के रूप में देखा जा रहा है।

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