जालना, 11 अक्टूबर (प्रतिनिधि)। जिले में कम बारिश का असर पशु व्यापार पर भी दिखाई देने लगा है। शहर के अंबड चौफुली से मंठा चौफुली बायपास मार्ग पर बकरियों के अस्थायी ठहराव स्थल का बोरवेल सूखने से व्यापारियों के सामने पीने के पानी की व्यवस्था करने की समस्या खड़ी हो गई है। अक्टूबर में ही पैदा हुई इस स्थिति के कारण आने वाले गर्मी के महीनों को लेकर उनकी चिंता बढ़ गई है।
व्यापारियों के अनुसार, बायपास के पास खुले मैदान में कई वर्षों से बकरियों का अस्थायी पड़ाव लगता है। गुजरात के सूरत से हर सप्ताह बड़ी संख्या में बकरियां यहां लाई जाती हैं। एक से दो दिन ठहरने के बाद उन्हें तेलंगाना के निजामाबाद भेजा जाता है। अब तक इसी स्थान के बोरवेल से पानी मिल जाता था, लेकिन इस बार पानी उपलब्ध नहीं हो रहा है।
टैंकर से पानी मंगाने पर बढ़ सकता है खर्च
बोरवेल सूखने के बाद व्यापारियों को टैंकर से पानी खरीदने की जरूरत पड़ सकती है। टैंकर की उपलब्धता, कीमत और रोजाना पानी की जरूरत पूरी करने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। व्यापारियों का कहना है कि पशुओं की खरीद-बिक्री और परिवहन पर पहले ही खर्च होता है। पानी के लिए अतिरिक्त भुगतान करना पड़ा तो कारोबार की लागत और बढ़ेगी।

गर्मी के महीनों के लिए अभी से चिंता
व्यापारियों का सवाल है कि अक्टूबर में ही पानी की कमी होने पर आगे के आठ से नौ महीने कैसे निकलेंगे। गर्मियों में पानी की मांग बढ़ने की आशंका को देखते हुए वे भरोसेमंद वैकल्पिक जलस्रोत की जरूरत बता रहे हैं। हालांकि पूरे जिले में सूखे की स्थिति और भूजल स्तर का आकलन आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर किया जाना चाहिए।
पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था की जरूरत
व्यापारियों ने पशुओं के ठहराव वाले स्थानों पर पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने की अपेक्षा जताई है। स्थानीय प्रशासन जरूरत का आकलन करके वैकल्पिक जलस्रोत और आवश्यकतानुसार टैंकर की व्यवस्था पर विचार कर सकता है। बकरियों के लिए नियमित पानी उपलब्ध कराना फिलहाल व्यापारियों की सबसे बड़ी चुनौती है।
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- महाराष्ट्र भूजल सर्वेक्षण एवं विकास यंत्रणा की आधिकारिक वेबसाइट
- जालना जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट
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