जालना: कमजोर मानसून के चलते जालना जिले में जलसंकट की आशंका बढ़ गई है। जिले के सात मध्यम और 60 लघु सिंचाई प्रकल्पों में कुल जलभंडारण घटकर महज 9.69 प्रतिशत रह गया है। दो जलाशय पूरी तरह सूख चुके हैं, जबकि 45 का जलस्तर न्यूनतम उपयोगी सीमा से नीचे पहुंच गया है। जलाशयों में घटती उपलब्धता से आने वाले महीनों में पेयजल आपूर्ति और कृषि सिंचाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
लघु सिंचाई विभाग की 8 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, जिले के सभी 67 प्रकल्पों में कुल 23.94 मिलियन घनमीटर पानी उपलब्ध है। सात मध्यम प्रकल्पों में 9.94 मिलियन घनमीटर यानी 15.11 प्रतिशत और 60 लघु जलाशयों में 14 मिलियन घनमीटर यानी 7.72 प्रतिशत जलभंडारण दर्ज किया गया है।
पिछले साल लबालब, इस बार मध्यम प्रकल्पों में 15.11 प्रतिशत पानी
पिछले वर्ष 8 अक्टूबर को जिले के सभी सात मध्यम प्रकल्प भरे हुए थे। इस वर्ष इनका औसत जलभंडारण 15.11 प्रतिशत है। जालना तहसील के कल्याण गिरिजा प्रकल्प में 40.74 प्रतिशत और कल्याण मध्यम प्रकल्प में 37.07 प्रतिशत पानी दर्ज हुआ है। बदनापुर के अपर दुधना में 11.17 प्रतिशत, जबकि भोकरदन के जुई प्रकल्प में केवल 1.89 प्रतिशत जलभंडारण है।
भोकरदन का धामना और जाफराबाद का जीवरेखा प्रकल्प न्यूनतम उपयोगी जलस्तर से नीचे हैं। अंबड तहसील का गल्हाटी मध्यम प्रकल्प पूरी तरह सूख चुका है।
60 लघु प्रकल्पों में से 43 न्यूनतम उपयोगी सीमा से नीचे
जिले के 60 लघु प्रकल्पों में से 43 का जलस्तर न्यूनतम उपयोगी सीमा से नीचे पहुंच गया है। घनसावंगी तहसील का दहेगांव जलाशय पूरी तरह सूख चुका है। अंबड, घनसावंगी, मंठा, परतूर, जालना, बदनापुर, भोकरदन और जाफराबाद तहसीलों के कई प्रकल्पों में पानी की भारी कमी है।
कम जलभंडारण वाले प्रकल्पों में खडकेश्वर, टाका, लासुरा, सुखापुरी, जांबसमर्थ, पाटोदा, पोखरी, सारवाडी, दरेगांव, नेर, राजेवाडी, प्रल्हादपुर और चिंचखेडा सहित अन्य जलाशय शामिल हैं। सात मध्यम प्रकल्पों में से दो और 60 लघु प्रकल्पों में से 43 के न्यूनतम उपयोगी सीमा से नीचे होने के कारण कुल संख्या 45 है।
पेयजल और सिंचाई पर बढ़ सकता है दबाव
जलाशयों में सीमित पानी बचने से ग्रामीण क्षेत्रों की पेयजल व्यवस्था और किसानों की सिंचाई जरूरतों पर दबाव बढ़ने की आशंका है। विशेष रूप से जलाशयों पर निर्भर गांवों में आगामी महीनों में पानी की उपलब्धता चुनौती बन सकती है। हालांकि वास्तविक आपूर्ति पर असर स्थानीय जलस्रोतों, भूजल, मांग और प्रशासन की व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
जलसंरक्षण और अग्रिम योजना की जरूरत
जलसंकट की आशंका के बीच उपलब्ध पानी का नियोजन, जलसंरक्षण और संभावित पेयजल समस्या से निपटने की तैयारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे पहले जालना प्रशासन की जलसंरक्षण संबंधी अपील और जलाशयों की निगरानी एवं अवैध जलनिकासी रोकने के प्रयास पर भी रिपोर्ट प्रकाशित की गई थी।
शहर की जलापूर्ति से संबंधित जानकारी के लिए जालना में पानी की शिकायत कहां करें पढ़ें। जलसंसाधन से जुड़े सरकारी संदर्भ महाराष्ट्र जलसंपदा विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।
आंकड़ों का आधार: लघु सिंचाई विभाग की 8 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट, जैसा कि उपलब्ध स्थानीय समाचार विवरण में दिया गया है। फीचर्ड इमेज सांकेतिक इन्फोग्राफिक है, किसी विशिष्ट जलाशय की वास्तविक तस्वीर नहीं।
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