जालना (प्रतिनिधि)। जालना जिले में कम बारिश और सूखे से खरीफ की फसलों को नुकसान होने की खबरों के बीच मौसंबी उत्पादकों के लिए बाजार से राहत का संकेत मिला है। स्थानीय मंडी संबंधी रिपोर्ट के अनुसार, जालना कृषि उपज बाजार समिति में अच्छी गुणवत्ता की मौसंबी का भाव 21 से 22 हजार रुपये प्रति टन तक बताया गया है। चुनिंदा बेहतर माल को 23 हजार रुपये प्रति टन तक कीमत मिलने की जानकारी है। हालांकि, यह भाव सभी उत्पादकों या हर किस्म के फल पर लागू नहीं होता।
आवक कम होने से क्यों बढ़े भाव?
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले महीने मौसंबी को करीब 18 हजार रुपये प्रति टन भाव मिल रहा था। इसके बाद मंडी में आवक बढ़ने से कीमतों पर दबाव बना, लेकिन अब आपूर्ति घटने और मांग बने रहने से फिर तेजी दिखाई दी है। व्यापारियों की खरीद में फलों का आकार, गुणवत्ता, छंटाई और बाजार में उपलब्ध मात्रा अहम भूमिका निभाते हैं। 18 हजार से 22 हजार रुपये की तुलना में प्रति टन करीब चार हजार रुपये का अंतर है; यह दो अलग अवधियों के बताए गए भावों की तुलना है, किसी एक किसान की सुनिश्चित कमाई नहीं।
अंबड और घनसावंगी के किसानों ने कैसे बचाए बाग?
कम बारिश के कारण बागों के लिए पानी जुटाना चुनौती बना रहा। खासकर अंबड और घनसावंगी तहसीलों के कुछ उत्पादकों ने उपलब्ध जलस्रोतों का सावधानी से इस्तेमाल कर पेड़ों को बचाने की कोशिश की। ऐसे बागों से निकलने वाला फल अब बाजार तक पहुंच रहा है। दूसरी ओर, जिन खेतों में पर्याप्त पानी नहीं मिला, वहां उत्पादन और गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। जिले में खरीफ फसलों को नुकसान और राहत संबंधी कार्रवाई का उल्लेख स्थानीय रिपोर्ट में है; सूखा अधिसूचना और पंचनामों की अद्यतन सरकारी स्थिति अलग से जांची जानी चाहिए।
फलों के झड़ने से बढ़ी चिंता
मंडी में बेहतर भाव मिलने के बावजूद कई उत्पादकों की परेशानी समाप्त नहीं हुई है। स्थानीय जानकारी के अनुसार, कुछ मौसंबी बागों में फल समय से पहले झड़ रहे हैं। जमीन पर गिरे फल बिक्री योग्य पैदावार घटा सकते हैं। कम उपज होने पर प्रति टन ऊंची कीमत मिलने के बावजूद कुल बिक्री आय सीमित रह सकती है। किसानों के लिए सिंचाई, बाग प्रबंधन, खाद और अन्य खर्चों की भरपाई करना भी जरूरी है।
कृषि विभाग से क्या मांग है?
उत्पादकों ने कृषि विभाग से फल झड़ने के कारणों की जांच और समय पर तकनीकी मार्गदर्शन देने की मांग की है। फल झड़ने के पीछे पानी का तनाव, मौसम, पोषण, कीट या रोग सहित अलग-अलग कारण हो सकते हैं; किसी खास बाग में कारण जांच के बिना तय नहीं किया जा सकता। किसान अपने नजदीकी कृषि अधिकारी या कृषि विज्ञान केंद्र से बाग की वास्तविक स्थिति के अनुसार सलाह लें।
दाम बढ़ने का किसानों को कितना फायदा?
मौसंबी की कीमत में तेजी उन किसानों के लिए सहारा बन सकती है जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में बाग बचाए हैं। फिर भी किसानों की वास्तविक आय केवल मंडी भाव पर निर्भर नहीं करती। पेड़ पर बचे फलों की मात्रा, बिक्री योग्य गुणवत्ता, तुड़ाई, ढुलाई, कमीशन और दूसरे खर्च भी अंतिम आमदनी तय करते हैं। इसलिए ऊंचे भाव और संभावित उत्पादन हानि को एक साथ समझना जरूरी है।
मंडी भाव और कृषि जानकारी कहां देखें?
मंडी दरों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए केंद्र सरकार के एगमार्कनेट पोर्टल पर उपलब्ध कृषि बाजार आंकड़े देखे जा सकते हैं। महाराष्ट्र कृषि विपणन से संबंधित जानकारी महाराष्ट्र राज्य कृषि विपणन बोर्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध है। बागवानी योजनाओं और तकनीकी जानकारी के लिए राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड उपयोगी संदर्भ है। ये पोर्टल इस रिपोर्ट में उद्धृत विशिष्ट मंडी भाव की स्वतंत्र पुष्टि के रूप में प्रस्तुत नहीं किए जा रहे हैं।
जालना में सूखे और मंडी की दूसरी खबरें
जिले में खेती पर सूखे के असर की पृष्ठभूमि समझने के लिए पढ़ें: सूखे से प्रभावित फसलों का हाल जानने खेतों में पहुंचे विधायक अर्जुन खोतकर। कृषि बाजार के अन्य रुझानों के लिए देखें: जालना मंडी में सोयाबीन-ज्वार की आवक और अरहर के भाव।
संपादकीय सूचना: इस रिपोर्ट में दिए गए मौसंबी के भाव स्थानीय स्रोत सामग्री पर आधारित हैं। मंडी में दैनिक कीमतें बदल सकती हैं। समाचार के साथ प्रयुक्त चित्र प्रतीकात्मक रूप से तैयार किया गया है।
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