नई दिल्ली, 14 अक्टूबर 2026। बंगाल की खाड़ी क्षेत्र के सात देशों ने आतंकवाद, साइबर अपराध, मानव तस्करी और मादक पदार्थों की तस्करी से निपटने के लिए आपसी सहयोग मजबूत करने पर सहमति जताई है। भारत की मेजबानी में 13 अक्टूबर को आयोजित बिम्सटेक (BIMSTEC) गृह मंत्रियों की पहली बैठक में दिल्ली घोषणा-पत्र स्वीकार किया गया। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की।
कौन से सात देश शामिल हुए?
बिम्सटेक में भारत, बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड शामिल हैं। संगठन दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच सहयोग का महत्वपूर्ण मंच है। बैठक में सदस्य देशों ने क्षेत्र की सुरक्षा चुनौतियों को साझा समस्या मानते हुए कानून के दायरे में समन्वित कार्रवाई की जरूरत बताई।
दिल्ली घोषणा-पत्र में क्या तय हुआ?
घोषणा-पत्र में आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद की निंदा की गई। सदस्य देशों ने आतंकवाद के वित्तपोषण, कट्टरपंथ, संगठित अपराध, हथियारों की तस्करी, साइबर अपराध, धन शोधन और मानव तस्करी के विरुद्ध सहयोग बढ़ाने का संकल्प दोहराया। घोषणा में संप्रभु समानता, क्षेत्रीय अखंडता, राजनीतिक स्वतंत्रता और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने जैसे सिद्धांतों पर भी जोर दिया गया।
ऑनलाइन ठगी और मानव तस्करी पर विशेष चिंता
बैठक में एक गंभीर चुनौती पर ध्यान दिया गया: आपराधिक नेटवर्क लोगों को तस्करी के जरिए ऑनलाइन धोखाधड़ी केंद्रों तक पहुंचाते हैं और फिर उन्हें जबरन साइबर अपराध करने के लिए मजबूर करते हैं। घोषणा-पत्र में ऐसे पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा, बचाव, स्वदेश वापसी और पुनर्वास के लिए देशों के बीच सहयोग की आवश्यकता बताई गई।
ड्रग्स और अवैध धन प्रवाह पर सहयोग
सदस्य देशों ने मादक पदार्थों और उनके निर्माण में उपयोग होने वाले रसायनों की अवैध तस्करी रोकने, धन शोधन के खिलाफ क्षमता बढ़ाने और वित्तीय अपराधों की जांच में जानकारी साझा करने के उपायों पर जोर दिया। गृह मंत्रालय के अनुसार बैठक में ड्रग नियंत्रण कार्ययोजना और धन शोधन व आतंकी वित्तपोषण से निपटने के लिए क्षमता निर्माण संबंधी समझौता ज्ञापन को भी मंजूरी दी गई।
क्या सभी प्रस्ताव तुरंत कानून बन गए?
नहीं। किसी अंतरराष्ट्रीय बैठक में घोषणा-पत्र अपनाना और अलग-अलग देशों में कानूनी प्रावधान लागू होना अलग प्रक्रियाएं हैं। दिल्ली घोषणा-पत्र ने कुछ लंबित समझौतों को जल्द अंतिम रूप देने और मौजूदा समझौतों को प्रभावी ढंग से लागू करने की अपील की है। इसलिए इसे सभी देशों में एक समान नया आपराधिक कानून लागू हो जाने के रूप में नहीं पढ़ना चाहिए।
प्राकृतिक आपदाओं से निपटने पर भी जोर
बैठक में बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं के लिए साझा तैयारी, शुरुआती चेतावनी, संयुक्त अभ्यास और सूचना आदान-प्रदान पर सहयोग की बात हुई। गृह मंत्री अमित शाह ने गुजरात के जामनगर में प्रस्तावित बिम्सटेक आपदा प्रबंधन केंद्र का भी उल्लेख किया। यह क्षेत्र चक्रवात, बाढ़ और अन्य आपदाओं से प्रभावित होता रहा है।
भारत के लिए इसका महत्व
भारत के लिए पड़ोसी देशों के साथ सीमा-पार अपराध, साइबर ठगी, अवैध धन प्रवाह और आपदा प्रबंधन पर बेहतर समन्वय सुरक्षा और आर्थिक गतिविधियों दोनों से जुड़ा विषय है। हालांकि घोषणा-पत्र के वास्तविक परिणाम इस बात पर निर्भर करेंगे कि सदस्य देश आगे किस गति से कार्ययोजनाएं लागू करते हैं।
आगे क्या होगा?
घोषणा-पत्र ने बिम्सटेक के संबंधित कार्यसमूहों को निर्णयों के क्रियान्वयन पर काम करने को कहा है। सदस्य देशों ने भविष्य में गृह मंत्रियों की नियमित बैठकों की प्रतिबद्धता भी जताई है। अगले चरण में समझौतों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और सूचना साझा करने की व्यवस्थाओं पर ठोस प्रगति देखनी होगी।
आधिकारिक स्रोत: गृह मंत्रालय: दिल्ली घोषणा-पत्र का पूरा पाठ; गृह मंत्रियों की बैठक पर आधिकारिक जानकारी। संबंधित राष्ट्रीय खबरों के लिए इंडिया न्यूज देखें।
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