नई दिल्ली, 14 अक्टूबर 2026। भारत की स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता 30 सितंबर 2026 तक 59.20 गीगावाट पहुंच गई है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने चेन्नई में 8 अक्टूबर को आयोजित विंडरजी इंडिया 2026 सम्मेलन में यह जानकारी देते हुए वर्ष 2030 तक 100 गीगावाट पवन ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य दोहराया। यह खबर पिछले सप्ताह हुए सम्मेलन में जारी नवीनतम उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों पर आधारित है।
एक साल में रिकॉर्ड नई क्षमता
मंत्रालय के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में देश में 6.05 गीगावाट नई पवन ऊर्जा क्षमता स्थापित हुई, जो अब तक का सर्वोच्च वार्षिक स्तर है। मंत्री ने विश्वास जताया कि वित्त वर्ष 2026-27 में यह रिकॉर्ड पार हो सकता है। हालांकि यह भविष्य का अनुमान है, उपलब्धि की पुष्टि नहीं।
100 गीगावाट लक्ष्य कितना दूर?
सितंबर अंत की 59.20 गीगावाट क्षमता के आधार पर 100 गीगावाट तक पहुंचने के लिए करीब 40.80 गीगावाट और स्थापित क्षमता की आवश्यकता होगी। यह साधारण गणना है। लक्ष्य तक पहुंचना परियोजनाओं की समय पर स्थापना, भूमि, बिजली नेटवर्क और निवेश पर निर्भर करेगा।
विंडरजी इंडिया 2026 में क्या हुआ?
चेन्नई ट्रेड सेंटर में 7 से 9 अक्टूबर तक आयोजित कार्यक्रम में 20 से अधिक देशों के करीब 400 प्रदर्शकों और लगभग 500 प्रतिनिधियों की भागीदारी बताई गई। डेनमार्क, जर्मनी और स्पेन के विशेष मंडप भी शामिल थे। कार्यक्रम में पवन टरबाइन, निर्माण, तकनीकी सहयोग और परियोजना संचालन पर चर्चा हुई।
अंतरराष्ट्रीय समझौते और नई रिपोर्ट
कार्यक्रम में भारतीय पवन टरबाइन निर्माता संघ से जुड़े वैश्विक समझौते और सहयोग की घोषणाएं हुईं। ‘एनर्जी ट्रांजिशन इन तमिलनाडु’ और ‘रीइमैजिनिंग कॉन्ट्रैक्चुअल मैकेनिज्म फॉर इंडियन विंड सेक्टर’ शीर्षक वाली रिपोर्ट भी जारी की गईं। किसी समझौते की घोषणा को तुरंत नई बिजली उत्पादन क्षमता शुरू होने के समान नहीं माना जाना चाहिए।
पवन ऊर्जा क्यों जरूरी है?
पवन ऊर्जा जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने में मदद कर सकती है और बिजली के स्रोतों में विविधता लाती है। लेकिन हवा की उपलब्धता मौसम और स्थान के अनुसार बदलती है। इसलिए मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क, ऊर्जा भंडारण और बिजली व्यवस्था का संतुलन भी महत्वपूर्ण है।
महाराष्ट्र के लिए क्या मायने?
महाराष्ट्र में भी नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं, उपकरण निर्माण और तकनीकी प्रशिक्षण के अवसर हो सकते हैं। हालांकि चेन्नई सम्मेलन में बताए गए राष्ट्रीय 59.20 गीगावाट आंकड़े को महाराष्ट्र की स्थापित क्षमता समझना गलत होगा। राज्य-विशिष्ट निवेश और रोजगार संबंधी दावों के लिए अलग आधिकारिक विवरण जरूरी हैं।
आगे किन बातों पर नजर रहेगी?
वित्त वर्ष 2026-27 में नई परियोजनाओं की स्थापना, ट्रांसमिशन सुविधा, घरेलू उपकरण निर्माण और वास्तविक बिजली उत्पादन के आंकड़े महत्वपूर्ण रहेंगे। स्थापित क्षमता और वास्तव में उत्पादित बिजली अलग माप हैं, इसलिए दोनों का मूल्यांकन अलग-अलग किया जाना चाहिए।
स्रोत: नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, 8 अक्टूबर 2026; विंडरजी इंडिया आधिकारिक वेबसाइट। संबंधित खबर: विश्व मानक दिवस 2026 और स्वच्छ ऊर्जा।
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