जालना, 14 अक्टूबर 2026। जिले में सूखे के बीच चारे और पानी की कमी ने पशुपालकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। 13 अक्टूबर को एनडीटीवी मराठी की जालना के नवा मोंढा पशु बाजार से प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार कुछ किसानों को मवेशी बेचने की नौबत आ गई है, लेकिन बाजार में खरीदार कम हैं और व्यापारी अपेक्षा से काफी कम कीमत लगा रहे हैं। यह तस्वीर किसानों के सामने फसल नुकसान के साथ पशुधन बचाने की दोहरी चुनौती को दिखाती है।
नवा मोंढा बाजार में किसानों की परेशानी
रिपोर्ट में बताया गया कि चारा-पानी की कमी से परेशान किसान पशु लेकर बाजार पहुंच रहे हैं। कुछ पशुओं के लिए आधी कीमत तक की पेशकश की जा रही है। यह बाजार से मिली पत्रकारिता-आधारित जानकारी है; पूरे जिले के प्रत्येक पशु बाजार में कीमतें आधी हो गई हैं, ऐसा निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए।
पहले भी सामने आया था संकट
हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में घनसावंगी तालुका के किसान गोरख चव्हाण का उल्लेख है, जो बैल बेचने परभणी के साप्ताहिक बाजार पहुंचे, लेकिन खरीदार न मिलने पर लौटना पड़ा। उनके खेतों में सोयाबीन और मक्का की फसल प्रभावित हुई थी। इस तरह पशुधन की बिक्री किसानों के लिए आर्थिक मजबूरी बनती जा रही है।
चारे की निकासी पर पहले से पाबंदी
जिले के आठ तालुकों में सूखे की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने सितंबर के अंत में जिले की सीमा से बाहर हरे और सूखे चारे के परिवहन और बिक्री पर प्रतिबंध लगाया था। यह उपाय स्थानीय उपलब्धता बनाए रखने के लिए घोषित किया गया था, लेकिन पशुपालकों की तत्काल जरूरतों को पूरा करने के लिए चारे की आपूर्ति और पेयजल व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है।
प्रशासन ने गांवों में संवाद शुरू किया
11 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक जिला प्रशासन ने किसानों की समस्याएं सुनने के लिए गांवों में संवाद पहल शुरू की है। कृषि सहायक, तलाठी और पुलिस पाटिल की टीमों को किसानों से संपर्क करने की जिम्मेदारी दी गई है। किसानों ने पीने के पानी, पशु चारे और कर्ज के दबाव को प्रमुख चिंता बताया है।
किसानों की प्रमुख मांग क्या है?
प्रभावित क्षेत्रों में चारा छावनियों, पशुओं के लिए पानी और समय पर सहायता की मांग उठ रही है। पशुधन केवल बिक्री की संपत्ति नहीं, बल्कि खेती, दूध उत्पादन और परिवार की नियमित आय का आधार भी होता है। मजबूरी में पशु बेचने से भविष्य की आजीविका प्रभावित हो सकती है।
किसानों के लिए जरूरी जानकारी
पशुपालक स्थानीय ग्राम पंचायत, तहसील कार्यालय और पशुसंवर्धन विभाग से उपलब्ध सहायता तथा सरकारी आदेशों की पुष्टि करें। चारा परिवहन पर लागू नियमों का उल्लंघन करने से बचें। पशु स्वास्थ्य में गिरावट या पानी की गंभीर कमी होने पर स्थानीय पशु चिकित्सक से सलाह लें।
स्रोत: एनडीटीवी मराठी की 13 अक्टूबर की ग्राउंड रिपोर्ट; हिंदुस्तान टाइम्स; किसान तक। पहले की रिपोर्ट: जालना में चारे का संकट।
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