नई दिल्ली, 14 अक्टूबर 2026। भारत और कनाडा ने दालों से प्रोटीन तैयार करने, खाद्य प्रसंस्करण और पोषण संबंधी अनुसंधान में सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। हरियाणा के कुंडली स्थित राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (निफ्टेम-के) में 13 अक्टूबर को आयोजित गोलमेज बैठक में दोनों देशों के सरकारी प्रतिनिधियों, वैज्ञानिकों, विश्वविद्यालयों और उद्योग संगठनों ने संयुक्त अनुसंधान तथा प्रस्तावित उत्कृष्टता केंद्र की रूपरेखा पर चर्चा की।
एक साल में उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य
निफ्टेम-के के निदेशक डॉ. हरिंदर सिंह ओबेरॉय ने कहा कि संस्थान और कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ सस्केचेवान के बीच हुए समझौते को ठोस परिणामों में बदलने की जरूरत है। उनका लक्ष्य अगले एक साल के भीतर निफ्टेम-के में संयुक्त उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की दिशा में काम करना है। यह समयबद्ध लक्ष्य है; केंद्र के पूरी तरह शुरू हो जाने की घोषणा नहीं हुई है।
किन मुद्दों पर होगी रिसर्च?
बैठक में दालों से प्रोटीन निकालने की तकनीक, प्रसंस्करण के दौरान ऊर्जा की खपत, कच्चे माल की गुणवत्ता में एकरूपता, प्रोटीन के गुण बनाए रखने और नए खाद्य उत्पाद विकसित करने पर चर्चा हुई। वैज्ञानिकों ने यह भी रेखांकित किया कि प्रयोगशाला में सफल तकनीक को बड़े पैमाने पर किफायती उत्पादन में बदलना अलग चुनौती है।
छात्रों और शोधकर्ताओं को क्या अवसर मिल सकते हैं?
दोनों संस्थानों ने संयुक्त शोध परियोजनाओं, प्रकाशनों, पीएचडी कार्यक्रम, छात्र और शिक्षकों के आदान-प्रदान, प्रशिक्षण तथा साझा वित्तपोषण की संभावनाओं पर विचार किया। यूनिवर्सिटी ऑफ सस्केचेवान के उपाध्यक्ष (अनुसंधान) डॉ. बलजीत सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय ने कुछ पीएचडी शोधार्थियों की पहचान की है जो अपने शोध का एक हिस्सा निफ्टेम-के में करेंगे। इन संभावनाओं को सभी छात्रों के लिए तत्काल प्रवेश या छात्रवृत्ति की घोषणा नहीं समझना चाहिए।
कनाडा से कौन शामिल हुआ?
बैठक में कनाडा के सस्केचेवान प्रांत के उन्नत शिक्षा मंत्री केन चेवेलडेऑफ शामिल हुए। यूनिवर्सिटी ऑफ सस्केचेवान, पल्स कनाडा और विभिन्न उद्योग तथा अनुसंधान संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। भारतीय पक्ष से आईसीएआर-भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, इक्रिसैट, आईआईटी दिल्ली और अन्य संगठनों की भागीदारी रही।
दाल उत्पादकों के लिए इसका महत्व
दालें भारतीय भोजन में प्रोटीन का प्रमुख स्रोत हैं। यदि नई प्रसंस्करण तकनीकें व्यावसायिक रूप से सफल होती हैं तो दाल आधारित खाद्य सामग्री में मूल्य संवर्धन के अवसर बढ़ सकते हैं। इससे कृषि और खाद्य उद्योग के बीच नए संबंध बन सकते हैं, हालांकि किसानों को कितनी अतिरिक्त कीमत मिलेगी, इसका अनुमान अभी उपलब्ध नहीं है।
पोषण पर भी जोर
बैठक में दालों के पोषण मूल्य और पौधों से प्राप्त प्रोटीन के उपयोग पर चर्चा हुई। डॉ. बलजीत सिंह ने बताया कि मसूर के पोषण संवर्धन से जुड़ा एक संयुक्त प्रस्ताव कनाडा सरकार से वित्तपोषण के लिए प्रस्तुत किया गया है। प्रस्ताव प्रस्तुत होना और वित्तपोषण स्वीकृत होना अलग बातें हैं।
मार्च में हुआ था समझौता
निफ्टेम-के और यूनिवर्सिटी ऑफ सस्केचेवान ने मार्च 2026 में खाद्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। अक्टूबर की बैठक का उद्देश्य उसी साझेदारी को प्राथमिकताओं, जिम्मेदारियों और समयसीमा वाली कार्ययोजना में बदलना है।
आगे क्या होगा?
दोनों पक्षों को पहले दो वर्षों के लिए शोध प्राथमिकताएं तय करनी हैं। प्रस्तावित उत्कृष्टता केंद्र, संयुक्त परियोजनाओं और उद्योग भागीदारी की वास्तविक प्रगति भविष्य की घोषणाओं से स्पष्ट होगी।
आधिकारिक स्रोत: खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की 13 अक्टूबर की विज्ञप्ति; मार्च 2026 का समझौता। संबंधित समाचार: खाद्य महंगाई पर रिपोर्ट।
Discover more from NewsNation Online
Subscribe to get the latest posts sent to your email.


























Leave a Reply