नई दिल्ली, 14 अक्टूबर 2026। भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी), रांची में एक छात्र की मृत्यु के मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की है। मंत्रालय ने 13 अक्टूबर को जारी आधिकारिक बयान में कहा कि समिति घटना की परिस्थितियों के साथ-साथ संस्थान में विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं, काउंसलिंग, मार्गदर्शन और शिकायत निवारण व्यवस्था की समीक्षा करेगी।
जांच समिति की अध्यक्ष कौन हैं?
समिति की अध्यक्ष दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस की निदेशक प्रोफेसर रजनी अब्बी हैं। एक वरिष्ठ मनोचिकित्सक और शिक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी को समिति का सदस्य बनाया गया है। मंत्रालय ने जांच के लिए किसी निष्कर्ष या जिम्मेदार व्यक्ति का नाम पहले से घोषित नहीं किया है।
जांच किन पहलुओं पर होगी?
आधिकारिक आदेश के अनुसार समिति घटना की परिस्थितियों की जांच करेगी और संस्थान में लागू दिशा-निर्देशों की वास्तविक स्थिति का आकलन करेगी। विशेष रूप से बुनियादी सुविधाओं, संस्थागत सहायता प्रणाली, काउंसलिंग और मेंटरिंग, तथा छात्र शिकायत निवारण व्यवस्था के कामकाज पर ध्यान दिया जाएगा।
छात्रों और कर्मचारियों से भी संवाद
समिति आवश्यकतानुसार संबंधित पक्षों से बातचीत करेगी और दस्तावेजों की जांच करेगी। इसका उद्देश्य केवल घटना के तत्काल पहलुओं को देखना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्थागत कमियों की पहचान करना भी है जिन्हें दूर करने से भविष्य में विद्यार्थियों के कल्याण को मजबूत किया जा सके।
मंत्रालय ने अंतरिम व्यवस्था का भी उल्लेख किया
शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि संस्थान के सुचारु संचालन और विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त अंतरिम प्रशासनिक व्यवस्था की जा रही है। मंत्रालय ने सार्वजनिक बयान में किसी अंतिम जांच रिपोर्ट या दोष निर्धारण की घोषणा नहीं की है। इसलिए सोशल मीडिया पर चलने वाले अपुष्ट आरोपों को जांच का परिणाम नहीं माना जाना चाहिए।
कॉलेजों में काउंसलिंग और शिकायत व्यवस्था क्यों महत्वपूर्ण?
उच्च शिक्षा संस्थानों में विद्यार्थियों को शैक्षणिक दबाव, रहने की व्यवस्था, आर्थिक कठिनाइयों और व्यक्तिगत समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। भरोसेमंद काउंसलिंग, समय पर मार्गदर्शन और निष्पक्ष शिकायत निवारण से मदद मांगना आसान हो सकता है। हालांकि किसी एक घटना के कारणों के बारे में जांच पूरी होने से पहले अनुमान लगाना अनुचित होगा।
अभिभावक और विद्यार्थी क्या कर सकते हैं?
विद्यार्थियों को संस्थान की आधिकारिक छात्र सहायता सेवाओं, मेंटर, छात्र कल्याण अधिकारी और शिकायत समिति की संपर्क जानकारी अपने पास रखनी चाहिए। अभिभावक भी नियमित संवाद बनाए रखें और गंभीर परेशानी सामने आने पर प्रशिक्षित पेशेवर तथा संस्थागत सहायता का सहारा लें। तत्काल संकट की स्थिति में स्थानीय आपातकालीन सेवाओं से संपर्क करना चाहिए।
आगे क्या होगा?
समिति संबंधित रिकॉर्ड और पक्षों का अध्ययन करके संभावित व्यवस्थागत कमियों और सुधारों पर सिफारिशें देगी। रिपोर्ट जमा करने की निश्चित तारीख या अंतिम कार्रवाई का विवरण मंत्रालय के इस बयान में नहीं दिया गया है। आगे की आधिकारिक सूचना आने पर ही परिणाम स्पष्ट होंगे।
आधिकारिक स्रोत: केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की 13 अक्टूबर 2026 की प्रेस विज्ञप्ति। शिक्षा की अन्य खबरें: IndiaSkills पंजीकरण की अवधि बढ़ी और नौ आईटीआई के उन्नयन की योजना।
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